250 फीट ऊंचे-टावर पर 18 घंटे से किसान का अनशन:सोनीपत प्रशासन के खिलाफ जताया विरोध; जमीन के बदले जमीन देने की मांग

सोनीपत ‘kgj में किसान दूसरे दिन भी 250 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ा हुआ है। करीब 18 घंटे से वह लगातार टावर पर बैठा है। किसान और उसका पूरा परिवार अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है कि जब तक उन्हें दूसरी जगह जमीन नहीं दी जाती, वह नीचे नहीं उतरेगा। किसान ने मंगलवार दोपहर से अब तक कुछ खाया-पिया नहीं है और पूरी रात टावर पर ही गुजारी। वह अपने साथ मोबाइल फोन लेकर गया था, लेकिन अब फोन भी बंद हो चुका है। इधर किसानों ने सरकार के खिलाफ धरना देने का ऐलान भी कर दिया है। 250 फीट ऊंचे टावर पर डटा किसान गांव असावरपुर के 48 वर्षीय किसान सुनील मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे मोबाइल टावर पर चढ़ गया और तब से वहीं बैठा हुआ है। वह लगातार प्रशासन के खिलाफ विरोध जता रहा है और नीचे उतरने से इनकार कर रहा है। रातभर जागकर उसने टावर पर ही समय बिताया।
जमीन की मांग पर अड़ा परिवार किसान का परिवार साफ कह रहा है कि जब तक उन्हें एक स्थान से दूसरी जगह जमीन नहीं दी जाती, वे पीछे नहीं हटेंगे। परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों की जमीन को कौड़ियों के भाव नहीं छोड़ेंगे। कूदने की धमकी से मचा हड़कंप टावर पर चढ़े किसान ने कूदकर जान देने की धमकी दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई रोक दी और उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह देर रात तक नहीं माना। HSVP की कार्रवाई बनी विवाद की वजह दरअसल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम नेशनल हाईवे-44 के पास अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंची थी। टीम को देखते ही किसान सुनील टावर पर चढ़ गया और विरोध शुरू कर दिया। घर के नीचे चल रहा था स्कूल जिस मकान को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही थी, उसी के नीचे बीआर जेड स्कूल संचालित हो रहा था, जिसमें करीब 150 बच्चे पढ़ते हैं। प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान स्कूल के एक कमरे को तोड़ दिया, जिसके बाद गांव में तनाव बढ़ गया। महिला ने दी आत्मदाह की चेतावनी स्कूल संचालक सोमिल और परिवार की महिलाओं ने चेतावनी दी, कि यदि पूरा मकान और स्कूल तोड़ा गया, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगी। इसके चलते माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।
परिवार का कहना है कि वे 1962 से इस जमीन पर रह रहे हैं और यह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। वहीं प्रशासन इस जमीन को सरकारी बता रहा है, जिससे विवाद गहराता जा रहा है। डीईओ ने बताई स्कूल की स्थिति जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया के अनुसार, यह जमीन 2006 में अधिग्रहित की गई थी और स्कूल अस्थायी मान्यता पर चल रहा था। कोर्ट के आदेश के चलते इसे बीच सत्र में बंद नहीं किया गया, लेकिन अब सत्र खत्म होने के बाद बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि अब अगले सेशन के लिए स्कूल की अपील रद्द की जा चुकी है। गांव में धरने का ऐलान घटना के बाद गांव में देर रात कई लोग एकत्र हुए और बैठक कर निर्णय लिया गया कि किसान के समर्थन में धरना दिया जाएगा। सुनील के घर और स्कूल के बाहर टेंट लगाकर आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यहां जानिए क्यों हो रही कार्रवाई और विरोध क्यों… 2006 से चला आ रहा है जमीन विवादः एचएसएसवीपी (HSVP) के अधिकारी सिद्धार्थ ने बताया कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण 2 मार्च 2006 को किया गया था। इसके बाद से ही इस जमीन को लेकर लगातार कोर्ट में विवाद चलता रहा। जमीन मालिक कई बार अलग-अलग कोर्ट पहुंचे, लेकिन वो हर बार हारे। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक केस खारिजः सुनील ने मामले को लेकर पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी याचिका खारिज कर दी गई। इतना ही नहीं, एचएसएसवीपी (HSVP) में भी अपील की गई, लेकिन वहां से भी केस रिजेक्ट हो चुका है। 60 मीटर रोड प्रोजेक्ट में आ रही है जमीनः यह जमीन 60 मीटर चौड़ी सड़क के एलाइनमेंट में आती है, जिसके चलते इसे खाली कराना जरूरी है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित व्यक्ति और अन्य लोग इस जमीन पर अवैध कब्जा कर रखे हैं। कई बार नोटिस देने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही आज यह कार्रवाई की जा रही थी। अभी भी ले सकते मुआवजाः एचएसएसवीपी (HSVP) के अधिकारी सिद्धार्थ ने बताया कि यदि जमीन मालिक अभी भी मुआवजा लेना चाहते हैं, तो वे आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, उन्हें वर्ष 2006 के निर्धारित रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा, जो करीब 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया गया था। लोग बोले- 2006 से पहले बने हैं मकान गांव असावरपुर निवासी रमेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2006 में जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उससे पहले ही गांव में मकान बने हुए थे। उन्होंने कई बार सरकार को प्रार्थना पत्र भेजकर जमीन के बदले जमीन और मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। दावा-150 मकानों ने नहीं लिया मुआवजा रमेश कुमार के अनुसार, गांव में करीब 150 ऐसे मकान हैं जिन्होंने 2006 के अनुसार तय मुआवजा नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मिलीभगत कर पैसे लेकर होटल और रेस्टोरेंट बनवा रहे हैं, जबकि गरीबों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा। मौजूदा रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में जमीन के भाव करीब एक लाख रुपये प्रति गज तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में 2006 के हिसाब से 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देना पूरी तरह अन्याय है। उन्होंने मौजूदा बाजार दर के अनुसार मुआवजा देने की मांग की है।

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