बैंक मैनेजर की संदिग्ध मौत, थानाध्यक्ष पर लापरवाही के आरोप:भाई बोला-घर में लोग थे, फिर फांसी कैसे लग गई?; कमरे को क्यों नहीं किया गया सील

पटना में NEET छात्रा की मौत के बाद पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल अभी थमे भी नहीं थे कि पूर्वी चंपारण के रामगढ़वा थाना क्षेत्र में भी वैसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक जितेंद्र कुमार की संदिग्ध मौत को लेकर परिवार और गांव के लोग रामगढ़वा थानाध्यक्ष राजीव साह की भूमिका पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
जितेंद्र के छोटे भाई पप्पू कुमार ने पुलिस की कार्यशैली पर चार बड़े सवाल खड़े किए हैं, जिनसे पूरा मामला और भी उलझ गया है। घर में लोग थे, फिर फांसी कैसे लग गई? मृतक के भाई पप्पू कुमार का पहला सवाल सबसे सीधा और चुभने वाला है। वे कहते हैं कि घटना के समय घर में जितेंद्र की पत्नी बंदना देवी और महिला के परिवार के अन्य लोग मौजूद थे। ऐसी स्थिति में एक आदमी कमरे में रस्सी कैसे तैयार कर लेता है, फंदा कस लेता है और कोई रोकता भी नहीं? यह कैसे संभव है? उनका आरोप है कि अगर यह आत्महत्या थी तो पत्नी ने तुरंत परिवार को सूचना क्यों नहीं दी। न फोन, न संदेश कुछ भी नहीं। ये खुद साबित करता है कि कुछ न कुछ हमसे छुपाया जा रहा है।

थानाध्यक्ष बोले- गेट खुला था और जितेंद्र लटके थे दूसरा सवाल पुलिस की शुरुआती कार्रवाई से जुड़ा है। पप्पू का कहना है कि जब थानाध्यक्ष घटनास्थल पहुंचे तो उन्होंने बताया कि घर का गेट खुला था। जितेंद्र फांसी के फंदे से लटके मिले, लेकिन इस स्थिति का वीडियो क्यों नहीं बनाया गया? पप्पू ने आरोप लगाया, ऐसा मामला हो और पुलिस वीडियो न बनाए, यह बहुत बड़ी चूक है। सबसे जरूरी सबूत ही शुरुआत में न जुटाया गया, जिससे पूरी जांच कमजोर हो गई।

डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, फिर पत्नी और परिवार के लोग डिटेन क्यों नहीं हुए? परिवार की दूसरी बड़ी आपत्ति यह है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने जितेंद्र को मृत घोषित करने के बावजूद पुलिस ने पत्नी बंदना देवी और घर में मौजूद अन्य लोगों को हिरासत में क्यों नहीं लिया। संदिग्ध मौत में घर के लोगों को पूछताछ के लिए तुरंत रोका जाना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा हुआ। पुलिस ने किसी को छुआ तक नहीं। उनका दावा है कि यही वह मोड़ था, जहां पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। जहां मौत हुई उस कमरे को सील क्यों नहीं किया गया? तीसरा सवाल सबसे चिंताजनक है। परिवार पूछ रहा है कि घटनास्थल वाले कमरे को पुलिस ने सील क्यों नहीं किया। संदिग्ध मौत और वह भी फंदे पर… और पुलिस कमरे को खुला छोड़ देती है? यह सामान्य प्रक्रिया के भी खिलाफ है। परिजनों का आरोप है कि कमरे को सील न करके पुलिस ने आरोपियों को साक्ष्य मिटाने का मौका दिया। यही कारण है कि अब कई महत्वपूर्ण तथ्य धुंधले हो चुके हैं।

FSL टीम को 18 घंटे बाद क्यों बुलाया गया? सबसे गंभीर सवाल फॉरेंसिक टीम को लेकर है। परिवार का आरोप है, घटना रात में हुई थी, लेकिन एफएसएल टीम को अगले दिन शाम तक नहीं बुलाया गया। हमलोगों के दबाव के बाद ही टीम पहुंची। इससे पहले थानाध्यक्ष लगातार शव उठाने का दबाव बनाते रहे और इसे आत्महत्या बताते रहे। परिजनों का कहना है कि जितेंद्र के शरीर पर चोट के निशान थे, जो किसी संघर्ष का संकेत देते हैं। अगर आत्महत्या होती तो ये निशान कैसे आते? परिवार का कहना- जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी परिवार का आरोप है कि 22 जनवरी की रात जितेंद्र की मौत के बाद से जांच अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है। पप्पू कुमार कहते हैं, थानाध्यक्ष किसी दबाव में हैं। वे हत्या को आत्महत्या साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर पहले दिन से ईमानदार जांच होती तो पत्नी बंदना देवी और बच्चे अब तक पकड़े जा चुके होते। मामले के बाद से जितेंद्र की पत्नी बंदना देवी अपने दोनों बच्चों के साथ फरार है। कोई भी उनका सुराग नहीं दे पा रहा। जितेंद्र के पैतृक गांव की 2 तस्वीरें…
एसपी बोले- पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक कुछ कहना जल्दबाजी जब इस पूरे मामले पर पूर्वी चंपारण एसपी स्वर्ण प्रभात से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। रिपोर्ट से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट पर आधारित आगे की जांच की जाएगी। कौन है जिम्मेदार? गांव और परिवार के मन में गहराता सवाल 22 जनवरी को ग्रामीण बैंक के मैनेजर जितेंद्र कुमार की संदिग्ध मौत के बाद से गांव में दहशत और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। परिवार की ओर से आरोप सीधे-सीधे पत्नी और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर लगे हैं। थानाध्यक्ष पर उठे सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय हैं। जांच किस ओर जाएगी, इसका फैसला पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की पड़ताल करेगी, लेकिन एक सच्चाई सभी को परेशान कर रही है- क्या यह मौत सच में आत्महत्या थी… या फिर इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई?

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