देखिए… आवासीय नक्शा पास कराओ… और होटल बना लो। JE (जूनियर इंजीनियर) और अफसर आएंगे तो समझा देंगे। वे 50-60 हजार रुपए प्रति छत (एक मंजिल) के हिसाब से लेंगे। 3 छत डाली (3 मंजिला बिल्डिंग) तो डेढ़ लाख रुपए लगेंगे। छत ढलती जाए… पैसा देते जाओ… ऐसा ही होता है यहां…। ये कहना है दलाल यतीश अग्रवाल का। यतीश वृंदावन के आवासीय क्षेत्र में अवैध होटल बनाने का तरीका बता रहा। यतीश मथुरा-वृंदावन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MVDA) के अफसर और इंजीनियरों द्वारा रखा प्राइवेट बाबू भी है। वो नॉन-कॉमर्शियल एरिया में होटल निर्माण करने वालों की सेटिंग अफसरों से कराता है। वृंदावन की कुंज गलियों में रज भूमि की पवित्र सुगंध बसती है। यहां राधा रानी की कृपा और नंदबाबा के लल्ला कृष्ण की मधुर लीला हर हृदय को ब्रज भक्ति में डुबो देती है। यूपी सरकार अयोध्या के बाद अब वृंदावन में विश्वस्तरीय काम करा रही है। इसके लिए 30 हजार करोड़ रुपए की लागत से मथुरा, वृंदावन, ब्रज और आसपास के क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा। अयोध्या, काशी और उज्जैन के महाकाल लोक की तरह ही वृंदावन में भी बांके बिहारी कॉरिडोर भव्य रूप ले रहा। इन कामों का जिम्मा मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) को दिया गया है। लेकिन, MVDA के अफसर-इंजीनियर भ्रष्टाचार करने में इसे भी नहीं छोड़ रहे हैं। यहां की तंग सड़कें, यानी 9 मीटर से कम चौड़ी रोड पर होटल प्रतिबंधित है। फिर भी नए होटलों का निर्माण करा रहे। यहां के 12 से ज्यादा स्थानों पर करीब 200 अवैध होटल हैं। पिछले सालों में MVDA के अफसरों की भूमाफिया से साठगांठ भी उजागर हुई है। डालमिया बाग प्रोजेक्ट के नक्शे में गड़बड़ी इसका उदाहरण है। रिटायर बाबू वीरेंद्र कुमार अग्रवाल के आय से अधिक संपत्ति के केस ने भी ये उजागर किया कि श्रीकृष्ण के धाम में भी रिश्वतखोरी चल रही। यहां डेवलपमेंट के नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा? किन कामों में रिश्वतखोरी हो रही? ये किस पैटर्न पर काम कर रहा? अवैध होटलों के निर्माण से वृंदावन प्रोजेक्ट पर क्या असर पड़ेगा? इस सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने 15 दिन तक मथुरा-वृंदावन में इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… हमने देखा कि बांके बिहारी कॉरिडोर के आसपास प्रेम मंदिर के पीछे सुनरख वांगर रोड, छटीकरा में अक्षय पात्र के पास आश्रम रोड, गोवर्धन रोड पर अडिंग बाईपास के पास, परिक्रमा मार्ग, आश्रम भूमि क्षेत्र में नए होटल बन रहे। जबकि, इन जगहों पर होटल नहीं चलाए जा सकते। हमने पहले 3 स्थानों की जानकारी जुटाकर अवैध होटल निर्माण की बात करने के लिए रिश्वतखोरी करने वाले MVDA के अफसरों की जानकारी खंगाली। इनमें JE (जूनियर इंजीनियर) मनोज अग्रवाल का नाम सामने आया। हमने JE अग्रवाल को कॉल किया तो उन्होंने बातचीत के लिए दफ्तर बुलाया। हम उनके ऑफिस पहुंचे। हमने JE मनोज अग्रवाल से प्रेम मंदिर के पीछे का प्लॉट अवैध होटल बनाने के लिए खरीदने की बात कही। उन्होंने वहां की जानकारी लेने के बाद बताया कि होटल नहीं चला सकते, लेकिन आपमें हिम्मत हो तो चलाओ। रिस्क लेने की क्षमता हो तो चलाओ। हमने पूछा- वहां तो बहुत से अवैध होटल चल रहे, नए बन भी रहे? इस पर उनका कहना था- ठीक है, प्रेम मंदिर के पीछे आप भी ले लो…। आर्किटेक्ट को पकड़कर नक्शा बनवाओ… सभी NOC (नॉन आब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेकर आओ… फिर देखते हैं। इस बातचीत से यह साफ हो गया कि आवासीय का नक्शा पास कराकर होटल बनाया और चलाया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए कितनी रिश्वत ली जाती है? इस पर उन्होंने पहले दिन कुछ नहीं बोला। चूंकि हमारे पास जमीन के डॉक्यूमेंट नहीं थे। इसलिए हमने जमीन के पेपर जुटाए। जिससे JE अग्रवाल से दोबारा मुलाकात कर रिश्वतखोरी का नेक्सेस उजागर कर सकें। अपने प्राइवेट बाबू के साथ बैठा था JE अग्रवाल
हमने प्रेम मंदिर के पीछे सुनरख वांगर रोड पर ऐसी जमीन के पेपर अरेंज किए, जो JE मनोज अग्रवाल को दिखा सकें। सोर्स ने 2 दिन में पेपर अरेंज कर दिए। इसके बाद JE अग्रवाल को कॉल किया, तो उन्होंने शाम 6 बजे ऑफिस बुलाया। यहां JE के साथ दलाल यतीश अग्रवाल बैठा था। ये JE अग्रवाल का प्राइवेट बाबू है। इसी के जरिए वे अवैध होटल बनाने वालों से वसूली करते हैं। यतीश कई प्रोजेक्ट के नक्शे दिखाकर JE अग्रवाल को अपडेट दे रहा था। कुछ समय बाद JE ने हमसे बातचीत शुरू की। रिपोर्टर: जमीन के पेपर लाया हूं। एक बार आप देख लीजिए। JE मनोज अग्रवाल: यहां तो 6 मीटर से कम की सड़क है… यानी 20 फीट से कम रोड हो गई। इसमें कैसे कराओगे? रिपोर्टर: निर्मित (वह एरिया, जहां MVDA नए निर्माण की परमिशन दे रहा) क्षेत्र है। JE मनोज अग्रवाल: निर्मित क्षेत्र होगा तो नक्शा पास हो जाएगा… बाकी देखा जाएगा। रिपोर्टर: रजिस्ट्री के बाद MVDA की क्या प्रोसेस है? क्या करना होगा? JE मनोज अग्रवाल: पहले जमीन खरीदो तो सही… अभी लड़का हुआ नहीं… पहले ही एडमिशन की सोच रहे। रिपोर्टर: डर है कि जमीन खरीदने के बाद फंस न जाएं? JE मनोज अग्रवाल: मैं क्या बताऊं… मुझसे क्या चाहते हो? रिपोर्टर: अगर निर्मित क्षेत्र हुआ तो क्या खर्च आएगा? JE मनोज अग्रवाल: देखो… एक से डेढ़ लाख रुपए नक्शा पास कराने का खर्च आएगा। रिपोर्टर: वो तो सरकारी फीस है… उसका तो ठीक है… बाकी MVDA का क्या खर्च लगेगा? JE मनोज अग्रवाल: अब उसका क्या बताऊं… वो तो जब नक्शा आएगा… तभी बता पाऊंगा। इसके बाद JE अग्रवाल ने दलाल यतीश को इशारा किया। यतीश उठकर हमारे पास आया और खर्च बताने लगा। यतीश अग्रवाल: देखो… सर का कहना है नक्शा किसके पास जाएगा, क्या पता? इसलिए अभी खर्च कैसे बता दें? रिपोर्टर: एवरेज तो पता चल सकता कि कितना खर्च आएगा? यतीश अग्रवाल: एक से डेढ़ लाख रुपए सरकारी फीस जाएगी… और एक से सवा दो लाख रुपए तक एक्स्ट्रा खर्च लगेगा। रिपोर्टर: आवासीय में होटल चलाएंगे तो कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी? यतीश अग्रवाल: एक काम करो… आप मेरा नंबर ले लो… मैं आर्किटेक्ट हूं… आप मुझसे मिलना… मैं सब बता दूंगा… कैसे होगा? मैं सब समझा दूंगा। हम ऑफिस से बाहर निकल गए। करीब 10 मिनट बाद यतीश को कॉल लगाया। वे हमारे पास आ गए। अब उन्होंने अवैश होटल बनाने का पूरा सिस्टम समझाया और रेट बताए। यतीश अग्रवाल: देखो… सबसे पहले नक्शा बनवाकर पास कराने के लिए अप्लाई कर दो। रिपोर्टर: इसमें क्या खर्च आएगा? यतीश अग्रवाल: इसमें 7 से 8 हजार रुपए खर्च आएगा। आवासीय नक्शा पास हो जाएगा। बिल्ड-अप एरिया है वहां…? रिपोर्टर: जो जमीन दिला रहा है… उसने बताया कि वहां होटल पास नहीं हो पाएगा। यतीश अग्रवाल: ऐसा होता है… बिल्डअप एरिया में तरीका होता है… उससे पास हो जाएगा। कितनी चौड़ी रोड है? रिपोर्टर: 20 फीट (6.1 मीटर) से कम रोड है। यतीश अग्रवाल: फिर आवासीय में पास करा लो… आप। रिपोर्टर: फिर वहां होटल चलने देंगे? यतीश अग्रवाल: सब चलने देंगे… रुक्मिणी विहार में होटल चल रहे हैं… जबकि, वहां होटल नहीं चल सकता। रिपोर्टर: कुछ होगा तो नहीं चलाने में? यतीश अग्रवाल: देखो… जब गाज गिरेगी तो सब पर गिरेगी… समझ रहे, मेरी बात को…? रिपोर्टर: …तो इसके लिए कुछ व्यवस्था तो बनानी पड़ेगी? यतीश अग्रवाल: सब व्यवस्था बन जाती है… पैसा खर्च करेंगे तो सब हो जाता है। रिपोर्टर: कितना खर्च आएगा? यतीश अग्रवाल: नक्शा पास करने का मानो आप एक से डेढ़ लाख रुपए… और इतना ही इसके ऊपर से पड़ जाएंगे। रिपोर्टर: यह तो ठीक है… लेकिन जब होटल चलेगा तब भी कुछ करना पड़ेगा क्या…? यतीश अग्रवाल: कुछ नहीं… जब बनते समय आएगा JE तो उससे सेटिंग हो जाएगी… बस, उतना देना पड़ेगा। रिपोर्टर: फिर भी कितना? यतीश अग्रवाल: देखो… एक बार में पैसा नहीं देना है… मान लो, आपने वन टाइम दे दिया और किसी का (अफसर का) ट्रांसफर हो गया। यहां छत (फ्लोर) के हिसाब से पैसा देना पड़ता है… छत लगती जाएगी, उसके हिसाब से आप देते जाना…। रिपोर्टर: एक छत का कितना देना पड़ेगा? यतीश अग्रवाल: जिस दिन नक्शा पास होगा… उसी दिन से आपकी डेट शुरू हो जाएगी… और जब तक निर्माण चलेगा… देना रहेगा। इस बीच जो भी JE आएगा… उससे सब सेट हो जाएगा। रिपोर्टर: कैसे होगा फिर…? यतीश अग्रवाल: अरे… जो हमसे मिल लिया… वो मेरा कंसल्टेंट हो गया। उसका पूरा काम करा देते हैं हम…। रिपोर्टर: अब मेरा सारा काम आप ही करेंगे। यतीश अग्रवाल: करीब 50-60 हजार रुपए एक छत (फ्लोर) के हिसाब से लगेगा… यह जनरल रेट है… बाकी एरिया और जमीन के हिसाब से भी खर्च आता है… अगर 3 छत (3 मंजिला बिल्डिंग) डाली तो समझ लो डेढ़ लाख रुपए हो गए… ये एक बार में नहीं देना है… छत ढलती जाए… पैसे देते जाओ… ऐसे ही होता है यहां…। रिपोर्टर: बनने के बाद जब होटल चलेगा तो कार्रवाई तो नहीं होगी? यतीश अग्रवाल: देखो… शिकायत तो होती रहती है… लेकिन कुछ होगा नहीं… सब सेटिंग हो जाती है… यहां सब इलीगल ही चल रहे हैं… जो भी नक्शा पास कराता है, वो उससे अलग ही बनाता है… आप मुझे अपने रजिस्ट्री के पेपर और जमीन की GPS लोकेशन भेज देना, बाकी मैं सब करा दूंगा। VC बोले- शिकायत मिली तो करेंगे कार्रवाई MVDA के VC (उपाध्यक्ष) श्यामबहादुर सिंह का कहना है- अभी तक इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है और न ही ऐसी कोई शिकायत मिली। जब भी प्राधिकरण में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का मामला सामने आता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। अब जानिए, क्या है बांके बिहारी कॉरिडोर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक की तरह ही वृंदावन में बांके बिहारी कॉरिडोर बनाया जा रहा है। मंदिर के पास 5 एकड़ भक्तों के लिए विशाल वेटिंग रूम, पूजा सामग्री की दुकानें, पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसके निर्माण में 900 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अनुमान है कि जैसे कॉरिडोर निर्माण के बाद काशी व महाकाल में भक्तों की संख्या 5 गुना हुई है, वैसे ही यहां भी टूरिस्ट बढ़ेंगे। इसलिए, यहां अवैध रूप से होटल निर्माण शुरू हो गए हैं। ———————- ये खबर भी पढ़ें.. यूपी में बिजली विभाग में QR कोड से रिश्वत:ऑन कैमरा बाबू बोला– लोड बढ़ाने के 500, सोलर के लिए 1000 लगेंगे देखिए… एक फाइल (घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की परमिशन) का 1000 रुपया लगेगा। हां, कैश नहीं है तो ऑनलाइन (मोबाइल फोन पर QR code दिखाते हुए) कर दीजिए। अब तो सभी ऑनलाइन देते हैं… क्या बताएं? पैसा सबको जाता है। JE (जूनियर इंजीनियर), SDO से लेकर एक्सईएन तक…। यूपी के बिजली विभाग में QR कोड स्कैन कराकर रिश्वत ली जा रही है। अगर आपके घर में बिजली के मीटर का लोड 2 किलोवॉट से बढ़ाकर 3 किलोवॉट करना है, तो 500 रुपए की रिश्वत लगेगी। घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की परमिशन चाहिए, तो एक्सईएन के तय किए गए बाबू को 1000 रुपए की रिश्वत देनी होगी। पढ़ें पूरी खबर