टीनएजर्स से सेक्सटॉर्शन:कोई 2 लाख देकर छूटी तो कोई हार बेचकर

आज बड़ी संख्या में ऐसे टीनएजर हैं, जो दिन में 6 से 8 घंटे ऑनलाइन रहते हैं। वे एक ऐसी दुनिया में जीने लगे हैं, जहां हर कोई अनजान है। ब्लैकमेलर्स इसी का फायदा उठाते हैं। अपराधी लड़कियों के प्रोफाइल से लड़कों और लड़कों के प्रोफाइल से लड़कियों से दोस्ती करते हैं। बात ऑनलाइन रोमांस तक पहुंचती है। फिर शुरू होती है ब्लैकमेलिंग। जब बच्चे कंगाल हो जाते हैं या मानसिक रूप से टूटने लगते हैं, तब परिवार को भनक लगती है। सरकारी साइबर क्राइम पोर्टल पर सेक्सटॉर्शन, बुलिंग और स्टॉकिंग के 2023 में 1070 केस तो 2024 में 1159 केस दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले 10 महीनों की बात करें तो 940 शिकायतें दर्ज हुई हैं। हकीकत इन आंकड़ों से ज्यादा भयावह है। बदनामी के डर से कई मामले पुलिस तक पहुंचते ही नहीं। एसपी स्टेट साइबर क्राइम दमनवीर सिंह ने कहा कि पोर्टल पर शिकायतें आती हैं तो सीधे संब​ंधित थाने के पास चली जाती हैं। पी​ड़ित से जानकारी जुटाकर टीमें ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करती हैं। इसे रोकने के लिए अवेयरनेस कैंप एजुकेशन कैंपस में लगाए जा रहे हैं। बच्चों को स्मार्टफोन के साथ ‘डिजिटल संस्कार’ देने होंगे टीनएजर्स को रिश्तों में फंसाना सबसे आसान है। इससे बचाने के लिए पैरेंट्स को खुद ही अपने बच्चों को ‘डिजिटल संस्कार’ देने होंगे। इंटरनेट की दुनिया में उन्हें सुरक्षित रखने के लिए पैरेंट्स को ये कदम उठाने बेहद जरूरी हो गए हैं… 1. अकाउंट्स को ‘प्राइवेट’ करा दें… -सबसे पहले टीनएजर्स के सोशल मीडिया अकाउंट को ‘पब्लिक’ से ‘प्राइवेट’ करें। फ्रेंड लिस्ट में सिर्फ उन्हीं को रखें, जिन्हें वे असल जिंदगी में जानते हैं। अनजान ‘रिक्वेस्ट’ को स्वीकार नहीं करना है। 2. ‘अनफ्रेंड’ करने की हिम्मत… -बच्चों को समझाएं कि अगर ऑनलाइन दोस्त अजीब बातें करे या पर्सनल जानकारी मांगे, तो तुरंत ‘अनफ्रेंड’ कर दें। अपराधी डर का फायदा उठाते हैं। उन्हें बताएं कि अगर गलती हो भी जाए, तो घबराएं नहीं, आप उनके साथ हैं। 3. वीडियो की धमकी सिर्फ छलावा… -ब्लैकमेलर अक्सर धमकी देते हैं- ‘वीडियो यूट्यूब पर डाल दूंगा।’ यह कोरा झूठ है। यूट्यूब या फेसबुक का एआई सिस्टम न्यूडिटी को तुरंत डिटेक्ट कर ब्लॉक कर देता है। वीडियो वायरल नहीं होगा। 4. संवाद ही सबसे बड़ा एंटीवायरस… -घर में सेक्सटॉर्शन और डेटिंग ऐप्स के खतरों पर खुलकर बात करें। बच्चे को विश्वास दिलाएं कि कोई भी मुसीबत आने पर पहली कॉल पुलिस को नहीं, पापा या मम्मी को करनी है। डांट का डर ही बच्चे को अपराधी का गुलाम बनाता है। 5. सबूत न मिटाएं… -डर के मारे चैट डिलीट न करें। स्क्रीनशॉट, ट्रांजेक्शन आईडी और प्रोफाइल का लिंक पुलिस के लिए सबसे बड़ा सबूत है। www.cybercrime.gov.in पर घर बैठे शिकायत दर्ज करें। केस-1… वीडियो रिकॉर्ड कीं, 2 लाख रु. देने के बाद आत्महत्या करने जा रही थी केस-2… दादी का हार चोरी कर गिरवी रखा, फिर भी ब्लैकमेलर का पेट नहीं भरा 17 साल का हूं। पढ़ाई में ठीक-ठाक हूं। बर्बादी की शुरुआत दोस्तों के साथ हुई, जब एक दोस्त ने कहा, ‘मैसेजिंग एप पर बात करने का मजा ही अलग है।’ मैंने लिंक पर क्लिक किया और एक अनजान दुनिया में कदम रख दिया। वहां मेरी बात एक लड़की से शुरू हुई। उसने कहा कि वो दिल्ली में अकेली रहती है। 15 दिन तक बात हुई। उसने मेरे जिम जाने और ‘सिक्स पैक्स’ की झूठी तारीफों के पुल बांध दिए। एक रात वीडियो कॉल पर हम थोड़े ज्यादा क्लोज हो गए। अगली सुबह मेरी न्यूड वीडियो मेरे इनबॉक्स में थी। मांग थी- 30 हजार। डर था कि पापा को पता चला तो बहुत मारेंगे। मैंने दादी का सोने का हार चुराया और उसे लेकर सुनार के पास पहुंचा। हार गिरवी रखकर जो 40 हजार मिले, वो मैंने ब्लैकमेलर के दिए खाते में डाल दिए। ब्लैकमेलर ने एक लाख और मांग लिए। घर में हार गायब होने पर बवाल मच गया, शक नौकरानी पर गया। आखिर में पापा ने मुझे पकड़ लिया। मुझे लगा अब पिटाई होगी, लेकिन सच जानने के बाद पापा ने मुझे गले लगा लिया। पुलिस में पता चला कि वो लड़की नहीं, विशाखापटनम का कोई गिरोह था। आरोपियों ने अपने खाते से 3 रुपए छोड़कर सब निकाल लिए। पहली धमकी पर ही पापा को बता दिया होता, तो मुझे घर में चोरी नहीं करनी पड़ती। मैं 16 साल की हूं। 9 साल की थी, जब मम्मी-पापा चल बसे। मौसी ने पाला। लेकिन, खालीपन हमेशा रहा। शायद इसी अकेलेपन ने मुझे वर्चुअल दुनिया में धकेल दिया। सोशल मीडिया पर हर बात शेयर करना मेरी आदत बन गई थी। तभी एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। स्मार्ट लड़का, अमेरिका में पढ़ाई और लग्जरी गाड़ियां। मैंने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। 21 दिनों में हम अजनबी से ‘क्लोज फ्रेंड’ बन गए। वह वीडियो कॉल पर हमेशा अपने कमरे में ही दिखता था। उसने ऐसा भरोसा जीता कि मैंने पर्सनल नंबर दे दिया। एक रात वीडियो कॉल पर उसने कहा, ‘हम दोस्त हैं, एक-दूसरे से क्या छिपाना?’ मैं भावनाओं में बह गई और कैमरे के सामने वो गलती कर बैठी, जो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। अगली सुबह जब सोकर उठी, तो फोन पर मेरी न्यूड तस्वीरों का स्क्रीनशॉट था। वह दोस्त नहीं, ब्लैकमेलर था। उसने धमकाया- ‘5 लाख दो, वरना पूरी दुनिया देखेगी।’ मेरे अकाउंट में 2 लाख 13 हजार रुपए थे। उसने चार स्कैनर भेजे, मैंने 50-50 हजार करके सारे पैसे डाल दिए। फिर एक घंटे बाद 3 लाख और मांगे। मुझे लगा अब आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता है। मैं स्कूटी लेकर भाग रही थी कि पुलिस ने रोका। लेडी कांस्टेबल ने मुझे रोता हुआ देखा। मैंने उसे सच बता दिया। साइबर सेल ने बताया कि वो अमेरिका नहीं, रांची का था। भास्कर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम एक्सपर्ट

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