रेवाड़ी जिले में शुक्रवार को आयोजित हुई जन परिवाद समिति की बैठक में अजीब नजारा देखने को मिला। मंत्री विपुल गोयल के जवाब-तलब करने पर धारूहेड़ा नगर पालिका सचिव सुमित कुमार ने एनडीसी में प्रॉपर्टी आईडी में हो रहे खेल पूरी कहानी को उजागर कर दिया। जिसे सुनने के बाद मंत्री ने अधिकारी को जेल भेजने की चेतावनी तक दे डाली। मंत्री की चेतावनी से भी अधिकारी अपनी बात पर कायम रहे। मंत्री को मीटिंग में एनडीसी पर प्रॉपर्टी आईडी बनाने की प्रक्रिया का डैमो देने का दावा भी कर दिया। नगर परिषद के रिटायर कार्यकारी अधिकारी मनोज यादव ने कहा कि जिस प्रकार से अधिकारी ने मंत्री के सामने सच्चाई रखी है, अधिकारी ने केवल मंत्री को सच्चाई से अवगत करवाया है। अधिकारी ने जो कहा, उसमें कुछ भी गलत नहीं है। अधिकारी की बात सुनने के बाद आखिरकार मंत्देरी को कहना पड़ा, अगले सप्ताह मैं चंडीगढ़ में रहूंगा। इस पर अधिकारियों से चर्चा करूंगा। आप भी अपने स्तर पर अन्य अधिकारियों से चर्चा कर सच्चाई का पता लगाना। अधिकारी ने अपने कार्यालय की शिकायत के जवाब में मंत्री को एनडीसी की वह सच्चाई बात दी, जिससे विभाग के मंत्री खुद अनजान थे। अधिकारी ने मंत्री को असल सच्चाई बताई नगर परिषद के रिटायर्ड ईओ मनोज यादव ने कहा कि एनडीसी पर कोई भी व्यक्ति खुद अपनी प्रॉपर्टी आईडी बना सकता है। अधिकारी ने मंत्री के सामने जो कहा, वह बिलकुल सही कहा। हां इसमें क्या डॉक्यूमेंट चाहिए, इस पर मैं इस पर तत्काल कुछ नहीं कह सकता। उन्होंने कहा एनडीसी केवल प्रॉपर्टी आईडी के रजिस्ट्रेशन का दस्तावेज है। उस आईडी पर रजिस्ट्री करना या नहीं करना तहसीलदार के विवेक पर निर्भर करता है। ऐसे में बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के प्रॉपर्टी आईडी को रजिस्ट्री का पक्का दस्तावेज कहना गलत होगा। एक शिकायत ने बदला बैठक का नजारा दरअसल शुक्रवार को बाल भवन में जिला परिवेदना समिति की बैठक की। इसमें समिति के चेयरमैन एवं स्थानीय निकाय एवं राजस्व मंत्री विपुल गोयल बाल भवन पहुंचे। 12 शिकायतों को सुनवाई के लिए रखा गया था। एक-एक कर शिकायत सुनने का सिलसिला शुरू हुआ। 6 शिकायतों की सुनवाई तक सब कुछ ठीक रहा। शिकायत नंबर 7 पर सुनवाई शुरू हुई तो अचानक सब कुछ बदल गया। फरियादी राज सैनी अपने बेटे के साथ मंत्री के सामने आई और अधिकारियों पर अपनी सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाए। नगर पालिका सचिव ने मंत्री के सामने विभाग का पक्ष रखा। 81 सेकंड के वीडियो में सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाई गई। ऐसे समझे कैसे शुरू हुआ पूरा मामला राज सैनी फरियादी नंबर 7 की, धारूहेड़ा में नंदरामपुर बॉस रोड पर हमारी 2440 वर्ग कॉमर्शियल जमीन है। जिसकी प्रॉपर्टी आईडी नंबर 37-1028-293 का 2010 से 2013 तक 9 हजार 303 रुपए प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया था। राज सैनी ने बताया कि मेरे पति प्रकाश सैनी ने कृषि भूमि के नाम से 6L7QPGUO से नई आईडी बनाकर जमीन को बेच दी। जबकि पति- पत्नी का विवाद 23 साल से कोर्ट में है। जो न केवल कोर्ट की अवमानना है, बल्कि धोखाधड़ी भी है। जिसकी शिकायत नगर पालिका सचिव और नगरायुक्त से कई बार की जा चुकी है। जिस पर शिकायत के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो रही। शिकायत पर नई नई प्रॉपर्टी आईडी डिलीट की शिकायत सुनने के बाद मंत्री ने नगर पालिका सचिव सुमित से जवाब मांगा। सचिव बोला सर, शिकायत मिलने के बाद नई प्रॉपर्टी आईडी को डिलीट कर दिया है। पुलिस को पत्र लिखकर इससे अवगत करवा दिया है। मंत्री ने पूछा पुरानी प्रॉपर्टी आईडी होते हुए नए प्रॉपर्टी आईडी कैसे बनी। सर एनडीसी पर कोई भी व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी आईडी बना सकता है। हमने पता किया है, नई आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड, जमाबंदी इत्यादि से एग्रीकल्चर लैंड की आईडी बनाई। एनडीसी सिस्टम में क्लोज ही ऐसा है, बिल्कुल बन सकती है। मंत्री बोले- गलत बयानबाजी, भेज दूंगा जेल किसी ने तो उसे अप्रूव किया होगा। सर एनडीसी से बिना किसी के अप्रूव किए स्वयं प्रॉपर्टी आईडी बनाई जा सकती है। तो क्या मैं लाल किले की आईडी अपने नाम से बनाकर रेवाड़ी में जमीन मांग सकता हूं। सचिव ने जवाब दिया, सर एनडीसी से ऐसा संभव है। सर एनडीसी में सिस्टम अपलोड होने वाले दस्तावेज की प्रमाणिकता नहीं, उसका साइज देखता है। इस पर मंत्री गोयल बोले कि गलत बयानबाजी कर रहे हो, जेल भेज दूंगा। अधिकारी ने कहा कि सर मैं अभी लैपटॉप पर इसे करके दिखा सकता हूं। एनडीसी में प्रॉपर्टी आइ्रडी बनाने का सिस्टम ऐसा ही है। अधिकारी का हौसला देख मंत्री को कहना पड़ा। अगले सप्ताह मैं चंडीगढ़ में रहूंगा। वहां अधिकारियों से इस पर चर्चा करूंगा। फिर अपने पीए का नाम लेकर यह याद रखने को कहा। इसके साथ ही एनडीसी की हकीकत बताने वाले नगर पालिका सचिव सुमित को भी अधिकारियों से बातचीत कर हकीकत पता करने को कहा।