हरियाणा के शिक्षा विभाग में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अंत में स्कूली बच्चों को आई-कार्ड (ID Cards) बांटने की तैयारी चल रही है। सत्र समाप्त होने के बाद बोर्ड परीक्षाएं भी खत्म हो गई हैं, ऐसे में विभाग के इस फैसले को टीचर और अभिभावक केवल एक औपचारिकता मान रहे हैं। प्रदेश के 250 पीएम श्री स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के आईकार्ड बनाने की प्रक्रिया इतनी धीमी रही कि एग्जाम शुरू होने के बाद भी कुछ जिलों में आईकार्ड नहीं पहुंच पाए हैं। अंबाला, पंचकूला व नूंह ऐसे जिलों में शामिल हैं, जहां अभी तक बच्चों को आईकार्ड नहीं मिले हैं। वहीं भिवानी के पीएमश्री स्कूलों के छात्रों को 14 जनवरी को आईडी कार्ड मिले हैं, लेकिन यहां पर बड़ा सवाल यह भी है कि अब ये आईडी कार्ड किसी काम के नहीं हैं, क्योंकि इन पर कक्षा का भी जिक्र होता है। अब विद्यार्थी नए सत्र में इसका प्रयोग नहीं कर पाएंगे। जुलाई में प्रोसेस शुरू, दिसंबर में फाइनल विभाग की ओर से पहले यह कार्य जिला व ब्लॉक स्तर पर ही करवाया जाना सुनिश्चित किया गया था, लेकिन बाद में इसे मुख्यालय स्तर पर करवाया गया। एक लाख 55 हजार 403 बच्चों का आईकार्ड बनाने के लिए 77.70 लाख रुपए का बजट जारी किया गया। अंतिम रूप दिए जाने के तक प्रोसेस में दिसंबर आ गया। वहीं आईकार्ड प्रिटिंग में इतनी देरी हुई की अब बोर्ड एग्जाम शुरू हो गए हैं। पीएम श्री स्कूलों की प्रमुख विशेषताएं निदेशक की चुप्पी, जांच करेंगे- ACS हरियाणा में 77 लाख रुपए का बजट आईकार्ड के नाम पर खर्च करने के लिए जिम्मेदार विभाग के निदेशक IAS जितेंद्र कुमार ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल व मैसेज का रिप्लाई नहीं दिया। वहीं विभाग के एसीएस विनीत गर्ग ने पूरे मामले को लेकर कहा कि वे इसकी जांच करवाएंगे कि आखिर किस स्तर पर देरी हुई है।