स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के आदेश लागू नहीं होने पर हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। इसके लिए प्रदेश के गृह विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। सुशील वर्मा ने आयोग को भिवानी और फतेहाबाद के मामले के संबंध में शिकायत भेजी थी। वर्मा ने अपनी शिकायत में कहा था कि हरियाणा गृह विभाग द्वारा अथॉरिटी के आदेशों को लागू नहीं किया गया है, जबकि ये मामले पुलिस अत्याचार और हिरासत में यातना से जुड़े हैं। सजा की जगह दे दी गई पदोन्नति शिकायत में बताया गया कि स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी ने स्पष्ट रूप से आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन हरियाण के गृह विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अथॉरिटी की एक वर्ष लंबी जांच में दोषी पाए गए भिवानी पुलिस के एएसआई दशरथ को निलंबित करने के बजाय पदोन्नत कर एसआई बनाया गया। उसे उसी चौकी का इंचार्ज भी नियुक्त कर दिया गया, जहां उनके द्वारा यातना के आरोप का मामला सामने आया था। उनके अनुसार, जून 2023 में भिवानी जिले के गांव बामला के 19 वर्षीय युवक को एएसआई दशरथ व अन्य चार पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह प्रताड़ित किया था। आरोप है कि उसके निजी अंगों में पेट्रोल तक डाला गया। पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी ने 24 सितंबर 2024 को जांच पूरी कर आरोप सही पाए और निर्देश दिए थे कि एएसआई दशरथ व अन्य आरोपियों का तुरंत निलंबन कर एफआईआर दर्ज कर उन पर कार्रवाई की जाए। मगर, गृह विभाग ने इन आदेशों को लागू नहीं किया। उल्टा मुख्य आरोपी को पदोन्नति देकर उसे दिनोद गेट चौकी का इंचार्ज बना दिया गया। जानिए…क्या है पूरा मामला सुशील वर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि, फतेहाबाद जिले के भूना शहर में भी ज्वेलर नरेश सोनी के खिलाफ सीआईए टीम ने सट्टेबाजी के आरोप में केस दर्ज किया। मगर मामले में जांच के बाद पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी ने 3 सितंबर 2024 को तत्कालीन सीआईए इंचार्ज कपिल सिहाग सहित पांच पुलिसकर्मियों को दोषी पाया था। उन पर भी एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। मगर यह आदेश भी अब तक लागू नहीं किया गया। प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया नोटिस शिकायत की समीक्षा के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने हरियाणा सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत नोटिस जारी किया है। प्रधान सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता सुशील वर्मा के आरोपों की जांच कराएं। इस मामले में दो सप्ताह में कार्रवाई करके एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को जमा करवाएं। आयोग की पीठ के अनुसार, आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन और आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने की चिंताजनक प्रवृत्ति दर्शाते हैं। इसलिए जांच व कार्रवाई जरूरी है।