हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले मंगलवार को तपोवन स्थित परिसर में सियासी हलचल तेज रही। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें सत्ता पक्ष की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में तय किया गया कि सरकार इस सत्र में आक्रामक रुख अपनाएगी और विपक्ष, विशेषकर भाजपा, के हर आरोप का जवाब तथ्यों और आंकड़ों के साथ देगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधायकों को स्पष्ट संदेश दिया कि शीतकालीन सत्र सरकार के कामकाज की परीक्षा है, जिसमें कांग्रेस को एकजुट और तैयार दिखना चाहिए। सत्र का एजेंडा मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा, हाल की प्राकृतिक आपदा के दौरान किए गए राहत व पुनर्वास कार्य और प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं की जमीनी हकीकत। सरकार आपदा प्रबंधन में अपने प्रयासों को विस्तार से प्रस्तुत करेगी और केंद्र से मांगी गई विशेष सहायता बनाम वास्तविक मदद पर भी सदन में बात करेगी। कम मदद के मुद्दे पर बनी रणनीति बैठक में यह भी रणनीति बनी कि केंद्र द्वारा कथित तौर पर ‘कम मदद’ के मुद्दे को तथ्यात्मक रूप से उठाया जाएगा, ताकि जनता तक यह संदेश पहुंचे कि राज्य सरकार ने संकट की घड़ी में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसके अतिरिक्त, विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में शुरू की गई नई योजनाओं, सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा, अन्य विकास कार्यों और खाली पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को मजबूती से सामने रखेंगे। कांगड़ा जिले से जुड़ी संभावित ‘खुशखबरी’ पर भी चर्चा होगी। विधायकों को अपने क्षेत्र का अपडेट ठोस डेटा के साथ सदन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। सत्र के लिए 744 प्रश्न प्राप्त हुए सत्र के लिए कुल 744 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिए कि किसी भी सवाल को हल्के में न लिया जाए। विभागवार सटीक और विस्तृत जवाब तैयार रखने को कहा गया, ताकि सरकार किसी भी प्रश्न पर रक्षात्मक स्थिति में न दिखे। अधिकारियों को भी बैकअप डेटा और दस्तावेज तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे पूरक सवालों का भी तुरंत जवाब दिया जा सके। इसका उद्देश्य सूचना के मोर्चे पर विपक्ष को कोई खाली जगह न देना है। 8 दिसंबर तक चलेगा विधानसभा सत्र उधर, भाजपा बेरोजगारी, पंचायत चुनाव, कानून-व्यवस्था और आपदा राहत में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुकी है। इसे भांपते हुए कांग्रेस विधायक दल की बैठक में तय हुआ कि विपक्ष के हर आरोप को राजनीति से प्रेरित बताया जाएगा और जवाब सिर्फ बयानबाजी से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड पर दर्ज उपलब्धियों और आंकड़ों के साथ दिया जाएगा। 26 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलने वाले इस शीतकालीन सत्र में रिकॉर्ड 8 बैठकें प्रस्तावित हैं, ऐसे में धर्मशाला अगले दस दिनों तक हिमाचल की सियासत का असली रणक्षेत्र बनने जा रहा है।