हरियाणा के सोनीपत में एक किसान 250 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर पर चढ़कर कूदने की धमकी देने लगा। दरअसल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की टीम बुलडोजर लेकर सरकारी जमीन से उसके घर और स्कूल को हटाने पहुंची थी, जिसका वो विरोध कर रहा था। किसान के हंगामे के चलते मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने कार्रवाई रोक दी। इसके बाद हालात को संभालने के लिए उसे अधिकारी समझाने लग गए। उन्होंने काफी समय तक उसे नीचे आने को कहा, लेकिन देर रात तक वो वहीं चढ़ा हुआ है और वहीं अनशन शुरू कर दिया। उसने कूदकर जान देने की भी धमकी दी। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने स्कूल के एक कमरे को तोड़ दिया, जिस पर काफी हंगामा हुआ। स्कूल में 150 बच्चे पढ़ते हैं। हालांकि, डीईओ का कहना है कि अगले सेशन के लिए स्कूल की मान्यता रद्द की जा चुकी है। किसान को काफी देर समझाने के बाद अब अधिकारी भी घटनास्थल से चले गए। किसान के टावर पर चढ़ने और बुलडोजर एक्शन के PHOTOS… सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला… डीईओ बोले-अस्थायी मान्यता पर चल रहा था स्कूल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नवीन गुलिया का कहना है कि 2006 के तहत भूमि एक्वायर हुई थी और यह स्कूल प्रशासन की भूमि में आ गया था। 2019 में स्कूल प्रबंधन कोर्ट चला गया था और उसके बाद कोर्ट के आदेश पर यह संज्ञान लिया गया था कि बीच सेशन में स्कूल को बंद ना किया जाए। उसके बाद अस्थायी मान्यता पर स्कूल चलता रहा है। इसके बाद पिछले दिनों देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राई दौरे के दौरान भी सोनीपत के डीसी ने फाइल मंगवाई थी। जिसका केस कोर्ट के आदेश पर बनाकर भेजा गया था। जहां बाद में कहा गया था कि सेशन खत्म होते ही बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करवा दिया जाए। अब जानिए क्यों हो रही कार्रवाई और विरोध क्यों… लोग बोले- 2006 से पहले बने हैं मकान गांव असावरपुर निवासी रमेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2006 में जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उससे पहले ही गांव में मकान बने हुए थे। उन्होंने कई बार सरकार को प्रार्थना पत्र भेजकर जमीन के बदले जमीन और मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। रमेश कुमार का दावा-150 मकानों ने नहीं लिया मुआवजा रमेश कुमार के अनुसार, गांव में करीब 150 ऐसे मकान हैं जिन्होंने 2006 के अनुसार तय मुआवजा नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मिलीभगत कर पैसे लेकर होटल और रेस्टोरेंट बनवा रहे हैं, जबकि गरीबों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा। मौजूदा रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में जमीन के भाव करीब एक लाख रुपये प्रति गज तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में 2006 के हिसाब से 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देना पूरी तरह अन्याय है। उन्होंने मौजूदा बाजार दर के अनुसार मुआवजा देने की मांग की है।