हरियाणा के बहुचर्चित श्रम विभाग के वर्क स्लिप 1500 करोड़ रुपए घोटाले की जांच एक महीने बाद भी शुरू नहीं हुई है, जबकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद इस मामले की एक महीने में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। इस मामले को लेकर सीनियर आईएएस पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय हाई लेवल जांच कमेटी भी बनाई थी, लेकिन इस कमेटी की अभी तक एक भी मीटिंग नहीं हो पाई है। श्रम विभाग, कैबिनेट में नंबर टू की भूमिका में रहने वाले मंत्री अनिल विज के पास है। उन्होंने खुद ही एक महीने पहले यानी दिसंबर में इस घोटाले को उजागर किया था। विज के पास श्रम के अलावा ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी है। कमेटी में 2 आईएएस- एक IPS आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने पंकज अग्रवाल, आईएएस की अध्यक्षता में ये हाई लेवल इन्वेस्टिगेशन कमेटी गठित की है, जिसमें आईएएस राजीव रतन, और आईपीएस पंकज नैन सदस्य हैं। यह कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी और विभिन्न अधिकारियों तथा अन्य लोगों द्वारा की गई अनियमितताओं का पता लगाएगी। इसके अलावा, यह समिति विभाग को सुधारात्मक या निवारक उपायों की भी सिफारिश करेगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो। यह समिति सभी तथ्यों की जांच कर एक माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। अब जानिए जांच में देरी होने की ये 3 वजह… 1. अफसरों की व्यवस्तता: 1500 करोड़ घोटाले के लिए सीएम नायब सैनी के द्वारा जो कमेटी बनाई गई है, उसमें शामिल अफसरों के पास कई विभागों की जिम्मेदारी है। विभागों की लगातार हो रही मीटिंगों के कारण अधिकारी इस जांच को लेकर समय नहीं दे पाए। कुछ अफसरों ने बताया कि इसी महीने बजट सत्र है, जिस कारण बैक टू बैक मीटिंगें हो रही हैं, जिसके कारण जांच कमेटी एक भी मीटिंग नहीं बुला पाई है। 2. घोटाले का दायरा बड़ा, 22 जिलों से रिपोर्ट आनी: विज के श्रम विभाग में वर्क स्लिप घोटाला का दायरा काफी बड़ा है। कई जिलों की इस घोटाले में संलिप्तता है। श्रम मंत्री के द्वारा अब तक 13 जिलों में इसकी जांच कराई गई है। इसके बाद सीएम सैनी ने नौ और जिलों से भी रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में कमेटी को पूरे प्रदेश से जांच शुरू करने से पहले इनपुट मंगवाना है। 3. जांच का पैटर्न अभी तय नहीं: जांच में देरी की तीसरी सबसे बड़ी अहम वजह जांच कैसे शुरू की जाएगी, इसकी रूपरेखा ही तय नहीं करना है। कमेटी ने इसके लिए 6 जनवरी को एक मीटिंग बुलाई थी, लेकिन इस मीटिंग में कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा, जिसके कारण जांच के पैटर्न पर अभी काम नहीं हो पाया है। हालांकि अब कमेटी ने इसी हफ्ते मीटिंग बुलाई है, जिसमें इस बिंदु पर अधिकारी मंथन करेंगे। क्या है विज के विभाग का वर्क स्लिप घोटाला… खुलासे के बाद एक्टिव हुआ CMO श्रम मंत्री अनिल विज के खुलासे के बाद हरियाणा सीएमओ की ओर से भी एक दावा किया गया था कि विज जो दावा कर रहे हैं कि श्रम मंत्री हरियाणा द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में ऐसा कोई लेटर नहीं मिला है। हालांकि, विभाग द्वारा इस विषय पर एक फाइल प्रस्तुत की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री को सूचित किया गया कि विभाग ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है और 13 जिलों की रिपोर्ट तैयार है, लेकिन शेष नौ जिलों की रिपोर्ट लंबित हैं। इसलिए विभाग ने सूचित किया कि शेष जिलों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। CM ने फाइल वापस भेज पूरी रिपोर्ट तलब की मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और अगले ही दिन फाइल वापस भेज दी तथा श्रम मंत्री से सभी जिलों की पूर्ण रिपोर्ट, वित्तीय हानि के सही आंकड़ों समेत प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि, रिपोर्ट अभी तक लंबित है। यह मुद्दा निर्माण श्रमिकों और श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें मिलने वाले लाभों से संबंधित है। आरोप लगाया गया है कि जिन कार्यों पर उन्होंने श्रम किया था, वे सही नहीं हैं, इसलिए उनका भवन निर्माण श्रमिक के रूप में दर्ज होना संदिग्ध प्रतीत होता है। क्या बोले अफसर… आईएएस पंकज अग्रवाल का कहना है कि, बजट सत्र के कारण सभी अधिकारी व्यस्त हैं, हालांकि 6 जनवरी शुक्रवार को कमेटी की पहली औपचारिक मीटिंग बुलाई गई है। इस मीटिंग की सूचना कमेटी में शामिल सभी सदस्यों को दे दी गई है। मीटिंग सिविल सचिवालय में ही आयोजित की जाएगी।