दलितों को बीमार बताकर राज्यमंत्री के ट्रस्ट ने खरीदी जमीनें:यूपी के मेरठ में 19 बीघा का सौदा, दलित बोले- हमारा मेडिकल फर्जी

‘हमने मंत्री (ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर) को जमीन बेची। उनके लोगों ने हमारी डॉक्टरी (मेडिकल चेकअप) करा दी… प्यारेलाल हॉस्पिटल में। वे धोखे से ले गए। हमने पूछा- डॉक्टरी किस बात की? फिर भी जबरदस्ती बीमार बता दिया। उसके गुर्गे हैं… छोटू को जानते होंगे… एक जॉनी है… वही आए थे…।’ यूपी के मेरठ से 15 किमी दूर कायस्थ गावड़ी गांव के दलित ये बात कह रहे। ये गांव मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में आता है। 13 सितंबर, 2024 को यहां के 10 दलित परिवारों के 46 लोगों को असाध्य रोग से पीड़ित या विस्थापित बताकर उनकी 19.09 बीघा (47,732 वर्गमीटर) जमीनों की 10.55 करोड़ रुपए में खरीद-फरोख्त हुई। ये जमीन शांति निकेतन ट्रस्ट ने खरीदी। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष यहां के स्थानीय विधायक और ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर हैं। ट्रस्ट की स्थापना 2008 में हुई थी। इसका उद्देश्य शिक्षा, साक्षरता और खेल है। डॉ. तोमर के ट्रस्ट ने जहां जमीनें खरीदीं, एक साल बाद यानी 4 अगस्त, 2025 को इस जमीन से थोड़ी ही दूर पर मेरठ विकास प्राधिकरण का टाउनशिप डेवलपमेंट प्रोजेक्ट आ गया। इससे इन जमीनों की कीमत 4 गुना हो गई। इस खरीदी के पीछे का खेल क्या है? क्या दलितों को फर्जी तरीके से बीमार और विस्थापित बताकर उनसे जमीनें ले ली गईं? इसमें राज्यमंत्री डॉ. तोमर की भूमिका क्या है? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम मेरठ पहुंची। यहां 10 दिन इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… सबसे पहले जानिए, यूपी में दलितों की जमीन बेचने के नियम क्या हैं? यूपी रेवेन्यू कोड- 2006 के नियमानुसार कोई भी दलित (SC) व्यक्ति DM की परमिशन के बगैर गैर-दलित को जमीन नहीं बेच सकता। DM को परमिशन देने का अधिकार है, लेकिन इनमें से कोई एक कारण होने पर.. 1. यदि दलित असाध्य बीमारी (Fatal Disease) से पीड़ित है और इलाज के लिए पैसा चाहिए। 2. यदि दलित विस्थापित हो गया है और दूसरे स्थान पर जमीन लेना चाहता है। इन 2 कारणों में शर्तें तय हैं, जैसे- DM पहले जांच कराएंगे। इसके बाद जरूरी लगे, तो जमीन बेचने की परमिशन दी जा सकती है। अब पढ़िए, हमारा इन्वेस्टिगेशन… कायस्थ गावड़ी गांव में 10 परिवारों ने बैनामा (अपनी जमीन बेचकर रजिस्ट्री करा दी और रुपए ले लिए) किया है। क्या राज्यमंत्री डॉ. तोमर के ट्रस्ट ने ही इन परिवारों से जमीन खरीदी? यह पता लगाने के लिए हम कायस्थ गावड़ी गांव पहुंचे। हमने सबसे पहले सुखबीर से बात की। सुखबीर ने अपनी जमीन ट्रस्ट को बेची है। रिपोर्टर: आपने अपनी जमीन MDA (मेरठ विकास प्राधिकरण) और राज्यमंत्री डॉ. तोमर को बेची है, किससे-कितना पैसा मिला? सुखबीर: MDA से 5 बीघा जमीन के 2.64 करोड़ रुपए मिले। सोमेंद्र तोमर को 750 वर्गमीटर (0.30 बीघा) बेची। हमें 39.50 लाख रुपए प्रति बीघा का रेट मिला। रिपोर्टर: इतने कम रेट में ट्रस्ट को क्यों दे दिया? सुखबीर: सबने सोमेंद्र तोमर को इसी रेट में दी तो हमने भी दे दी। इसमें ऐसा है, उन लोगों ने हमारी डॉक्टरी (मेडिकल चेकअप) भी करा दी… प्यारेलाल हॉस्पिटल में। जब हम जमीन बेच रहे हैं तो हमारी डॉक्टरी क्यों करा रहे हो? रिपोर्टर: …तो किस बात की डॉक्टरी कराई आपकी? सुखबीर: यही तो हम भी कह रहे… किस बात की डॉक्टरी कराई है… हम लोगों की? हमें तो डॉक्टर के पास ले गए… अस्पताल में… बुलाकर। हमने पूछा- भाई, हमें क्यों लाए? क्या मतलब है हमारा इससे? हम तुम्हें जमीन दे रहे हैं… हमारी डॉक्टरी किस बात की करा रहे हो? फिर भी जबरदस्ती करा दी। फिर मुझे बीमार बता दिया। रिपोर्टर: क्या गाड़ी आई थी, आपको ले जाने के लिए? सुखबीर: हां, हमें गाड़ी ले जाने आई थी, जो उसके (राज्यमंत्री डॉ. तोमर) गुर्गे हैं… छोटू को जानते होंगे… एक जॉनी है… वही सब आए थे… ले जाने के लिए। रिपोर्टर: आप DM या किसी अधिकारी के सामने जमीन बेचने को लेकर पेश हुए थे या नहीं? सुखबीर: नहीं साहब, हम कहीं पेश नहीं हुए। हमसे कोई बात किसी अधिकारी ने नहीं की। न डीएम, न एसडीएम से हमारी कोई बात हुई। रिपोर्टर: मंत्री ने कितनी जमीन गांव के लोगों की ली है? सुखबीर: अब आप हिसाब लगा लो… कम से कम 40 बीघा जमीन ली है। रिपोर्टर: आप लोगों ने इतने कम रेट में जमीन क्यों दे दी? सुखबीर: सबने ऐसे ही दी है। किसी की 27 लाख में ले ली, किसी की 28 लाख में ले ली। हमारी तो फिर भी 33 लाख में गई है। एक और है, उनकी 39 लाख में ली है। रिपोर्टर: ऐसा क्यों और वे जमीन का करेंगे क्या? सुखबीर: हम लोगों को बताया कि स्कूल बनाएंगे और बच्चों का मैदान बनाएंगे। रिपोर्टर: जब राज्यमंत्री जमीन ले रहे थे तो मेरठ विकास प्राधिकरण वाली योजना आ गई थी या नहीं? सुखबीर: नहीं, यह योजना बाद में (एक साल बाद) आई है। रिपोर्टर: …तो आप लोगों को पता नहीं होगा कि योजना आने वाली है? सुखबीर: नहीं हम लोगों को पता नहीं था। हम लोगों की जहां राज्यमंत्री ने जमीन खरीदी है… वह जगह योजना में शामिल नहीं है। इन्वेस्टिगेशन में ये निकला : गलत तरीके से NOC बनाई सुखबीर सहित परिवार के 3 लोगों ने राज्यमंत्री डॉ. तोमर के ट्रस्ट को जमीन बेची। जमीन बेचने के लिए सुखबीर की तरफ से जो NOC दी, वो गलत तरीके से बनाई है। इसमें सुखबीर, विक्रम और भीष्म को बीमार बताया। सुखबीर का कहना है- उन्होंने अपनी स्वेच्छा से जमीन बेची, बीमारी का इलाज कराने के लिए नहीं। गांव की दूसरी गली में हमारी मुलाकात रमेश सिंह से हुई। रमेश अपने घर के सामने बैठे थे। कागजों में इन्हें गांव छोड़कर जाना बताया, इसी के आधार पर इनकी जमीन बिकी है। रिपोर्टर: आपने किसको जमीन बेची है? रमेश: हमने अपनी जमीन राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर को बेची। रिपोर्टर: कितनी जमीन बेची है? रमेश: हम 5 भाइयों ने मिलकर सवा 4 बीघा जमीन बेची। रिपोर्टर: क्या आपने जमीन बेचने के लिए NOC ली? अधिकारी जांच करने आए? रमेश: नहीं जी, कोई जांच वगैरह नहीं हुई। रिपोर्टर: …लेकिन कागजों में लिखा है कि आप बाहर रहते है।, जमीन की देखभाल नहीं कर पा रहे, इसलिए बेच रहे? रमेश: नहीं जी, हम लोग यहीं रहते हैं… पहले से यहीं रहते हैं। रिपोर्टर: आपने जो NOC ली, क्या वह आपने देखी है? रमेश: नहीं, हमने कोई NOC नहीं देखी। बस हमसे बात हुई और जमीन बिक गई। रिपोर्टर: जिस दिन बैनामा हुआ, उस दिन मंत्री आए थे या नहीं? रमेश: हां, जिस दिन बैनामा हुआ… उस दिन राज्यमंत्री महोदय आए थे। उस दिन भी राज्यमंत्री जी से हम लोगों की बात नहीं हुई। रिपोर्टर: …तो जो NOC बनी, उसके बारे में आपको जानकारी नहीं? रमेश: नहीं, हमें कोई जानकारी नहीं। रिपोर्टर: …तो आप लोग गांव छोड़कर नहीं जा रहे हैं। रमेश: नहीं, हम लोग यहीं हैं… गांव छोड़कर नहीं जा रहे। हमारे भाई भी यहीं गांव में रहते हैं… हमें कहीं नहीं जाना। सब बच्चे पढ़-लिख रहे हैं यहीं। रिपोर्टर: आपके परिवार में कौन-कौन हैं? रमेश: परिवार में… मैं और मेरी घरवाली है। 2 बेटियों की शादी कर दी है। 1 लड़का और 1 लड़की और है। रिपोर्टर: क्या आपको लगता है कि पैसे कम मिले या ज्यादा मिले? रमेश: नहीं, हम पर कोई दबाव राज्यमंत्री की तरफ से नहीं बनाया। बीच का आदमी था सौदे में… हमने 40 लाख मांगे, उसने 39 लाख का रेट लगाया। इन्वेस्टिगेशन में ये निकला : दलितों को NOC दिखाई तक नहीं NOC में रमेश और उसके भाइयों ने जमीन बेचने का कारण देखभाल नहीं कर पाना बताया, लेकिन हकीकत में उन्होंने NOC देखी तक नहीं। वे और उनके भाई गांव छोड़कर नहीं गए। इसलिए जमीन की देखभाल नहीं करने का सवाल ही खड़ा नहीं होता। इसके बाद हमारी मुलाकात वीर सिंह से हुई। रिपोर्टर: आपने अपनी जमीन कब और किसको बेची? वीर सिंह: हमने सोमेंद्र तोमर मंत्री को बेची है। रिपोर्टर: कितनी जमीन बेची है? वीर सिंह: एक बीघा 50 गज। रिपोर्टर: कितने में बेची है? वीर सिंह: जिसने जमीन का सौदा किया… उससे 28 लाख रुपए तय किए थे… एक बीघा के। रिपोर्टर: …तो पूरे पैसे मिल गए? वीर सिंह: नहीं, 27 लाख मिले। 1 लाख कम दिए। रिपोर्टर: आप जमीन नहीं बेच सकते… क्या आपने परमिशन ली थी? वीर सिंह: परमिशन तो मंत्री साहब ने ले रखी है… कम से कम 25-26 आदमियों के बैनामे हुए। रिपोर्टर: आपको जमीन क्यों बेचनी पड़ी? वीर सिंह: (रोते हुए) हमें मजबूरी में जमीन बेचनी पड़ी। मेरी बीमारी थी। पैर गल गया था। रिपोर्टर: क्या मेडिकल बना था… बीमारी के संबंध में…? वीर सिंह: नहीं, मेरा कोई मेडिकल नहीं बना। रिपोर्टर: जब जमीन बेची तो किसी सरकारी अफसर से मिले आप? वीर सिंह: नहीं, हम किसी से नहीं मिले। रिपोर्टर: फिर जमीन कैसे बेची? वीर सिंह: एक लड़का है… जॉनी, उसके माध्यम से जमीन का सौदा हुआ। वह राज्यमंत्री के साथ रहता है। उसने गरीबों के काफी पैसे खाए। तकरीबन 50–60 लाख रुपए खा गया। रिपोर्टर: आपको बीमारी के लिए जमीन बेचनी पड़ी है क्या? वीर सिंह: हां, बीमारी के चलते 7 साल में 7 लाख रुपए लगे। हमने वीर सिंह के बेटे विपिन से बात की, जो बिल्कुल स्वस्थ दिख रहा था, उसने जो बताया वह चौंकाने वाला था… रिपोर्टर: तुम्हारे पिता जी को क्या बीमारी है? विपिन: बीमारी कुछ नहीं है। कुछ दिन पहले शुगर हुई। पहले एक्सीडेंट हुआ तो इलाज करा दिया। अभी पैसों की शार्टेज चल रही… इसलिए जमीन बेच दी। रिपोर्टर: कोई गंभीर बीमारी नहीं है किसी को? विपिन: नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। न ही हमारे पास कुछ डॉक्यूमेंट है। रिपोर्टर: तुम्हारे पिताजी का कब इलाज हुआ था? अभी हो रहा है या नहीं? विपिन: बहुत पहले इलाज हुआ था। अब तो इलाज नहीं चल रहा है। 7 साल से इलाज बंद है। कोई दवा वगैरह भी नहीं चल रही है। रिपोर्टर: परिवार में और कौन-कौन है? विपिन: परिवार में मेरे 2 बड़े भाई हैं। रिपोर्टर: सबकी मर्जी से बेची है जमीन क्या? विपिन: नहीं, सबकी मर्जी से जमीन नहीं बेची। यह जमीन पिताजी के नाम से थी तो उन्होंने अपनी मर्जी से बेची। हमें तो बाद में पता चला है। इन्वेस्टिगेशन में ये निकला : अब परिवार में कोई बीमार नहीं वीर सिंह ने अपनी जिस बीमारी का जिक्र NOC में किया। उस बीमारी की दवा 7 साल पहले ही बंद हो चुकी है, जबकि उनके बेटे विपिन सिंह भी अब बीमार नहीं हैं। इसके बाद हमारी मुलाकात धर्मेंद्र से हुई। रिपोर्टर: आपने जमीन बेची है? धर्मेंद्र: मेरे कूल्हे का ऑपरेशन हुआ है, इसलिए जमीन बेचनी पड़ी। चल नहीं पा रहा था। टांग कटने की नौबत आ गई थी। रिपोर्टर: किसको जमीन बेची? धर्मेंद्र: सोमेंद्र तोमर को जमीन बेची है। रिपोर्टर: आप लोगों की जमीन बेचने में तो बहुत अधिकारियों के चक्कर वगैरह लगाने पड़ते हैं? धर्मेंद्र: हां, सब कुछ उन्होंने (मंत्री के लोगों ने) ही करवाया है… परमिशन वगैरह। हमें कुछ नहीं पता। रिपोर्टर: कोई पूछने भी नहीं आया? धर्मेंद्र: नहीं, कोई पूछने नहीं आया। बीच में जो नवीन था। उसी ने सब काम कराया है। रिपोर्टर: कब हुआ ऑपरेशन? धर्मेंद्र: 14 सितंबर 2024 को हमारा बैनामा हुआ है। फिर बाद में हम दोबारा गिर पड़े। उससे पहले जुलाई में ऑपरेशन हुआ है। बैनामे से पहले ही ऑपरेशन हो चुका था। रिपोर्टर: अधिकारियों से आपने जो जमीन बेचने की परमिशन ली है, उसमें क्या कारण बताया? धर्मेंद्र: हमें तो कुछ नहीं पता… वह सब तो उन्होंने (मंत्री के लोगों ने) कराया। रिपोर्टर: कितनी जमीन है आपकी? धर्मेंद्र: सवा चार बीघा से कुछ कम है। इसमें चार भाई हैं। रिपोर्टर: कितने रुपए में जमीन बेची है? धर्मेंद्र: जो बीच में दलाल था। उसने हमें 39 लाख रुपए बीघा के पैसे दिए हैं। रिपोर्टर: टोटल कितना पैसा मिला? धर्मेंद्र: 1 करोड़ 63 लाख 883 रुपए। इन्वेस्टिगेशन में ये निकला : असाध्य रोग के बगैर ही परमिशन मिल गई जमीन बेचने से पहले ही धर्मेंद्र के कूल्हे का ऑपरेशन हो चुका था। नियम के मुताबिक दलित अपनी जमीन तभी बेच सकता है, जब वह किसी असाध्य रोग से पीड़ित हो। कूल्हे का ऑपरेशन असाध्य रोग में नहीं आता, क्योंकि ये जानलेवा बीमारी नहीं। अब जानिए, अफसरों ने कैसे नियमों का पालन नहीं किया अब जानिए, राज्यमंत्री के ट्रस्ट के बारे में… शांति निकेतन ट्रस्ट 1 मई, 2008 को मेरठ में रजिस्टर्ड हुआ। इसका पता- E-18, शास्त्री नगर, मेरठ है। ट्रस्ट का उद्देश्य शिक्षा, साक्षरता और खेल है। ये ट्रस्ट शांति निकेतन विद्यापीठ स्कूल, शांति निकेतन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, शांति निकेतन कॉलेज ऑफ फार्मेसी और शांति निकेतन इंस्टीट्यूट फॉर टीचर एजुकेशन कॉलेज संचालित करता है। अब पढ़िए, अफसरों की सफाई… ADM बोले- मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मैटर नहीं
मेरठ के तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) बलराम सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं हैं, न ही उन्हें इसकी जानकारी है। ऐसा कोई मैटर नहीं आया था। DM बोले- मैं कुछ नहीं कहना चाहता
मेरठ के DM डॉ. वीके सिंह का कहना है कि वो इस मामले पर कुछ नहीं कहना चाहते। मेरी संस्था वहां पहले से है, टाउनशिप 500 मीटर दूर है
जब हमने राज्यमंत्री एवं शांति निकेतन ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. सोमेंद्र तोमर को कॉल किया। उन्होंने कहा- इस मामले में एक-एक चीज पर बोलने और एक-एक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं। जब लखनऊ आऊंगा, तब विद प्रूफ सारी जानकारी दूंगा। इसके बाद हमने उनका 10 दिन इंतजार किया। उन्हें कॉल किए और मैसेज भी किए, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए। राज्यमंत्री को हमने ये सवाल भेजे – ————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में मंत्री-विधायक के रिश्तेदारों को बांटी नौकरियां, इनमें 55% ठाकुर, जांच करने आए अफसर के भतीजे की भी नौकरी लगी पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी और पूर्व सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा… आप सोच रहे होंगे कि आखिर यूपी की सत्ता से जुड़े ये दो नाम क्यों लिए हैं? तो हम आपको बता दें कि यह सिर्फ दो नाम नहीं हैं, बल्कि इन जैसे सत्ता से जुड़े 10 ताकतवर लोगों के नाम निकलकर सामने आए हैं, जिनके बेटे-बेटियों को लखीमपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में नियुक्तियां दीं। पढ़ें पूरी खबर

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