चंडीगढ़ में पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। अब शहर की सभी पेड पार्किंग का संचालन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पास होगा। नगर निगम ने ‘डिज़ाइन, बिल्ड और ऑपरेट’ मॉडल के तहत एनएचएआई को यह जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी पूरी कर ली है। कुछ दिनों में नगर निगम और एनएचएआई के बीच इस संबंध में एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। निगम द्वारा भेजा गया प्रस्ताव एनएचएआई पहले ही स्वीकार कर चुका है। एमओयू के बाद शहर में नई पार्किंग व्यवस्था लागू होगी, जिससे लोगों को एक समान और आसान पार्किंग सुविधा मिल सकेगी। नगर निगम ने जनता की राय लेने के बाद ‘वन सिटी–वन पास’ लागू करने का फैसला किया है। शहर की 90 से अधिक पेड पार्किंग के लिए अब एक ही पास मान्य होगा। कार के लिए मासिक पास 500 रुपए और दोपहिया के लिए 250 रुपए तय किए गए हैं। 89 में से केवल 73 पार्किंग पेड इस समय नगर निगम कुल 89 पेड पार्किंग स्थल संचालित करता है, जो लगभग 5.22 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले हैं और इनमें 16,030 कारों की क्षमता है। करोड़ों रुपए के पार्किंग घोटाले के बाद फरवरी 2024 में निगम ने यह व्यवस्था वापस ले ली थी। फिलहाल निगम खुद 73 पार्किंग संचालित कर रहा है, जबकि शेष पार्किंग मुफ्त चल रही हैं क्योंकि इन्हें चलाने के लिए निगम के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसके कारण निगम को लगातार राजस्व का नुकसान हो रहा है। NHAI मॉडल की तर्ज पर वार्षिक पार्किंग पास एनएचएआई पहले ही राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 3000 रुपए में 200 एंट्री वाले वार्षिक टोल पास जारी कर देशभर में चर्चा में रहा है। इसी मॉडल से प्रेरित होकर नगर निगम ने भी वार्षिक पार्किंग पास पर काम शुरू किया। जब निगम ने 6,000 रुपए वार्षिक पास का प्रस्ताव रखा तो यूटी प्रशासन के अधिकारियों ने इसे अधिक बताते हुए संशोधन सुझाया। इसके बाद एनएचएआई से बातचीत शुरू हुई और मॉडल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्मार्ट पार्किंग पर बाद में फैसला निगम अधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग पास खरीदते हैं तो पार्किंग रेट बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी कारण फिलहाल पार्किंग का रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) सदन में नहीं लाया जाएगा। आरएफपी में घंटे के हिसाब से रेट बढ़ाने का प्रस्ताव था, जबकि फिलहाल कार पार्किंग के लिए पूरे दिन 14 रुपए और दोपहिया के लिए सात रुपए लिए जाते हैं।