हरियाणा में स्टिल्ट +4 बिल्डिंगों के निर्माण पर रोक क्यों:5 बड़े शहरों में विरोध, पब्लिक सेफ्टी से समझौता, पार्किंग, सीवरेज, पानी की दिक्कतें बढ़ेंगी

हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में स्टिल्ट प्लस चार मंजिला बिल्डिंगों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बड़े शहर गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक और करनाल में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) इसका विरोध कर रही हैं। 2 अप्रैल को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी ऐसी बिल्डिंगों के बनाने पर अंतरिम आदेश तक रोक लगा दी। हरियाणा में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने 2 जुलाई 2024 को नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि घर के प्लॉट पर चार मंजिल तक बना सकते हैं। इसके साथ ही, अगर आपने बिना इजाजत के कुछ निर्माण कर लिया है, तो आप सरकार को कुछ पैसे देकर उसे वैध करवा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार ने पैनल सिफारिशों का पालन नहीं किया। रेवेन्यू के लिए पब्लिक सेफ्टी के साथ समझौता किया गया। इन बिल्डिंगों के बनने से पार्किंग से लेकर पानी, सीवरेज तक की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। आर्किटेक्चर और बिल्डिंग प्लानिंग एक्सपर्ट पुनीत सभ्रवाल से जानिए रोक लगने के संभावित कारण… 1. एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशें नहीं मानीं हरियाणा सरकार ने स्टिल्ट प्लस चार फ्लोर निर्माण पॉलिसी में सरकार की एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों की पूरी तरह अनदेखी हुई। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पॉलिसी लागू करते समय एक्सपर्ट कमेटी की कई अहम सिफारिशों का पालन नहीं किया गया। कमेटी ने जून 2023 में अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें इसको लागू करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई थीं, लेकिन उनकी पूरी तरह से अनदेखी की गई। 2. पब्लिक सेफ्टी पर नहीं दिया ध्यान हाईकोर्ट ने माना है कि हरियाणा सरकार ने इस पूरे मामले में रेवेन्यू को प्राथमिकता दी है, जबकि लोगों की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। ज्यादा मंजिलें बनने से आग, इमरजेंसी और भीड़भाड़ जैसी स्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है। हाईकोर्ट को लगा है कि “कमाई के लिए सुरक्षा से समझौता” हो रहा है। 3. इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्षमता कम हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान रिपोर्ट सामने आई कि कई सेक्टरों में सड़कें कागज पर 10 से 12 मीटर हैं, लेकिन वास्तविक चलने योग्य चौड़ाई सिर्फ 3.9 से 4.8 मीटर ही है। इतनी संकरी सड़कों पर 4 मंजिल की इमारतों से ट्रैफिक और भीड़ का दबाव बढ़ेगा। 4. इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट या वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि पॉलिसी लागू करने से पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षमता का ऑडिट जरूरी था, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने भी आरोप लगाया है कि बिना पर्याप्त तकनीकी और इंजीनियरिंग स्टडी के पॉलिसी लागू कर दी गई। हाईकोर्ट की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया है कि पहले योजना बनाओ, फिर मंजूरी दो, यह सिद्धांत नहीं अपनाया गया। 5. पॉल्यूशन से लेकर पानी तक की समस्या हाईकोर्ट की ओर से पॉल्यूशन, पार्किंग, सीवरेज और पानी जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि मामला सिर्फ इमारतों का नहीं, बल्कि रहने योग्य शहर का है। यही वजह है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, करनाल और रोहतक जैसे प्रमुख शहरों के सेक्टरों में स्थित RWA चार मंजिला इमारत निर्माण पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं। 2 अप्रैल को अंतरिम आदेश पर रोक 2024 में पॉलिसी का नोटिफिकेशन लागू होने के बाद गुरुग्राम की कॉलोनी एवं सेक्टरों में लगभग 8 हजार नक्शे पास हुए और 1500 से अधिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी हुए। मार्च 2025 तक करीब 24,600 भवन योजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी थी, जबकि 11,400 से अधिक OC जारी हो चुके थे। इससे यह साफ है कि पॉलिसी का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ, लेकिन इसके साथ समस्याएं भी बढ़ीं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनील सिंह बनाम हरियाणा राज्य और अन्य’ शीर्षक से 2 अप्रैल को इसको लेकर अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें स्टिल्ट 4 फ्लोर पॉलिसी को पर फिलहाल रोक लगा दी गई। हाईकोर्ट की बेंच ने कहा- सुरक्षा को खतरे में डाला याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की बेंच ने कहा कि “ऐसा लग रहा है कि हरियाणा सरकार ने सिर्फ ज्यादा पैसे कमाने के लिए लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।” बेंच ने आगे कहा कि सरकार और उसके अफसरों ने पॉलिसी लागू करने से पहले इलाके में सुविधाओं की जांच करने जैसे जरूरी कामों पर ध्यान नहीं दिया, जबकि गुरुग्राम शहर में पहले से ही सुविधाओं की बहुत कमी है, इसे भी अनदेखा कर दिया गया।

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