अमृतसर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकार की स्वास्थ्य योजना के बावजूद एक गरीब परिवार को अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ा। यह घटना मकबूलपुरा इलाके के एक निजी अस्पताल में बीती रात को हुई, जहा 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज वाले हेल्थ कार्ड के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने इलाज करने से इन्कार कर दिया। इसको लेकर काफी देर हंगामा होता रहा। पीड़ित परिवार के सदस्य मनीषा अनुसार, वे कई वर्षों से अपने बच्चे का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में करवा रहे हैं और इस बार सरकारी योजना से राहत की उम्मीद लिए हुए थे। अस्पताल द्वारा इलाज से इन्कार किए जाने से उनकी परेशानी और बढ़ गई। मौके पर आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता कमल कुमार पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के साथ तीखी बहस की और आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं कर रहे हैं और गरीबों से पैसे वसूल रहे हैं। विधायक बोलीं-गलतफहमी हुई विवाद बढ़ने पर पूर्वी हलके की विधायक जीवनजोत कौर भी मौके पर आईं। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताया और कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने कहा कि मरीज की बीमारी योजना के तहत कवर नहीं थी, जिससे यह गलतफहमी पैदा हुई। उन्होंने बताया कि अब मरीज को बेहतर इलाज के लिए उच्च केंद्र पर रेफर कर दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझ गया है।