हरियाणा से भाजपा को चंदे में 104 करोड़ मिले, कांग्रेस को 23 तो आप को ‌5 करोड़

राजनीति दलों को चंदा देने के मामले में हरियाणा देश के राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में छठे स्थान पर है। यह जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में सामने आई है। इसके अनुसार, राजनीतिक दलों को साल 2024-25 में हरियाणा से करीब 134.61 करोड़ रुपए चंदे के रूप में मिले। इसमें सबसे ज्यादा 104.63 करोड़ रुपए लगातार तीसरी बार सत्ता में आई भाजपा को मिले। कांग्रेस को 23.84 करोड़ तो आम आदमी पार्टी को 5.94 करोड़ रुपए चंदा मिला। सीपीआई (एम) को 19 लाख रुपए मिले। यानी यहां से भाजपा को कांग्रेस से करीब साढ़े तीन गुना ज्यादा चंदा मिला है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हरियाणा राजनीतिक दलों को चंदा देने के मामले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब, केरल, असम, ओडिशा जैसे बड़े राज्यों से भी आगे रहा। पंजाब 64.74 करोड़ के चंदे के साथ 11वें स्थान पर रहा। यहां भाजपा को सर्वाधिक 60.296 करोड़ मिले। सत्ताधारी आप 71 लाख के साथ तीसरे स्थान पर रही। क्षेत्रीय: सरकार से हटने पर जजपा से दानदाताओं का किनारा, चुनावी वर्ष में इनेलो की स्थिति सुधरी जजपा: जजपा के चंदे में 5 साल में सबसे अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया। 2019 से मार्च 2024 जक सत्ता में रही। जब पार्टी सरकार में गठबंधन सहयोगी थी, तब चंदे में काफी वृद्धि हुई। 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी को करोड़ों में कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत चंदा प्राप्त हुआ। 2024-25 में गठबंधन टूटने और विधानसभा चुनाव 2024 में प्रदर्शन के बाद बड़े कॉर्पोरेट डोनर्स ने जजपा से किनारा करना शुरू कर दिया। पार्टी के मुख्य दानदाता शराब व्यवसायी, स्थानीय रियल एस्टेट, बिल्डर्स और खाप पंचायतों से जुड़े धनी व्यक्ति बताए गए हैं। इनेलो: वित्तीय स्थिति पिछले 5 वर्षों में काफी चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन 2024 के आसपास मामूली सुधार देखा गया। 2023-24 में कुल आय लगभग 84.50 लाख रही थी। इसमें से अधिकतर हिस्सा सदस्यता शुल्क से आया था। बड़े कॉर्पोरेट घरानों से चंदा बहुत कम मिलता है। इनका मुख्य आधार जमीनी स्तर का कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण व्यापारी हैं। राष्ट्रीय दल: हरियाणा में आप को पंजाब से 7 गुना अधिक चंदा, 5 वर्ष में सर्वाधिक 4 गुना भाजपा: हरियाणा से भाजपा के चंदे में 5 साल में करीब दो गुना बढ़ोतरी हुई है। 2021-22 में उसे यहां से करीब 40 करोड़ रुपए चंदा मिला था, जो 2024-25 में बढ़कर 104.63 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसका कारण राज्य में तीसरी बार सरकार बनना है। चंदे में 91% हिस्सा कॉर्पोरेट और 7% हिस्सा व्यक्तिगत दानदाताओं का रहा। कांग्रेस: हरियाणा से कांग्रेस का चंदा 5 साल में करीब दोगुना हो गया है। 2021-22 में यह 10-12 करोड़ के बीच था। 2024-25 में 23.84 करोड़ तक पहुंच गया। चंदे में कॉर्पोरेट की हिस्सेदारी 68% और व्यक्तिगत दानदाताओं की हिस्सेदारी 29% रही। आप: ‘आप’ के चंदे में 5 वर्ष में 4 गुना वृद्धि हुई। 2021-22 में यह 1.2 करोड़ था, जो 2024-25 में 5.94 करोड़ रहा। पंजाब में सरकार बनने के बाद हरियाणा में सक्रियता बढ़ी। पंजाब से सटे जिलों से चंदा अधिक आया। बड़ी बात यह है कि हरियाणा से पंजाब के मुकाबले सवा 7 गुना अधिक चंदा मिला। राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले टॉप-6 राज्य राज्य भाजपा कांग्रेस आप सीपीआई (एम) कुल दिल्ली 2365.43 249.11 24.04 0.88 2639.48 महाराष्ट्र 2316.57 121.09 1.18 0.007 2438.86 गुजरात 308.38 0.69 0.10 0 309.17 प. बंगाल 223.05 30.86 0.10 0.16 254.19 कर्नाटक 183.53 34.65 2.07 0.04 220.30 हरियाणा 104.63 23.84 5.94 0.19 134.61 प्रदेश में गुरुग्राम राजनीतिक चंदे का पावरहाउस बना राजनीतिक दलों के चंदे का पावर हाउस गुरुग्राम बन गया है। यहां से मिलने वाले चंदे का करीब 74 फीसदी सिर्फ रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार से जुड़ी कंपनियों से आता है। यहां बड़ी कंपनियों के ऑफिस भी हैं। ऐसे में यहां से सबसे ज्यादा पैसा आता है। (राजनीतिक पार्टियों के मिले चंदे की राशि करोड़ रुपए में)

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