हरियाणा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट अटका:10 IMT के लिए सिर्फ एक जगह जमीन मिली, 9 में पेंच फंसा; फ्लोर एरिया रेशियो कम करने की तैयारी

हरियाणा की नायब सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) बनाने पर संकट के बादल छंटते नहीं दिख रहे। सरकार द्वारा प्रस्तावित 10 आईएमटी के लिए सिर्फ एक जिले में ही जमीन मिल पाई है। 9 में महंगी जमीन रोड़ा बन रही है। दरअसल, अंबाला कैंट और अंबाला जिले के नारायणगढ़ से ही किसान आईएमटी के लिए जमीन देने के लिए तैयार हुए हैं। यही वजह है कि अब दोनों क्षेत्रों में सरकार और किसानों के बीच जमीन के मूल्य को लेकर मोलभाव लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार रहा तो जल्द ही रजिस्ट्री शुरू होने की उम्मीद है। अंबाला छावनी क्षेत्र में पिछले कई महीनों से जमीन को लेकर लगातार बातचीत चल रही थी। शुरुआत में किसानों द्वारा कलेक्टर रेट से काफी अधिक कीमत मांगे जाने से मामला अटका हुआ था। हालांकि, राज्य सरकार की ई-भूमि प्रणाली और जिला स्तर पर हुई ऑफलाइन बैठकों के बाद अब दोनों पक्षों के बीच व्यावहारिक दर पर सहमति बनती दिख रही है। हालांकि, यमुनानगर, रेवाड़ी, फरीदाबाद-पलवल, जींद जैसे कई जिलों में आईएमटी परियोजनाएं अब तक अटकी पड़ी हैं। इसकी वजह किसानों द्वारा जमीन के ऊंचे दाम मांगना है। हुड्‌डा सरकार में भी अंबाला में थी तैयारी यहां रजिस्ट्री शुरू होते ही आईएमटी अंबाला को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। यदि अंबाला छावनी और नारायणगढ़ में जमीन की रजिस्ट्री शुरू हो जाती है, तो यह हरियाणा की आईएमटी नीति के लिए टर्निग प्वाइंट साबित हो सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य की औद्योगिक छवि को नई मजबूती मिलेगी। यहां बता दें कि इस क्षेत्र में आईएमटी का प्रस्ताव पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय भी आया था, लेकिन कुमारी सैलजा और विनोद शर्मा के राजनीतिक टकराव के चलते वह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई थी।
महंगी जमीन से कई जिलों में अटका मामला
यमुनानगर, रेवाड़ी, फरीदाबाद-पलवल, जींद और हिसार जैसे जिलों में आईएमटी परियोजनाएं अब भी जमीन के ऊंचे दाम के कारण ठप हैं। इन जिलों में कई किसानों ने कलेक्टर रेट से 6 से 8 गुना तक कीमतें मांगी हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि जमीन अधिग्रहण का रास्ता नहीं अपनाया जाएगा और केवल बाजार आधारित खरीद मॉडल पर ही जमीन ली जाएगी। ई-भूमि पोर्टल पर अव्यावहारिक दरें सामने आने के बाद अब जिला स्तर पर विशेष टीमों को वास्तविक बाजार मूल्य तय करने और किसानों से सीधी बातचीत के निर्देश दिए गए है। अब जानिए किस जिले में कहां IMT बनाने की योजना… 1200 एकड़ होगा फ्लोर एरिया रेशियों
सरकार भी मान चुकी है कि आईएमटी के लिए तय 1500 एकड़ की न्यूनतम भूमि सीमा कई जिलों में बाधा बन रही है। इसी को देखते हुए इसे घटाकर 1200 एकड़ करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह राहत उन्हीं क्षेत्रों में दी जाएगी जहां थोड़ी जमीन की कमी के कारण परियोजना अटक रही है। इसी को देखते हुए उद्योग विभाग ने फ्लोर एरिया रेशियों ( FAR) को लगभग मुक्त करने का फैसला लिया है। इससे कम जमीन पर ऊंची औद्योगिक इमारतें और क्लस्टर विकसित किए जा सकेंगे। यह मॉडल मानेसर और खरखौदा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों के लिए आकर्षण बढ़ाएगा। महेंद्रगढ़ और जींद में नहीं बनी बात महेंद्रगढ़ के खुडाना क्षेत्र में पर्याप्त निजी जमीन न मिलने और पंचायत भूमि के कानूनी अड़चनों के चलते आईएमटी का प्रस्ताव अटका है। वहीं जींद में प्रस्तावित बढी आईएमटी को लेकर किसानों के विरोध से मामला अधर में है। दिल्ली से सटे फरीदाबाद-पलवल और रेवाड़ी में जमीन के ऊंचे बाजार मूल्य ने सरकार के लिए मोलभाव मुश्किल बना दिया है। हाईकोर्ट पहुंच चुका आईएमटी का मामला हरियाणा सरकार को सूबे में 10 आईएमटी बनाने की मुहिम को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल, हरियाणा सरकार की सरकारी विभागों को स्वेच्छा से दी गई भूमि की खरीद की पॉलिसी 2025 को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह पॉलिसी 9 जुलाई 2025 को नोटिफाई की गई थी।
जींद जिले के अलेवा गांव निवासी किसान सुरेश कुमार ने एक याचिका दायर कर इस पॉलिसी को रद्द करने की मांग की है। प्रदेश सरकार ने विभिन्न परियोजनाओं के साथ-साथ 10 आईएमटी बनाने के लिए यह जमीन अधिगृहीत करनी थी। याचिका में ये लगाए गए हैं आरोप सुरेश कुमार ने अपनी याचिका में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से इस नीति को रद्द करने और सरकार को इसके तहत किसी भी तरह की कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की है।

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