हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर लिखी किताब ‘द विजनरी’ को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस किताब को स्कूल शिक्षा बोर्ड से जोड़ने और बोर्ड चेयरमैन डॉ. राजेश शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जवाहरलाल नेहरू केवल कांग्रेस के नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कहा कि नेहरू की नीतियां देश की धरोहर हैं और विपक्ष को उनके योगदान को समझना चाहिए। डॉ. शर्मा ने विपक्ष से अपील की कि वे बुधवार से शुरू हो रहे सत्र से पहले धर्मशाला स्थित बोर्ड कार्यालय आएं और किताब को पढ़ें व समझें। उन्होंने तर्क दिया कि नेहरू एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, और बच्चों को उनके विजन से परिचित कराने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। युवाओं में पढ़ने की की संस्कृति बढ़ाएगी किताब : डा. शर्मा चेयरमैन ने यह भी बताया कि 50 रुपए की यह किताब बोर्ड की आय बढ़ाएगी और युवाओं में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि किताब को नेहरू फाउंडेशन की अनुमति से प्रकाशित किया गया है। डॉ. शर्मा ने विपक्ष से ‘चिट्टा’ (नशीले पदार्थ) जैसी समस्याओं को खत्म करने के लिए इस पहल का समर्थन करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि यह किताब युवाओं को मोबाइल और नशे से दूर कर किताबों और विचारों की ओर आकर्षित करेगी। उन्होंने जोर दिया कि इसका उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देना है।