हिमाचल में कुत्तों और तेंदुए की लड़ाई का VIDEO:भेड़-बकरियों का शिकार करने बाड़े में गया, 6 मिनट चला संघर्ष, फिर गटर के पाइप में घुसा

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में एक तेंदुआ भेड़-बकरियों के बाड़े (फार्म) में शिकार को गया। मगर बाड़े के भीतर ‘गद्दी कुत्तों’ ने तेंदुए को पूरी रात भेड़-बकरियों पर हमला नहीं करने दिया। भेड़ पालक 2 युवकों ने जब सुबह बाड़े का दरवाजा खोला तो तेंदुए ने उन पर अटैक कर दिया। इसके बाद गद्दी कुत्तों ने तेंदुए पर हमला बोल दिया। इससे तेंदुआ बुरी तरह चोटिल हो गया है। इसका वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि कुत्तों और तेंदुआ के बीच करीब 6 मिनट तक संघर्ष चलता रहा। आखिर में थका-हारा तेंदुआ एक गटर की पाइप में घुस गया। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बेहोश कर पकड़ लिया और फिर शिमला इलाज के लिए भेज दिया। बाड़े का दरवाजा बंद, रातभर फंसा रहा तेंदुआ दरअसल, बीते रविवार रात चंडीगढ़-देहरादून हाईवे पर जोगीबन गांव स्थित एक भेड़ बाड़े में तेंदुआ घुस गया। इस दौरान बाड़े का दरवाजा खुद बंद हो गया। इससे तेंदुआ अंदर फंस गया। बाड़े के भीतर पहले से तीन-चार कुत्ते मौजूद थे। दूसरे कोने में 50 से ज्यादा भेड़-बकरियां थीं। भेड़ पालक को पूरी रात इसकी जानकारी नहीं थी कि बाड़े के भीतर तेंदुआ है। इसलिए, सुबह के वक्त जब दोनों भेड़ पालक बाड़े में भेड़-बकरियों को चारा देने गए, उन्होंने जैसे ही बाड़े का दरवाजा खोला तो तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। अपने मालिक पर हमला होते ही गद्दी कुत्ते तेंदुए पर झपट गए। उन्होंने एक नाले में तेंदुए को चारों तरफ से घेर लिया और बुरी तरह घायल कर दिया। इस दौरान कुछ लोगों ने पत्थर से भी तेंदुए पर हमला किया। भेड़पालक युवक हुआ घायल तेंदुए के हमले से संग्राम और नीरज नाम के दोनों युवकों की जान तो बच गई, लेकिन उनके शरीर पर काफी चोटें आई हैं। इस दौरान कुत्तों और तेंदुए के बीच पांच से छह मिनट तक संघर्ष चलता रहा। आखिर में थका-हारा तेंदुआ एक गटर की पाइप में घुसकर जान बचाने में सफल हुआ। तीन घंटे बाद पकड़ में आया तेंदुआ इसके बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया। रेस्क्यू दल ने पहले गटर की पाइप के एक किनारे को पूरी तरह बंद किया, ताकि तेंदुआ भाग न पाए, और पाइप के दूसरे छोर पर पिंजरा लगाया। इसके बाद ट्रैंक्विलाइज़र से तेंदुए को बेहोश किया गया और उपचार के लिए शिमला के टूटीकंडी रेस्क्यू सेंटर भेजा गया। तेंदुए को रेस्क्यू करने में लगभग तीन घंटे से अधिक समय लगा। वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ शहनवाज अहमद ने बताया कि कुत्तों के हमलों और पत्थरों से तेंदुआ गंभीर रूप से घायल है। किन्नौर में पाए जाते हैं गद्दी कुत्ते गद्दी कुत्ते मुख्यत ट्राइबल जिला किन्नौर में पाए जाते हैं। ये स्वभाव के शांत होते हैं और अक्सर बाघ-तेंदुए से भेड़-बकरियों की सुरक्षा करते हैं। दरअसल, किन्नौर जिला के ऊंचे क्षेत्रों में सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। जिला के भेड़-पालन करने वाले लोग सर्दियों में बर्फबारी से पहले अपनी भेड़-बकारियों को लेकर मैदानी इलाकों की तरफ इन्हें चराने के लिए निकलते है। ये लोग चार पांच महीने तक अपने घरों से बाहर जंगलों व सुनसान जगह में रात बिताते हैं। इस दौरान गद्दी कुत्ते पूरी रात जंगली जानवरों से भेड़ बकरियों की सुरक्षा करते हैं। इसी वजह से हिमाचल की ‘गद्दी’ चरवाहा जनजाति के नाम से इन कुत्तों का नाम पड़ा। ये बेहद मजबूत, भारी और मध्यम से बड़े आकार के होते हैं। इनकी गर्दन धनुषाकार और पुष्ट होती है और त्वचा पर अक्सर काले रंग के घने बाल होते हैं।

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