पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) से जुड़े कथित करोड़ों रुपए के मनी लांड्रिंग घोटाले में आरोपी जजपा के पूर्व विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा को कोई राहत नहीं दी है। हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी जमानत के लिए निर्धारित कानूनी कसौटियों पर खरा नहीं उतर पाया और इस स्तर पर उसे रिहा नहीं किया जा सकता। कोर्ट के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश तथ्यों के अनुसार, मामला वर्ष 2015 से 2019 के बीच एचएसवीपी के बैंक खाते से करीब 70 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि यह खाता विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं था और इसके माध्यम से सुनियोजित तरीके से फर्जी भुगतान किए गए। ईडी ने आरोप लगाया कि राम निवास उस समय अकाउंट्स असिस्टेंट था, जिसने सह-आरोपी वरिष्ठ लेखा अधिकारी सुनील कुमार बंसल के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। 100 करोड़ से अधिक खातों से निकाले
इसके तहत तीसरे पक्ष के बैंक खातों का इस्तेमाल कर सरकारी धन को अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया और बाद में बड़ी रकम नकद निकालकर अपने पास रखी गई। जांच में यह भी सामने आया कि 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि विभिन्न खातों से नकद निकाली गई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किया है और लंबे समय से हिरासत में है। साथ ही, ट्रायल लंबा चलने की संभावना को आधार बनाते हुए जमानत की मांग की गई। कुल पांच आरोपी थे शामिल
कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि मामले में कुल 5 आरोपी, 39 गवाह और 111 दस्तावेज शामिल हैं, जो यह संकेत नहीं देते कि ट्रायल असामान्य रूप से लंबा चलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी 9 जून 2025 से ही हिरासत में है, जबकि अधिकतम सजा 7 वर्ष है, ऐसे में वर्तमान अवधि को “लंबी हिरासत” नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लांड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में जमानत के लिए पीएमएलए की धारा 45 के तहत दोहरी शर्तें लागू होती हैं। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता इन शर्तों को पूरा करने में विफल रहा।