हरियाणा में चर्चित IDFC बैंक घोटाले की जांच को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इसी सप्ताह इस मामले की जांच CBI को सौंपने की मंजूरी दे सकती है। वर्तमान में मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (HSB-ACB) कर रही है और अब तक की जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। ACB ने इस मामले में 6 अधिकारियों, जिनमें 5 IAS अधिकारी शामिल हैं, के खिलाफ कार्रवाई के लिए धारा 17A के तहत सरकार से मंजूरी मांगी है। हालांकि, अभी तक सरकार ने इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इसलिए CBI जांच की सिफारिश सूत्रों के अनुसार, ACB की जांच में यह संकेत मिले हैं कि पूरा घोटाला अफसरों की शह पर हुआ और बैंक खातों को खुलवाने में उनकी भूमिका रही। इसी कारण सरकार और जांच एजेंसी दोनों ही चाहती हैं कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच CBI से कराई जाए, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके। यदि इस सप्ताह CBI जांच की मंजूरी मिलती है, तो यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा मोड़ ले सकता है। CBI को कार्रवाई से पहले 17A की मंजूरी जरूरी नहीं सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आरोपी IAS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले CBI को धारा 17A की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। यह CBI की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का हिस्सा है।
इसका मतलब है कि प्रारंभिक जांच और आवश्यक कार्रवाई बिना 17A की पूर्व अनुमति के भी शुरू की जा सकती है, जिससे जांच प्रक्रिया में देरी नहीं होती। जांच में हरियाणा कैडर का अधिकारी नहीं होगा शामिल CBI की कार्यप्रणाली के अनुसार, जिस राज्य में किसी बड़े घोटाले की जांच की जाती है, वहां उसी राज्य के कैडर के अधिकारियों को जांच टीम में शामिल नहीं किया जाता। इस नियम के तहत यदि हरियाणा में IDFC बैंक घोटाले की जांच CBI को सौंपी जाती है, तो जांच टीम में हरियाणा कैडर का कोई अधिकारी नहीं होगा, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। 3 विभागों से जुड़ा मामला हरियाणा IDFC बैंक घोटाला 3 विभागों से जुड़ा है। ये बैंक फ्रॉड हरियाणा सरकार के प्रदूषण विभाग, पंचायत विभाग, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से जुड़ा है। इस घोटाले में बैंक कर्मचारियों ने फर्जी खातों का इस्तेमाल किया और सरकारी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के पैसे को निजी खातों और फर्जी फर्मों में डायवर्ट किया गया है। अब तक मामले में 4 कर्मचारियों को सस्पेंड और गिरफ्तार किया गया है। ED ने 19 ठिकानों पर छापे मारे है। बैंक ने 100 फीसदी भुगतान करने का दावा किया है, जबकि इस मामले में जांच अभी जारी है। ED कर चुकी 19 जगह छापेमारी इस मामले में ACB की टीम बैंक कर्मियों सहित ज्वैलर्स और हरियाणा सरकार के 2 वित्त अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पिछले दिनों इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो चुकी है। ED की ओर से 19 ठिकानों पर छापामारी भी गई थी। फिलहाल, CBI जांच की आशंका से हरियाणा सरकार के कई वरिष्ठ IAS अफसरों की नींद उड़ गई है, क्योंकि अभी तक सिर्फ छोटे अफसर ही इस शिकंजे में आए हैं। चर्चा है कि मामले में करीब आधा दर्जन IAS अफसरों की भूमिका संदिग्ध मिली है जो सरकारी एजेंसियों के रडार पर हैं। इन अफसरों पर गिरी गाज आईडीएफसी बैंक फ्रॉड के मामले में सीबीआई जांच की मंजूरी से पहले तीन आईएएस अफसरों पर सरकार ने गाज गिरा दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त प्रधान सचिव आईएएस साकेत कुमार को उनके सभी पदों से हटाते हुए आर्कीव डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी दे दी है। इसी तरह सीनियर आईएएस पंकज अग्रवाल और डीके बेहरा को महत्वपूर्ण विभागों से पदमुक्त करते हुए साइड कर दिया गया है। पंकज अग्रवाल को आर्कीटेक्चर विभाग का प्रधान सचिव लगाया गया है। वहीं डीके बेहरा को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन का सचिव लगाया गया है। चर्चा है कि इन तीनों अफसर का नाम आईडीएफसी बैंक फ्रॉड में सामने आया है। ये सभी अफसर पूर्व में पंचायत विभाग में तैनात रह चुके हैं। एसीबी की ओर से भी इन अफसरों के खिलाफ 17A की कार्रवाई शुरू करने के लिए मंजूरी मांगी गई है। अब सिलसिलेवार जानिए IDFC बैंक घोटाले के बारे में… FD के नाम पर हुआ घोटाला : दरअसल, हरियाणा सरकार के 18 विभागों द्वारा लगभग 590 करोड़ रुपए की राशि IDFC बैंक में जमा कराई गई थी। यह राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश करने के लिए दी गई थी। खाता बंद करने के अनुरोध पर खुलासा : इसके बाद एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। इस प्रक्रिया के दौरान खाते की वास्तविक शेष राशि और विभाग द्वारा बताई गई राशि में अंतर पाया गया। जांच में बैलेंस में अंतर मिला : 18 फरवरी 2026 से अन्य हरियाणा सरकारी संस्थाओं ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया। जांच के दौरान उनके बताए गए बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस में अंतर पाया गया। CM ने ACB को जांच सौंपी : घोटाले का खुलासा होने के बाद सीएम नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच ACB को सौंपी। जिसमें ACB ने तत्काल प्रभाव से केस दर्ज करते हुए बैंक मैनेजर रिभव ऋषि को गिरफ्तार किया। मैनेजर ने सरकारी अधिकारियों और अन्य आरोपियों से मिलकर इस रकम को एफडी में जमा करने के बजाय अपने निजी फायदे के लिए डायवर्ट कर दिया था। 6 महीने पहले बैंक की नौकरी छोड़ी : जांच में सामने आया कि 6 महीने पहले आरोपी ने बैंक की नौकरी छोड़ दी थी। इसके अलावा रिलेशनशिप मैनेजर अभय को गिरफ्तार किया गया। जिसने रिभव ऋषि की बनाई योजना पर काम करते हुए अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक को भी शामिल कर लिया। अधिकारियों के पास जाकर अपनी ब्रांच में एफडी बनवाने के लिए लाइजनिंग का काम करता था। स्वाति सिंगला ने बनाई कंपनी : जांच में सामने आया कि स्वाति सिंगला ने एक ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम से कंपनी बनाई। जिसमें वह 75 प्रतिशत की शेयर होल्डर थी। पति अभय के कहने पर कंपनी बनाकर फंड को दूसरे अकाउंट में भेजा गया, जहां से प्रॉपर्टी और शेयर मार्केटिंग में हिस्सा लिया गया।