लेफ्टिनेंट कर्नल की पत्नी 15 साल बाद जीती कानूनी लड़ाई:चंडीगढ़ कोर्ट ने माना दबाव में नही बना वसीयतनामा, बेटों ने नहीं जताई आपत्ति

लेफ्टिनेंट कर्नल कोमल सिंह की मौत के बाद उनकी पत्नी को 15 साल कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उनके हक में चंडीगढ़ कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अदालत ने 82 साल की विधवा आईकबाल को उनके पति लेफ्टिनेंट कर्नल कोमल सिंह की वसीयत के अनुसार सेक्टर 47-सी, चंडीगढ़ में उनका घर हासिल करने की कानूनी अनुमति दे दी। जानिए पूरा मामला क्या था आईकबाल ने 28 अक्टूबर 2007 को अपने पति द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर अपना घर पाने के लिए अदालत में आवेदन किया था। उनके पति लेफ्टिनेंट कर्नल कोमल सिंह का निधन 4 फरवरी 2010 को हुआ था। अदालत में दिखाए गए कागजात और गवाहों के बयान से पता चला कि मृतक ने अपनी पत्नी को घर देने का फैसला पूरी आज़ादी और साफ़ दिमाग से किया था। वसीयतनामे के गवाह राम लाल धीमान ने अदालत में कहा कि वसीयतनामा किसी दबाव के बिना बनाया गया था। वसीयतनामे के अन्य गवाह नरेंद्र कुमार भाटिया का निधन हो चुका है, लेकिन उनके बेटे ने पिता के हस्ताक्षर की पहचान कराई। बेटों ने नहीं जताई आपत्ति लेफ्टिनेंट कर्नल कोमल सिंह के दो बेटे उदय प्रताप और विक्रम प्रताप सिंह ने भी अदालत में कहा कि उन्हें पत्नी के पक्ष में वसीयतनामा जारी करने में कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही, जनता के किसी सदस्य ने याचिका का विरोध नहीं किया। अदालत ने याचिका मंजूर करते हुए आईकबाल को वसीयत की कानूनी अनुमति देने का आदेश दिया। इस घर की कीमत लगभग 65.5 लाख रुपये है। अदालत ने कहा कि कानूनी अनुमति पाने के लिए जरूरी कोर्ट फीस जमा करनी होगी।

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