पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों के शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अर्जित अवकाश (कमाई गई छुट्टियों) के मामलों में ये शिक्षक पंजाब सिविल सेवा नियम के तहत आएंगे और सेवानिवृत्ति पर अधिकतम 300 दिनों तक की छुट्टियों का नकदीकरण (पैसे के रूप में भुगतान) पाने के हकदार होंगे। यह अहम फैसला जस्टिस जगमोहन बंसल की अदालत ने चंडीगढ़ स्थित डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ के एक सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर की याचिका पर सुनाया। कोर्ट बोला छुट्टियों का पैसा ले सकेंगे याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने अगस्त 1986 में डीएवी कॉलेज में नौकरी जॉइन की थी और 31 दिसंबर 2018 को सेवानिवृत्त हुए। रिटायरमेंट के समय उनके खाते में 247 दिन की अर्जित छुट्टियां बाकी थीं। कॉलेज की ओर से उन्हें 180 दिनों की छुट्टियों का ही भुगतान दिया गया, जबकि उन्होंने 247 दिनों के अवकाश के नकदीकरण की मांग की थी। इसी को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े सहायता प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को अर्जित छुट्टियों के मामले में पंजाब सिविल सेवा नियम लागू होंगे। इसका मतलब है कि वे रिटायरमेंट पर अधिकतम 300 दिन की बची हुई छुट्टियों का पैसा ले सकेंगे। हजारों शिक्षकों को होगा फायदा इस फैसले के बाद राज्य के सहायता प्राप्त कॉलेजों में काम कर रहे शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। अब तक कई शिक्षकों को पूरी अर्जित छुट्टियों का लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन अब वे अधिकतम 300 दिन तक की बची हुई छुट्टियों का पैसा प्राप्त कर सकेंगे। इससे सेवारिटायरमेंट के समय उन्हें एक साथ अच्छी-खासी रकम मिलेगी, जो उनके लिए पैसों के मामले में बड़ा सहारा बनेगी।