हरियाणा में ₹590 करोड़ घोटाले में हाई-लेवल जांच कमेटी बनी:IAS अफसर अरुण गुप्ता लीड करेंगे; सरकारी विभागों के अकाउंट से पैसों की हेराफेरी हुई

हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के बैंक अकाउंट से 590 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में गर्वनर के आदेश पर हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई गई है। कमेटी की अध्यक्षता वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता करेंगे। कमेटी IDFC बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया और मंजूरी की जांच करेगी। कमेटी यह भी पता लगाएगी कि किन लोगों ने इन बैंकों में पैसे भेजने की अनुमति दी थी। पंचकूला के सेक्टर 17 स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो थाने में IDFC बैंक चंडीगढ़ और AU स्मॉल बैंक सेक्टर-32 चंडीगढ़ के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। टीम ने दोनों बैंकों से रिकॉर्ड मांग लिए हैं। जांच कमेटी बनाने के ऑर्डर…. एक महीने में जांच करेगी कमेटी कमेटी में अरुण गुप्ता के अलावा, पंचायत विभाग के डायरेक्टर अनीश यादव, पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर विनय कुमार और HPSC के डिप्टी सचिव सतीश कुमार भी शामिल हैं। कमेटी यह भी देखेगी कि राज्य सरकार की बैंकिंग नीति इन दोनों बैंकों के लिए सही थी या नहीं। आगे के लिए नई नीति कैसे बनानी है, इस पर भी काम होगा। साथ ही, इस मामले में कौन लोग जिम्मेदार हैं, यह भी पता लगाया जाएगा। इस पूरी जांच के लिए कमेटी को एक महीने का समय दिया गया है। खुद बैंक ने किया घोटाले का खुलासा IDFC बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में करीब 590 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पकड़ में आई थी। बैंक ने खुद स्टॉक एक्सचेंज को सूचना देकर बताया कि उसके ही कुछ कर्मचारियों ने अनधिकृत और गलत तरीके से ये गड़बड़ी की, जिसमें बाहर के कुछ लोग शामिल है। बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया है। पांच पॉइंट्स में जानिए घोटाले में अब तक क्या हुआ… 4 कर्मचारी सस्पेंड, फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक ने तुरंत एक्शन लेते हुए 4 संदिग्ध अधिकारियों को जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया है। बैंक ने कहा है कि वह दोषी कर्मचारियों और बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। बैंक ने बुलाई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग इस गंभीर मामले को देखते हुए बैंक की ‘स्पेशल कमेटी फॉर मॉनिटरिंग फ्रॉड्स’ की बैठक 20 फरवरी को बुलाई गई थी। इसके बाद 21 फरवरी को बैंक के ऑडिट कमेटी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग हुई, जिसमें इस धोखाधड़ी की जानकारी साझा की गई। पैसे रिकवर करने की कोशिशें शुरू IDFC फर्स्ट बैंक ने उन बैंकों को भी ‘रिकॉल रिक्वेस्ट’ भेजी है, जिनके खातों में संदिग्ध पैसा ट्रांसफर किया गया है। बैंक ने दूसरे बैंकों से उन ‘संदिग्ध खातों’ में मौजूद बैलेंस को होल्ड करने की रिक्वेस्ट की है, ताकि पैसे की रिकवरी की जा सके। बैंक का कहना है कि नुकसान का सही आकलन जांच और रिकवरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो पाएगा। सरकार का दावा- रिकवर हुए पैसे 24 फरवरी को हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि 590 करोड़ रुपए रिकवर कर लिए गए हैं। सरकार का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके लिए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बाहर के लोगों के शामिल होने का शक बैंक को संदेह है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक कर्मचारियों के साथ कुछ बाहरी लोग या इकाइयां भी शामिल हो सकती हैं। बैंक ने RBI को भी इसकी सूचना भेजी है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि इस धोखाधड़ी की सही से जांच हो सके।

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