हरियाणा और राजस्थान के बीच तीन दशक से अटका 1994 का यमुना जल समझौता अब हकीकत बनने जा रहा है। हरियाणा सरकार ने हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हासियावास तक पाइपलाइन बिछाने के प्रस्ताव पर अपनी लिखित सहमति का पत्र राजस्थान सरकार को भेज दिया है। इस कदम से अब प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। हरियाणा ने बीच में कुछ जगहों पर पेयजल योजनाओं के लिए पानी मांगा है। 32 साल पहले हुए समझौते के पूरा होने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पिछले महीने यहां केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के समक्ष पाइपलाइन पर सैद्धान्तिक सहमति बनी थी। 265 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछेंगी यमुनानगर जिले में स्थित हथिनी कुंड बैराज से राजस्थान के चूरू के हासियावास तक 265 किलोमीटर तीन समानांतर पाइपलाइन बिछाई जाएगी। चूरू, सीकर, झुंझुनूं जिले को 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा। यमुनानगर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता आरएस मित्तल ने बताया कि राजस्थान सरकार को पत्र भेज दिया गया है। खुली नहर पर नहीं बनी बात
2017 में भी राजस्थान की ओर से रिपोर्ट सीडब्ल्यूसी को भेजी गई थी। जिसके बाद 2019 में राजस्थान ने एक और प्रस्ताव भेजा था। फरवरी 2021 में संशोधित प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन हरियाणा की ओर मावी (पानीपत)से राजस्थान के हिस्से की निकासी के लिए एक बैराज बना कर खुली नहर से या ओखला से पानी लेने के लिए कहा। पूरा पानी नहीं आने की आशंका से राजस्थान को यह मंजूर नहीं था। फरवरी 2024 में हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच समझौते के कार्यान्वयन के लिए एक नया एमओयू हुआ और उसके तहत अब पाइपलाइन पर हरियाणा ने लिखित में सहमति भेजी है। 10.4% पानी राजस्थान को मिलेगा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं नयी दिल्ली के बीच 12 मई, 1994 को हुए यमुना जल समझौते के तहत हथिनीकुंड हेड से मानसून अवधि में 1917 क्यूसेक जल राजस्थान को आवंटित किया गया था। समझौते के तहत कुल पानी का 40.6 प्रतिशत हरियाणा, 35.1 प्रतिशत यूपी, 10.4 प्रतिशत राजस्थान, 6.3 प्रतिशत दिल्ली और 1.7 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश के बीच बंटवारा होना था। फरवरी में हुआ नया MOU फरवरी, 2024 में हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच समझौते के कार्यान्वयन के लिए एक नया एमओयू हुआ और उसके तहत अब पाइपलाइन पर हरियाणा ने लिखित में सहमति भेजी है। 1994 के एग्रीमेंट के अनुसार, मानसून के दौरान (जुलाई-अक्टूबर) अतिरिक्त पानी राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों में पहुंचाने की योजना है।