हिमाचल प्रदेश में दिल्ली पुलिस को डिटेन किए जाने के मामले में सियासत गरमा गई। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर कानून व्यवस्था और संघीय ढांचे को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रोटोकॉल पर सवाल उठा रही है। इस मामले को लेकर भाजपा का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलने लोकभवन पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल पुलिस द्वारा दिल्ली पुलिस को दूसरी बार रोका जाना गंभीर भूल है। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री और हिमाचल पुलिस बहुत बड़ी गलती कर चुके हैं। देवभूमि हिमाचल को अपराधियों की शरणस्थली न बनाया जाए।’ उनका आरोप है कि इससे प्रदेश की छवि धूमिल हो रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने ऊना में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एआई समिट से जुड़े प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने आई दिल्ली पुलिस पर ही अपहरण का मुकदमा दर्ज कर देना “अराजकता की पराकाष्ठा” है। उनके मुताबिक, दो राज्यों की पुलिस को आमने-सामने खड़ा करना संघीय ढांचे और कानून व्यवस्था पर सीधा आघात है। बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है और सरकार राजनीतिक संरक्षण देने में लगी है। विधिसम्मत कार्रवाई को आई पुलिस को रोकना गलत: धर्माणी भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस विधिसम्मत कार्रवाई के तहत आई थी, लेकिन उसे रोका गया। उन्होंने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया और कहा कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार की मंशा पर सवाल उठेंगे। BJP सरकारों ने गलत परंपरा शुरू की: धर्माणी वहीं, कांग्रेस सरकार ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। उनके अनुसार, युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका डील के विरोध में प्रदर्शन किया था। धर्माणी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस बिना पूर्व सूचना के हिमाचल सदन और बाद में रोहड़ू के चिड़गांव क्षेत्र में कार्रवाई करने पहुंची, जो स्थापित प्रोटोकॉल के विपरीत है। पुलिस ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया: चौहान मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भी दिल्ली पुलिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस को बिना सूचना दिए कार्रवाई की गई और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के वारंट नहीं था और पूरी तरह गैर कानून ढंग से आई। इस वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। राजनीतिक टकराव का मामला बन गया कुल मिलाकर, यह मामला अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। भाजपा जहां इसे संघीय ढांचे और कानून व्यवस्था पर हमला बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे प्रोटोकॉल उल्लंघन का मुद्दा करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं।