बिहार के टॉप सरकारी अस्पताल पीएमसीएच, एनएमसीएच, एम्स, आईजीआईसी, आईजीआईएमएस के पास फायर सेप्टी का एनओसी(अनापत्ति प्रमाण पत्र) तक नहीं है। इन बड़े सरकारी अस्पतालों में आग लग जाए तो मरीजों और अस्पतालकर्मियों की जान को खतरा हो सकता है। भास्कर ने अस्पतालों में फायर सेफ्टी की पड़ताल की तो यह खुलासा हुआ। पता चला कि पटना जिले के 487 अस्पतालों में से 73 अस्पताल फायर सेफ्टी ऑडिट में फेल पाए गए। हालत यह है कि कुछ अस्पतालों में आग लगने पर बाहर निकलने के लिए रैंप, फायर लिफ्ट, बाहरी सीढ़ियां तक नहीं हैं। कहीं स्प्रिंकलर के वाल्व बंद हैं तो कहीं हाइड्रेंट पूरी तरह निष्क्रिय है। इमरजेंसी ब्लॉक में लगे स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम खराब हैं। फायर ब्रिगेड की तरफ से इन अस्पतालों को एनओसी तक नहीं दी गई है। यहां ऑक्सीजन सिलेंडर, पाइपलाइन,एनेस्थीसिया गैस, केमिकल, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भारी लोड है। आईजीआईसी के हेवी जेनरेट सेट के ठीक बगल में टी-स्टाल चल रहा है। पड़ताल में पता चला कि पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में फायर अलार्म तक बंद है। पीएमसीएच में कई आपातकालीन निकास द्वार भी बंद है। पीएमसीएच की पुरानी बिल्डिंग में अभी भी मरीजों का इलाज चालू है लेकिन आपातकालीन स्थिति में निकास और आग बुझाने की व्यवस्था नहीं है। भास्कर एक्सपर्ट – रमेश चंद्रा, पूर्व स्टेट फायर ऑफिसर, बिहार हर तीन या छह महीने पर फायर ड्रिल कराना जरूरी अस्पतालों में इस तरह की खामियां गंभीर मामला है। अग्निशमन विभाग को तत्काल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट और नोडल ऑफिसर के साथ मीटिंग करनी चाहिए। हर तीन महीने या छह महीने पर फायर ड्रिल कराना चाहिए क्योंकि बड़े अस्पतालों में जागरूकता जरूरी है। विभाग को फायर प्रिवेंशन विंग का गठन करना चाहिए जो ऐसी खामियों को दूर कर सके। आईजीआईएमएस में फायर अलार्म भी बंद 1. एनएमसीएच: मरीजों को सुरक्षित निकालने के लिए कोई रैंप नहीं। बाहरी सीढ़ियां, फायर लिफ्ट, सर्विस लिफ्ट की सुविधा नहीं। 2. आईजीआईसी: स्प्रिंकलर के वाल्व बंद। होज रील के नोजल गायब। डीजी सेट के पास ही टी-स्टाल। कई फायर हाइड्रेंट के पास पाइप और नोजल नहीं। फायर डक्ट खुले पड़े हैं, जो आग और धुएं को तेजी से फैलाने में सहायक। 3. एलएनजेपी: ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, होज रील, हाइड्रेंट पूरी तरह निष्क्रिय हैं। मुख्य इलेक्ट्रिक पंप और स्टैंडबाय डीजल पंप बंद। सीढ़ी बाधित। 4. पीएमसीएच: इमरजेंसी और राजेंद्र सर्जिकल वार्ड में अग्निशमन यंत्र, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम बंद। यहां वेट राइजर, हाइड्रेंट सिस्टम और पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं। कई जगह फायर एग्जिट रास्ते बंद। 5.आईजीआईएमएस: इमरजेंसी वार्ड ब्लॉक और कोर ब्लॉक में लगे स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम निष्क्रिय। कई ब्लॉकों में स्प्रिंकलर, वेट राइजर और होज रील सिस्टम नहीं। इमरजेंसी ब्लॉक में ओटोमेटिक िस्प्रंकलर सिस्टम और फायर एग्जीक्यूशन प्लना भी नहीं। 6. एम्स: फायर टावर, बाहरी निकास सीढ़ियां और कंपार्टमेंटलाइजेशन जैसी सुविधाएं नहीं। कई एग्जिट गेट बंद हैं और दरवाजे गलत दिशा में खुलते हैं। अग्निशमन पंप ऑटो मोड में नहीं हैं और हाइड्रेंट में पानी का प्रेशर मानक के अनुसार नहीं। कानून क्या कहता है नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) 2016 के अनुसार 15 या उससे ज्यादा बेड वाले हर अस्पताल को फायर सेफ्टी ऑडिट और सर्टिफिकेट अनिवार्य। नियमों के उल्लंघन पर पांच साल तक जेल और 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। क्या है मामला बिहार के टॉप सरकारी अस्पतालों में आग लगने पर उससे निपटने के साधन उपलब्ध नहीं हैं। कुछ अस्पतालों में फायर अलार्म और स्मॉग डिटेक्टर निष्क्रिय हैं। अस्तालों को हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट कराना आवश्यक है। इन अस्पतालों में फायर बिग्रेड ने ऑडिट के दौरान कई तरह की खामियां पाई हैं। इन अस्पतालों में हाल ही में हमने भी आडिट की है, जिसमें गंभीर कमियां पाई गई हैं। अस्पतालों को जांच रिपोर्ट और सुधार के निर्देश 1 महीने पहले भेजे जा चुके हैं। एनओसी तब मिलता है जब कमियों को पूरी तरह ठीक कर लिया जाए। प्रावधान के अनुसार हर अस्पताल में एक अग्नि सुरक्षा अधिकारी होना जरूरी है, लेकिन बिहार के ज्यादातर अस्पतालों में इसका पालन नहीं हो रहा। -आईजी सुनील नायक, होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाएं