हिंदू से मुस्लिम बने युवक का शव मस्जिद में मिला:5 साल पहले रॉन्ग नंबर से प्यार; राजस्थान से बिहार आकर की शादी

सुपौल में हिंदू से मुस्लिम बने युवक का शव मस्जिद के शौचालय में मिला है। वह बिजली मिस्त्री का काम करता था। शव मिलने के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सुपौल भेज दिया। मृतक की पहचान भवानीपुर दक्षिण पंचायत के इस्लामपुर गांव निवासी अब्दुल नासिर के दामाद अश्विनी अहमद के रूप में हुई है। वह पिछले पांच सालों से पत्नी-बच्चों के साथ पूर्णिया में रह रहा था। बीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार ने बताया पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। मौके से आई 2 तस्वीरें देखें… सिलसिलेवार पढ़िए, पूरा घटनाक्रम.. मस्जिद में मिला शव, दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला
रविवार दोपहर सुपौल जिले के प्रतापगंज बाजार स्थित थाना रोड की जामा मस्जिद में जब नमाज के लिए पहुंचे लोगों ने मस्जिद के शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद पाया। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो लोगों को संदेह हुआ। इसके बाद स्थानीय लोगों ने दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा खुलते ही अंदर एक युवक का शव पड़ा मिला। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए और देखते ही देखते मस्जिद परिसर में भीड़ जुट गई। घटना की सूचना तुरंत प्रतापगंज थाना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सुपौल भेज दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले को संदिग्ध मानते हुए हर पहलू से जांच कर रही है। राजस्थान से बिहार तक की कहानी
मृतक मूल रूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर का रहने वाला था और पेशे से बिजली मिस्त्री का काम करता था। करीब पांच साल पहले उसकी पहचान मोबाइल फोन पर एक रॉन्ग नंबर के जरिए नौसीन सबा से हुई थी। बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई। लगभग दो वर्षों तक दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। इसके बाद करीब तीन वर्ष पहले दोनों प्रतापगंज से भागकर राजस्थान चले गए और वहीं शादी कर ली। शादी के बाद दोनों लगभग एक वर्ष तक राजस्थान में रहे, फिर बिहार लौटकर पूर्णिया में रहने लगे। धर्म परिवर्तन के बाद पत्नी के गांव में रह रहा था
पूर्णिया में रहने के दौरान अश्विनी ने धर्म परिवर्तन कर लिया था। पहले उसका नाम अश्विनी सिंह था, जिसे बाद में बदलकर उसने अश्विनी अहमद रख लिया। धर्म परिवर्तन के बाद वह अपनी पत्नी के गांव इस्लामपुर में रहने लगा था। पिछले करीब दस महीनों से वह वहीं रह रहा था और बिजली मिस्त्री का काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। दंपती के दो छोटे बच्चे भी हैं, एक डेढ़ वर्ष की बेटी और चार माह का बेटा। परिवार के लोगों का कहना है कि वह मेहनत मजदूरी कर घर चलाता था, हालांकि कुछ समय से उसके नशे की आदत को लेकर घर में तनाव भी रहने लगा था। घर से निकला, रात मस्जिद में रुका; सुबह मिली लाश
परिजनों के मुताबिक शनिवार को पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। बताया जाता है कि अश्विनी ने नशे के लिए पत्नी से पैसे मांगे थे, जिसे लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। विवाद के बाद वह घर से यह कहकर निकला कि वह अपने घर जा रहा है, लेकिन बाद में प्रतापगंज बाजार स्थित जामा मस्जिद पहुंच गया। मस्जिद के इमाम इम्तियाज आलम के अनुसार शनिवार रात करीब 10 बजे युवक मस्जिद आया और रुकने की अनुमति मांगी। मानवीय आधार पर उसे मस्जिद के एक कमरे में ठहरने दिया गया। रविवार सुबह करीब आठ बजे उसे जगाया गया था। कुछ देर वह बाहर बैठा रहा और फिर वहां से चला गया। बाद में नमाज के समय शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद मिला और दरवाजा तोड़ने पर उसका शव बरामद हुआ।

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