पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा की बहन का निधन:लंबे समय से बीमार थी, गुरुग्राम में किया गया अंतिम संस्कार; पति ज्वाइंट कमिश्नर रहे

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बहन बिमला देवी का मंगलवार को निधन हो गया। वे 78 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। वे अपने परिवार के साथ गुरुग्राम के सेक्टर-33 स्थित द विलाज सोसाइटी के विला नंबर 135 में रहती थीं। बिमला देवी के पति राजीव चौधरी हरियाणा सरकार में ज्वाइंट कमिश्नर (एक्साइज एंड टैक्सेशन) रह चुके हैं। निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद झाड़सा स्थित मुक्ति धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उनके आवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा और परिवार के अन्य सदस्य भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान भूपेंद्र हुड्‌डा ने कहा कि बिमला मेरे ताऊ की बेटी थी। बहन जी ने हमेशा मुझे और पूरे परिवार को स्नेह दिया। उनके जाने से जो जगह खाली हुई है, उसे कोई नहीं भर सकता। वहीं, दीपेंद्र हुड्‌डा ने कहा कि बुआ जी बड़ी ही धार्मिक और सात्विक महिला थीं। बचपन से ही मुझे उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ। विधि का विधान है, प्रभु उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। पांच माह पहले हुआ था भाभी का निधन
करीब पांच माह पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा की भाभी राजवती का 75 साल की उम्र में निधन हो गया था। राजवती भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के बड़े भाई इंदर सिंह हुड्‌डा की पत्नी थीं। इंदर सिंह एक जमींदार हैं, जो राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। वे केवल चुनाव के समय भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के साथ सक्रिय होते हैं। इंदर सिंह और राजवती के 2 लड़के और 2 लड़कियां हैं। 18 जून को चाची का हुआ था निधन
इससे पहले 18 जून को भूपेंद्र हुड्‌डा की चाची सुप्रभा देवी का निधन हुआ था। वह 103 साल की थीं। पूर्व CM के चाचा फतेह सिंह का कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं था। वह खेती करते थे। उन्होंने इसके लिए उत्तराखंड के बाजपुर में जमीन लेकर फार्महाउस बनाया था। हालांकि, वर्षों पहले उनका देहांत हो गया था। इसके बाद से उनके बेटे कुलवीर हुड्‌डा इसकी देखभाल कर रहे हैं। वहीं, भूपेंद्र हुड्‌डा की चाची भी अपने बेटे कुलवीर के पास ही रहती थीं। हालांकि, कुछ दिन पहले ही वह गुरुग्राम में रह रहे अपने पोते के यहां पहुंची थीं। यहीं पर उनका निधन हुआ था।

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