हरियाणा की मंडियों में अब नहीं चलेगी कच्ची पर्ची:सरकार ने लगाई रोक; आज से नई व्यवस्था लागू, HC के निर्देश पर कार्रवाई

हरियाणा में ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर रोक, हाईकोर्ट में जनहित याचिका के बाद सरकार सख्त हो गई है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के दखल के बाद हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों को दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर आखिरकार रोक लग गई है। इसको लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। यह जनहित याचिका डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, ने अपने अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया के माध्यम से दायर की थी। याचिका में हरियाणा की मंडियों में प्रचलित ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत बंद करने की मांग की गई थी।

यहां देखिए ऑर्डर की कॉपी… 30 दिनों के भीतर करनी थी कार्रवाई मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह 30 दिनों के भीतर शिकायत पर स्पष्ट और ठोस आदेश जारी करे। कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बुधवार, 1 अप्रैल को राज्य सरकार ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों को सख्त निर्देश जारी किए। सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी आढ़ती किसान को ‘कच्ची पर्ची’ जारी नहीं करेगा। इसके स्थान पर फसल खरीद के बाद अनिवार्य रूप से ‘जे-फॉर्म’ ही किसान को दिया जाएगा, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। याचिका से जुड़ी अहम बातें… कच्ची पर्ची की जगह प्रिंटेड रसीद की मांग : वीरेंद्र लाठर ने अपनी याचिका में कहा कि प्रिंटेड रसीद पर दुकान का नाम, पता, नंबर और तारीख होनी चाहिए। ये रसीद फसल बेचने के तुरंत बाद किसान को मिलनी चाहिए, ताकि सब कुछ साफ-साफ पता चले। आजकल मंडियों में आढ़ती पहले किसानों को कच्ची पर्ची देकर कम पैसे देते हैं, लेकिन सरकारी कागजों में दिखाते हैं कि फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई है। याचिका में हेल्पलाइन नंबर की डिमांड : याचिकाकर्ता ने ये भी कहा है कि किसानों को जो पैसे दिए गए और जो सरकारी आंकड़े हैं, उनमें बड़ा फर्क आ जाता है। सरकार को किसानों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करना चाहिए, जो हमेशा चालू रहे, ताकि किसान अपनी शिकायतें तुरंत दर्ज करा सकें। अधिकारियों को ये आदेश दिया जाए कि फसल बेचने के तुरंत बाद किसानों को ‘जे-फार्म’ दिया जाए, ताकि पैसे मिलने में कोई देरी न हो और कोई गड़बड़ न कर सके। उन्होंने सरकार को इस बारे में पूरी जानकारी दी थी कि ये सब गलत हो रहा है, लेकिन सरकार ने फिर भी कोई खास कदम नहीं उठाया। कच्ची पर्ची के हो रहे थे ये नुकसान… बिचौलिए किसानों का फायदा उठा रहे : डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने बताया कि पंजाब और हरियाणा के किसान अच्छी फसल और एमएसपी पर बेचने के बावजूद कर्ज में डूबे हुए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि खेती में खर्चा बढ़ गया है, एमएसपी की कोई कानूनी गारंटी नहीं है, और बिचौलिए जैसे साहूकार किसानों का फायदा उठाते हैं, जिससे उनकी कमाई नहीं बढ़ पाती। किसानों को नकली पर्ची दे रहे: उन्होंने कहा कि आढ़ती अक्सर एमएसपी पर सरकारी खरीद होने के बावजूद भी किसानों को नकली कच्ची पर्ची देकर कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर करते हैं। इससे किसान कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। इस पर कानूनी प्रतिबंध लगाकर ही किसानों को बिचौलिए के शोषण से बचाया जा सकता है। किसानों की कमाई 40 प्रतिशत तक बढ़ेगी : लाठर ने कहा कि अगर कच्ची पर्ची का सिस्टम बंद हो जाए तो हरियाणा और पंजाब के किसानों की कमाई लगभग 30-40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। जिन किसानों के पास 3 हेक्टेयर जमीन है, उनकी सालाना कमाई 7 लाख रुपए से ज़्यादा हो सकती है। इससे किसानों को कर्ज से मुक्ति मिलेगी और वे खुशहाल जीवन जी सकेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *