हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही के बाद केंद्र से मिलने वाली आपदा राहत एक बार फिर राजनीतिक और संवैधानिक बहस का मुद्दा बन गई है। बीते साल भारी बारिश से हुई तबाही का जायजा लेने 9 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं धर्मशाला पहुंचे थे। इस दौरान PM ने हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपए के विशेष आपदा राहत पैकेज की घोषणा की थी। मगर लगभग चार महीने बाद भी यह राशि राज्य को जारी नहीं की गई है। इस देरी को लेकर हिमाचल सरकार ने केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राज्य के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि 1500 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज तो दूर, राज्य को आपदा राहत के नाम पर 15 पैसे भी नहीं मिले हैं। जगत नेगी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब हिमाचल को आपदा राहत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा हो। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2023 में भी हिमाचल प्रदेश ने सदी की सबसे भीषण आपदा झेली है, जिसमें राज्य को 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था। उस आपदा के बाद केंद्र सरकार की टीमें खुद हिमाचल आईं और नुकसान का आकलन किया। केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट में भी 9300 करोड़ रुपए के नुकसान की पुष्टि की थी। 2023 की राहत भी अधूरी: नेगी इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने PDNA (पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट) के तहत केवल 2500 करोड़ रुपए की सहायता को मंजूरी दी। मंत्री नेगी का आरोप है कि 2023 की पूरी स्वीकृत राशि भी अब तक जारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में केवल 600 करोड़ रुपए दिए गए, जबकि हाल ही में फिर से 600 करोड़ रुपए देने की बात कही गई है। यानी वर्ष 2026 में प्रवेश करने के बावजूद हिमाचल अभी भी 2023 की आपदा राहत का इंतजार कर रहा है। उत्तराखंड-बिहार को पूरा बजट तो हिमाचल को क्यों नहीं: जगत जगत नेगी ने इस मुद्दे को संघीय ढांचे से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जब उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्यों को आपदा राहत की राशि समय पर मिल सकती है, तो हिमाचल के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति संघीय व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है, जहां सभी राज्यों को समान अधिकार और समान व्यवहार मिलना चाहिए। जब PM ने घोषणा की, तो पैसा रोकने वाला कौन: मंत्री नेगी ने यह भी सवाल उठाया कि जब विशेष पैकेज की घोषणा खुद प्रधानमंत्री स्तर से हुई, तो फिर उसे जारी करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है। आपदा राहत में देरी से पुनर्निर्माण, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली पर सीधा असर पड़ता है। केंद्रीय बजट का दुरुपयोग कर रही राज्य सरकार: BJP वहीं, इस पूरे मामले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से मिलने वाले पैसे का प्रदेश सरकार दुरुपयोग कर रही है। राणा ने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए केंद्र से फंड जारी किया जा रहा है, उस पर खर्च नहीं किया जा रहा। केंद्र सरकार को इसकी जानकारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन अधिकारियों की इसमें संलिप्तता पाई गई, वे “हॉट वॉटर” यानी गंभीर मुसीबत में पड़ जाएंगे। राजेंद्र राणा ने कहा कि केंद्र ने हाल ही में 600 करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन प्रदेश सरकार आभार जताने के बजाय आरोप लगाने में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आपदा और सड़कों की मरम्मत के लिए मिलने वाले केंद्रीय बजट से कर्मचारियों की सैलरी दे रही है।