पंजाब में तरनतारन उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल की उम्मीदवार रहीं सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी कंचनप्रीत को आज तड़के रिहा कर दिया गया। तरनतारन कोर्ट में रात 8 बजे सुनवाई शुरू हुई थी। इसके बाद सुबह 4 बजे कोर्ट ने फैसला सुनाया। रिहा होने के बाद कंचनप्रीत ने कहा कि मेरे साथ खड़े रहने के लिए अकाली दल के नेताओं-वर्करों का धन्यवाद। कचनप्रीत पर उपचुनाव के दौरान पुलिस ने करीब 4 केस दर्ज किए थे। इनके खिलाफ कंचनप्रीत ने स्थानीय अदालत में याचिका दाखिल की थी। शुक्रवार (28 नवंबर) को कंचनप्रीत जब जांच में शामिल होने के लिए मजीठा थाने पहुंची तो छह घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने विदेश में रह रहे उनके पति अमृतपाल के खिलाफ चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने के आरोप में दर्ज मामले में नामजद कर गिरफ्तारी दिखाई। इसके बाद अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। शनिवार (29 नवंबर) को हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब कोई व्यक्ति खुद जांच में शामिल हो रहा हो, तो उसे अचानक गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है। कंचनप्रीत की कस्टडी जज को सौंपी थी
अदालत ने इस कार्रवाई को पारदर्शिता के खिलाफ बताया और तुरंत कंचनप्रीत की कस्टडी पुलिस से लेकर जज को सौंप दी। साथ ही तरनतारन कोर्ट को आदेश दिया कि वह रात को ही इस मामले की सुनवाई करे कि उन्हें रिमांड पर दिया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि जब तक उनके वकील अदालत में नहीं पहुंचते, तब तक उन्हें रिमांड के लिए पेश न किया जाए। इसके बाद पुलिस कंचनप्रीत को तरनतारन कोर्ट लेकर पहुंची। रात 8 बजे कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। सुबह 4 बजे कोर्ट ने फैसला सुनाया
रात 10 बजे बहस और तेज हो गई, जिसमें बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया, जबकि पुलिस ने अपने कदम को सही ठहराने का प्रयास किया। सुनवाई के दौरान अकाली दल के वर्कर अदालत के बाहर खड़े रहे। सुबह 4 बजे अदालत ने कंचनप्रीत कौर को रिहा करने का आदेश दिया। अकाली नेता के आरोपों की 3 बड़ी बातें…