शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर गुरुनगरी की बेटी रुपिंदर कौर ने 8 राज्यों में जिस्मफरोशी के दलदल में फंसी 800 महिलाओं को बाहर निकालकर नई जिंदगी दी हैं। रुपिंदर कौर निवासी नेशनल सिटी होम 20 साल से इसके लिए संघर्ष कर रही हैं। समाज में अकसर ऐसी बुराइयों को देखकर लोग आंखें बंद कर लेते हैं मगर रुपिंदर ने जिस्मफरोशी के चंगुल से महिलाओं को बाहर निकालकर मिसाल कायम की है। रुपिंदर कौर के नेक कार्य को देखते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने जज्बे को सलाम कर सम्मानित किया है। बता दें कि महिला दिवस के मौके पर समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतर कामों के लिए अलग-अलग राज्यांे के 4 महिलाओं को राज्यपाल से सम्मानित होना था, जिसमें रुपिंदर का नाम भी शामिल था। रुपिंदर 7 साल में 26 अवार्ड हासिल कर चुकी हैं। जिसमें चाइल्ड सोशल वेलफेयर सोसायटी विभाग से नेशनल लेवल पर अवार्ड, सृजनहारी अवार्ड व अन्य तरह के अवार्ड शामिल हैं। रुपिंदर ने बताया कि उनके दादा कैप्टन गुरदीप सिंह अकसर जरूरतमंदों की मदद करते थे। उन्हीं से प्रेरित होकर इस नेक कार्य में लगीं। 1998 में दादा जी का निधन हो गया तो उनके नाम पर कैप्टन गुरदीप सिंह सोसायटी बनाई। सोसायटी के जरिए महिलाओं को मुख्यधारा में जोड़ने का काम कर रही हैं। 2006 में बटाला से 12 साल की पहली लड़की को रेस्क्यू किया था। उन्होंने कहा, खुशी होती है कि वह लड़की आज अपनी नई जिंदगी जी रही है। उनके इस मुहिम को लोगों का साथ मिलता गया और इस समय 8 राज्यों पंजाब, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल, दिल्ली तक जिस्मफरोशी के चंगुल में फंस चुकी करीब 800 महिलाओं को बाहर निकाल चुकी हैं। इस समय 20 महिलाओं की टीमें जुड़ चुकी हैं। रुपिंदर ने बताया कि महिलाओं को तस्करों के चंगुल से छुड़ाने पर जान जोखिम में रहता है मगर कभी हार नहीं मानी। अब तक जितनी भी बेटियों को मुख्यधारा में जोड़ने का काम किया उसमें सबसे ज्यादा 12 से 18 साल की लड़कियां शामिल हैं। ज्यादातर अनाथ व असहाय बच्चियों को तस्कर अपना निशाना बनाते हैं। जिस्मफरोशी के दलदल से बाहर निकालने के बाद महिलाओं को टेलरिंग, दुपट्टा कलरिंग, टेडी बियर बनाना, जूट बैग बनाने जैसे कामों की स्किल ट्रेनिंग दिलाकर आत्मनिर्भर बनाती हैं।