हरियाणा राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी कैंडिडेट संजय भाटिया ने अपना नामांकन भर दिया है। उनके साथ सीएम नायब सैनी भी रहे। उधर, कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया है। यह उनका पहला चुनाव होगा। बीजेपी कैंडिडेट नामांकन भरने के बाद बौद्ध ने भी विधानसभा भवन पहुंचकर अपना नामांकन किया। उनके साथ पूर्व सीएम भूपेंद्र सहित कांग्रेस के 34 विधायक मौजूद रहे। इससे पहले कांग्रेस ऑफिस में कर्मवीर बौद्ध ने नामांकन पत्र भरा। बताया जा रहा है कि हरियाणा के एक सीनियर आईएएस उन्हें पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया। इसके बाद राहुल गांधी ने ही उनका नाम हरियाणा से राज्यसभा सदस्य के लिए सुझाया। नामांकन के बाद उन्होंने कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद किया। उधर, रोहतक के बोहर गांव के रहने वाले सतीश नांदल राज्यसभा के लिए तीसरे उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन कर दिया है। सतीश करीब दो बजे निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादियान और राजेश जून के साथ विधानसभा पहुंचे और नामांकन किया। नामांकन से पहले सतीश नांदल ने मीडियो से कहा कि हमारे साथी विधायकों ने सोच पैदा की है कि एक निर्दलीय प्रत्याशी भी होना चाहिए, इसीलिए पर्चा भर रहे हैं। तीन प्रत्याशी होने से एक बार फिर खेला होने के आसार बढ़ गए है। हालांकि, कांग्रेस प्रत्याशी बौद्ध ने कहा कि पार्टी के सभी 37 विधायक हमारे साथ है। कौन है सतीश नांदल, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया… भाजपा दो बार इस फॉर्मूले पर काम कर चुकी 2016 का स्याही कांड: 14 वोट अमान्य हुए
वर्ष 2016 में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए 3 प्रत्याशी मैदान में उतरे। 47 विधायकों वाली भाजपा ने एक सीट पर चौधरी बीरेंद्र सिंह को कैंडिडेट बनाया और दूसरी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को समर्थन दिया। इनेलो ने एडवोकेट आरके आनंद को मैदान में उतारा जबकि कांग्रेस ने कोई ऑफिशियल प्रत्याशी नहीं उतारा। आनंद दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलकर आए तो माना गया कि कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। हालांकि वोटिंग के दौरान कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट अमान्य कर दिए गए क्योंकि इनके बैलेट पेपर पर अलग रंग के पेन का इस्तेमाल हुआ था। आरोप था कि बैलेट पेपर पर गलत तरीके से स्याही लगाई गई। नतीजा दूसरी सीट पर BJP समर्थित सुभाष चंद्रा जीत गए। मामला चुनाव आयोग और अदालत तक पहुंचा। मीडिया ने इसे ‘स्याही कांड’ नाम दिया। 2022 में वोट दिखाने पर विवाद, क्रॉस वोटिंग भी
वर्ष 2022 में भी राज्यसभा की 2 सीटों पर चुनाव हुआ। भाजपा ने कृष्णलाल पंवार तो कांग्रेस हाईकमान ने अपने विश्वासपात्र अजय माकन को प्रत्याशी बनाया। विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस के पास 1-1 सीट आनी थी, मगर खेल हो गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने अपने बेटे कार्तिकेय शर्मा को निर्दलीय कैंडिडेट के रूप में मैदान में उतार दिया। भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया। वोटिंग के दौरान आरोप लगे कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपने वोट भाजपा एजेंट को दिखाए। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इन वोटों को रद्द करने की मांग की मगर वोट रद्द नहीं हुए। नतीजा- कार्तिकेय शर्मा जीत गए और कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग खुलकर सामने आ गई। किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई को लेकर खूब चर्चाएं चलीं। उसके बाद कुछ समय बीता और इन दोनों ने कांग्रेस छोड़कर BJP जॉइन कर ली। जानिये कौन हैं कर्मवीर बौद्ध, जिन पर कांग्रेस ने भरोसा जताया… एडीओ के पद से रिटायर हुए, पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में तैनात : कर्मबीर बौद्ध हरियाणा के अंबाला के रहने वाले हैं। वे हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 4 साल पहले प्रशासनिक अधिकारी (एडीओ) के पद से सेवानिवृत्त हुए। इनकी पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में असिस्टेंट हैं। कर्मवीर, सचिवालय में खरीद-फरोख्त को देखते थे और केयरटेकर रहे। सस्पेंड हुए तो बिना प्रमोशन ही रिटायर हुए : कर्मबीर बौद्ध हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 4 साल पहले एडीओ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। कर्मवीर सचिवालय में खरीद-फरोख्त को देखते थे, केयरटेकर थे। एक बार कुछ पंगा पड़ गया। आरोप-प्रत्यारोप लगे तो फिर कथित तौर पर स्टोर में आग लगी गई। इसके बाद तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी ने इनको सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद आगे कोई प्रमोशन नहीं हुआ और ये एडीओ के पद से ही सेवानिवृत्त हो गए। किसी गुट या खेमे से जुड़ाव नहीं, इसलिए प्रबल दावेदार : कर्मवीर सिंह बौद्ध कांग्रेस में किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार माना जा रहा है। अब जानिये…बौद्ध को प्रत्याशी बनाने की बड़ी वजह एससी समाज से, IPS पूरन केस के आंदोलन में अगुवा रहे पहली, वे एससी समाज से हैं। दूसरा, वो हरियाणा सिविल सचिवालय में एडीओ रह चुके हैं। वो अनुसूचित समाज, वंचितों और कर्मचारियों की आवाज उठाने का काम करते रहे हैं। तीसरा, वो बीते साल हरियाणा की राजनीति में भूचाल ला देने वाले आईपीएस वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में कथित आंदोलन के वे अगुवा रहे।
इनसे सबसे जरूरी बात यह रही कि वे काफी समय से राहुल गांधी की टीम के संपर्क में हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर भी राहुल के कार्यक्रमों की तस्वीरें दिखती हैं। बौद्ध को राहुल तक हरियाणा के आईएएस ने पहुंचाया कर्मबीर बौद्ध को राहुल गांधी तक पहुंचाने में हरियाणा के एक सीनियर आईएएस अधिकारी की अहम भूमिका बताई जा रही है। अभी ये अधिकारी एसीएस लेवल के हैं और एससी समाज से संबंध रखते हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इनके अच्छे संबंध हैं। उन्ही के जरिए बौद्ध की कांग्रेस में एंट्री कराई गई है। ये भी बताया जा रहा है कि इन आईएएस के परिवार में 22 के करीब आईएएस और पीसीएस अधिकारी है। अब भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया के बारे में जानिए…. यहां समझिए हरियाणा राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित…. किरण चौधरी और रामचंद्र जागड़ा का कार्यकाल हो रहा पूरा राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा की खाली हो रही ये दोनों सीटें भाजपा के पास हैं। राम चंद्र जांगड़ा मार्च 2020 में राज्यसभा सांसद बने थे। उनका कार्यकाल 10 अप्रैल 2020 से शुरू होकर 9 अप्रैल 2026 तक है। वे निर्विरोध चुने गए थे। वहीं, किरण चौधरी 27 अगस्त 2024 को राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। यह सीट दीपेंद्र हुड्डा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। दीपेंद्र ने रोहतक से सांसद बनने के बाद इस्तीफा दिया था। जीतने के लिए कम से कम 31 कोटा वोट चाहिए हरियाणा विधानसभा में कुल 90 वैध मत हैं, जिनमें भाजपा के 48, कांग्रेस के 37, निर्दलीय 3 और इनेलो के 2 वोट शामिल हैं। राज्यसभा की 2 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, और जीत का कोटा निकालने का फॉर्मूला है: कुल वैध मत ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1, यानी (90 ÷ 3) + 1 = 31। इसका मतलब है कि किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 कोटा वोट चाहिए। पहले राउंड में ये बन रही स्थिति पहले राउंड में, भाजपा और कांग्रेस 1-1 उम्मीदवार उतारती है, तो भाजपा अपने एक उम्मीदवार को 31 वोट देकर जिता सकती है, जिसके बाद उसके पास 17 वोट बचेंगे। वहीं, कांग्रेस अपने उम्मीदवार को 31 वोट देकर आसानी से जिता सकती है, जिसके बाद उसके पास 6 वोट बचेंगे। इस गणित के अनुसार, पहली सीट भाजपा और दूसरी सीट कांग्रेस की लगभग पक्की दिखती है। निर्दलीय के लिए ये बन रही स्थिति भाजपा के पास 17, कांग्रेस के पास 6, निर्दलीय 3 और इनेलो के पास 2 वोट शेष बचते हैं, जिनका कुल योग 28 होता है, जो कि जीत के लिए आवश्यक 31 के कोटे से कम है। यदि निर्दलीय (3) और इनेलो (2) भाजपा के साथ चले जाएं, तो भी भाजपा के पास केवल 22 वोट होंगे, जो कि 31 से कम हैं। अगर कांग्रेस के 6 वोट भी हथिया ले, तो भी कुल 28 वोट ही होंगे। इसलिए, भाजपा को दूसरी सीट जीतने के लिए 9 क्रॉस वोट चाहिए होंगे, जिससे उसके पास 17 + 3 + 2 + 9 = 31 वोट हो जाएंगे। एक-एक उम्मीदवार उतारा तो वोटिंग की जरूरत नहीं संवैधानिक मामलों के जानकार एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि भाजपा और कांग्रेस अपना एक-एक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारती है, तो वोटिंग की जरूरत नहीं होगी। नाम वापसी के अंतिम दिन ही दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को निर्विरोध घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि अगर भाजपा एक अन्य प्रत्याशी को मैदान में उतारती है तो वोटिंग करानी पड़ेगी। हालांकि इसके लिए भाजपा को क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ेगी। ——————————–
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