हरियाणा राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय की एंट्री दिल्ली से हुई:एक केंद्रीय मंत्री ने पूरी प्लानिंग की, BJP समर्थित विधायक ने मध्यस्थता की

हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार की एंट्री ने सबको चौंका दिया है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर यह निर्दलीय उम्मीदवार आया कहां से। सूत्रों की मानें तो इस उम्मीदवार की एंट्री दिल्ली के एक केंद्रीय मंत्री के इशारे पर हुई है, जो हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं। इस पूरे मामले की मध्यस्थता होटल व्यवसायी और गन्नौर से निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान ने की है। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को फिलहाल 3 निर्दलीय और 7 बीजेपी विधायकों का समर्थन मिला है, जिन्होंने उनके नामांकन पत्र पर प्रस्तावक के तौर पर साइन किए हैं। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव को लेकर अपने विधायकों और मंत्रियों को 14, 15,16 मार्च को चंडीगढ़ में रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान पार्टी कई दौर की मीटिंगें करेगी। अब जानिए नांदल की एंट्री की पूरी कहानी… कांग्रेस उम्मीदवार के नाम पर खींचतान इस कहानी की शुरुआत दो दिन पहले हुई, जब कांग्रेस में उम्मीदवार को लेकर खींचतान शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा कांग्रेस के नेता अपनी पसंद का उम्मीदवार चाहते थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया कि उम्मीदवार लोकल होगा, लेकिन पसंद उनकी होगी। इस बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक राव दान सिंह का नाम भी सामने आने लगा। हालांकि, नामांकन के आखिरी दिन 5 मार्च की सुबह केंद्रीय नेतृत्व ने कर्मवीर बौद्ध के नाम पर मुहर लगा दी। कादियान को सौंपी गई जिम्मेदारी सूत्रों के अनुसार, इससे कांग्रेस के एक धड़े के नेता नाराज हैं। दिल्ली में बैठे बीजेपी के नेताओं ने इस नाराजगी को भांपते हुए तुरंत एक ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी, जो हर तरह से सक्षम हो। यह जिम्मेदारी गन्नौर से विधायक देवेंद्र कादियान को सौंपी गई। कादियान ने अपने रियल एस्टेट बिजनेस में साथ काम करने वाले सतीश नांदल का नाम केंद्रीय नेता के सामने रखा। सहमति मिलने के बाद नांदल को चंडीगढ़ बुलाया गया, जहां उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार बनाने पर अंतिम मुहर लगी। नांदल के चुनाव को लेकर क्या-क्या संभावनाएं…. इनेलो का समर्थन मिला तो 9 वोट चाहिए इस बार का राज्यसभा चुनाव पहले के चुनावों जैसा होने की संभावना नहीं है। पहले जिन चुनावों में खेला हुआ है, उनमें कम विधायकों की जरूरत थी, लेकिन इस बार के चुनाव में जोे भी निर्दलीय लड़ेगा उसके लिए भाजपा, निर्दलीय और इनेलो विधायकों के अलावा 9 अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। ये नंबर सिर्फ कांग्रेस के पास ही है, ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस के ही विधायकों का सहारा है। इनेलो ने समर्थन नहीं दिया तो 11 वोट जरूरी नांदल फिलहाल निर्दलीय और भाजपा विधायकों के ही सहारे मैदान में हैं। इनेलो की तरफ से अभी उनके समर्थन का ऐलान नहीं किया गया है। इनेलो के पास 2 विधायक हैं। चूंकि नांदल ने इनेलो छोड़कर ही भाजपा जॉइन की थी, इसलिए दोनों विधायक उनका विरोध कर सकते हैं या फिर वोटिंग वाले दिन गैरहाजिर रह सकते हैं। ऐसे में नांदल को 11 क्रॉस वोट की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस की कलह का ही सहारा एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव पहले जैसा नहीं है। इस बार निर्दलीय उम्मीदवार को जीतने के लिए 9 या 11 वोट विधायकों के वोट चाहिए होंगे। यह संख्या सिर्फ कांग्रेस के पास है, इसलिए नांदल को चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। अगर कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोट किए तो उन पर कार्रवाई संभव है। एक्सपर्ट बोले- विधायक अपनी मर्जी से वोट के लिए स्वतंत्र कानूनी जानकार हेमंत कुमार ने कहा कि राज्यसभा चुनावों में कोई भी राजनीतिक दल अपने विधायकों को व्हिप जारी नहीं कर सकता, क्योंकि राज्यसभा चुनाव विधानसभा मंडल की कार्यवाही के अंतर्गत नहीं आता। इसलिए, हर विधायक अपनी मर्जी से वोट देने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि, पार्टी चाहे तो बागी विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है, लेकिन इससे उनकी विधायकी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हेमंत कुमार ने यह भी बताया कि 2003 में लोक प्रतिनिधित्व कानून (आरपी एक्ट) 1991 में संशोधन किया गया था, जिसके अनुसार राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट से वोटिंग का प्रावधान है। इसके तहत हर पार्टी के विधायक को अपना वोट डालने के बाद पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना होगा, अन्यथा उसका वोट रद्द कर दिया जाएगा।

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