हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पंजाब से सटी सीमा पर खनन माफिया पर लगाम कसी है। इस कार्रवाई के बाद राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले दो सालों में दोगुनी से अधिक हो गई है।
यह समस्या विशेष रूप से पंजाब के पठानकोट से सटे हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों में गंभीर थी, जहाँ सीमा विवाद के कारण अवैध खनन सामग्री का आदान-प्रदान हो रहा था। विधानसभा में इंदौरा के विधायक मलेन्द्र राजन ने अवैध खनन का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद सरकार ने इस पर संज्ञान लिया। सीमा स्पष्ट न होने के कारण हिमाचल पुलिस को कार्रवाई में परेशानी हो रही थी। सीमा स्पष्ट न होने से हिमाचल पुलिस को कार्रवाई में परेशानी इस समस्या के समाधान के लिए हिमाचल सरकार ने सीमांकन के लिए एक बार फिर पंजाब सरकार को पत्र भेजने का फैसला किया है। इससे पहले भी कांगड़ा के उपायुक्त द्वारा पत्र लिखा गया था, लेकिन सीमा निर्धारण का काम लंबित था। अवैध खनन पर नकेल कसने और नई माइनिंग पॉलिसी-2024 के सख्त प्रावधानों के कारण राज्य के खजाने में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इंदौरा क्षेत्र से रॉयल्टी संग्रह के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में रॉयल्टी संग्रह ₹4.98 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर ₹6.96 करोड़ हो गया। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा ₹11.44 करोड़ तक पहुंच गया है, जो राजस्व में उल्लेखनीय उछाल दर्शाता है। इस सफलता से उत्साहित सरकार अब अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई करने की योजना बना रही है, ताकि राज्य के राजस्व को और बढ़ाया जा सके और अवैध खनन को पूरी तरह से रोका जा सके।