देशभर में रंगों का पर्व होली (दुल्हेंडी) का त्योहार 4 मार्च को मनेगा। इस बार होली पर सिर्फ रंगों की मस्ती नहीं होगी, बल्कि आसमान में एक दुर्लभ घटना भी होगी। आज होलिका दहन के बाद अगले दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। यह संयोग 122 साल बाद बन रहा है। इस चंद्र ग्रहण की वजह से दुल्हेंडी यानी फाग 4 मार्च को मनाई जाएगी। भारत में कल यानी 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ग्रहण के 9 घंटे पहले यानी सूर्योदय के पहले ही सूतक काल शुरू हो जाएगा। इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। मंदिर के कपाट और पूजा-पाठ भी बंद रहेंगे। होलिका दहन आज शाम कुरुक्षेत्र में धार्मिक शोध केंद्र के अध्यक्ष पंडित ऋषभ वत्स ने बताया कि आज शाम 6 बजे के बाद होलिका दहन होगा। आमतौर पर होलिका दहन पूर्णिमा की रात को होता है, लेकिन इस बार पूर्णिमा पर ग्रहण है। इसलिए होलिका दहन एक दिन पहले किया जाएगा। अगले दिन चंद्र ग्रहण होने की वजह से उस दिन रंग खेलना मना है। इसलिए दुल्हेंडी का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा। 1904 में बना था संयोग कुछ जानकारों के मुताबिक, आखिरी बार ऐसा संयोग 1904 में यानी 122 साल पहले बना था। होली के दिन ग्रहण का लगना बहुत कम होता है। इससे त्योहार की रौनक तो बढ़ जाती है, लेकिन नियमों का पालन जरूरी है। सूतक में खाना न बनाएं, न ही खाएं। ग्रहण खत्म होने के बाद घर साफ और स्नान करें। अनाज और कपड़े का दान दें। गर्भवती महिलाएं खास सावधानी बरतें। मंदिर भी रहेंगे बंद ग्रहण काल में देवी-देवताओं की पूजा नहीं होगी। मंदिरों के पट भी बंद ही रहेंगे। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और दान करना शुभ होता है। इस बार होली के साथ ग्रहण होने से त्योहार का रूप थोड़ा बदल जाएगा। लोग रंग खेलने से पहले सूतक के नियमों का पालन जरूर करें।