तरनतारन उपचुनाव में अकाली उम्मीदवार रहीं प्रिंसिपल सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी कंचनप्रीत कौर की गिरफ्तारी में पंजाब पुलिस को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कंचनप्रीत की कस्टडी पुलिस से हटाकर जज को दे दी है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिए कि जब तक कंचनप्रीत के वकील नहीं पहुंचते, उसे रिमांड के लिए कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा- जो व्यक्ति खुद जांच में शामिल हुआ, उसे गिरफ्तार कैसे किया गया। कोर्ट जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है। इसके बाद पुलिस ने कंचनप्रीत को तरनतारन कोर्ट में ले गई। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि जब तक कंचनप्रीत की पैरवी के लिए उनके वकील अर्शदीप कलेर और दमनप्रीत सोबती तरनतारन नहीं पहुंचते, तब तक सुनवाई न हो। इसके बाद अब इस मामले पर तरनतारन की कोर्ट में रात 8 बजे सुनवाई होगी। कंचनप्रीत पर पंजाब पुलिस ने 4 केस दर्ज किए हैं। वल्टोहा बोले- नए मामले में 7 दिन पहले सूचना का आदेश था
पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा कि मौजूदा सरकार ने कंचनप्रीत को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया है। उनका आरोप है कि पंजाब की परंपरा में विरोधियों की बहू-बेटियों का सम्मान होता है, लेकिन AAP सरकार ने विरोधियों की बहू-बेटियों को भी नहीं छोड़ा। राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत केस दर्ज किए जा रहे हैं ताकि किसी युवा नेता को आगे बढ़ने से रोका जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने कंचनप्रीत को गिरफ्तारी से राहत दी और निर्देश दिया कि किसी नए मामले में 7 दिन पहले सूचना दी जाए। पहले गिरफ्तारी न करने पर एसएसपी सस्पेंड किया
वल्टोहा ने आरोप लगाया कि कंचनप्रीत को गिरफ्तार न करने पर एक ईमानदार एसएसपी को सस्पेंड कर दिया गया, जो युवा अधिकारियों के साथ नाइंसाफी है। वहीं, कंचनप्रीत ने मीडिया से बातचीत करने से इनकार किया और केवल यह कहा कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है। वल्टोहा ने दावा किया कि कंचनप्रीत की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि अधिकारी भी कह रहे हैं कि 2027 में वह विधायक बन सकती हैं। अकाली नेता के आरोपों की 3 बड़ी बातें…