‘पारस ने मेरी जिंदगी, मेरा घर सब बर्बाद कर दिया। सरकार या तो उसको फांसी दे, अगर कानून उसे सजा नहीं दे सकता, तो मैं खुद अपनी मां की हत्या का बदला लूंगी।’ ये कहना है मेरठ के कपसाड़ कांड की पीड़िता रूबी का। वो कांपते हाथ और नम आंखों से कहती है- मैं खुद उसकी मां को मार दूंगी, जैसे उसने मेरी मां को मार डाला। मां की तस्वीर हाथ में लिए रूबी बिलखकर रो पड़ती है। वह बस यही कहती है- पारस ने मुझसे मेरी सबसे प्यारी चीज छीन ली है। उसने मेरा सब कुछ खत्म कर दिया। मैंने कभी उससे प्यार नहीं किया। मगर अब नफरत जरूर करती हूं। दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में रूबी ने 8 जनवरी को मां की हत्या और उसकी किडनैपिंग की पूरी कहानी डिटेल में सुनाई। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट…
किडनैपिंग, हत्या की कहानी पारस मेरे ही स्कूल में पढ़ा, मैं 12वीं में, वो 9वीं का स्टूडेंट
रूबी कहती है कि मैंने 2022 में 12वीं पास की। पारस भी उसी स्कूल में 9वीं का स्टूडेंट था। मैं तो उसे जानती भी नहीं थी। बस इतना पता था कि वो अक्सर मुझे फॉलो करता था। दोस्ती की जिद करता था। वो मेरे घर से करीब एक से डेढ़ किमी दूर रहता है। वो आए दिन मेरी गली में खड़ा रहता था। लेकिन मैं उससे बातचीत नहीं करती थी। मेरी ID हैक कर अश्लील वीडियो शेयर किए
पारस मुझे इंस्टाग्राम पर बार-बार रिक्वेस्ट भेजता था। मैंने उसकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं की तो उसने मेरी आईडी हैक कर ली। फिर उसी पर गंदी फिल्म पोस्ट कर दी। मुझे इस बात की जानकारी तब हुई जब मेरे रिश्तेदारों ने इस पोस्ट के बारे में पूछा। मैंने अपने भाई को पूरी बात खुलकर बताई। वे मुझे पारस के घर ले गए। लेकिन पारस सबके सामने मुकर गया। तब हमारी काफी बहस हुई। इसके बाद भईया मुझे घर ले आए और मुझे बहुत डांटा। पारस से अपनी आईडी को पाना मेरी मजबूरी थी। इसलिए मैंने पारस से झूठ बोला कि कि मैं तुम्हें पसंद करती हूं। प्लीज, तुमने मेरी आइडी हैक की है, उसे ठीक कर दो। लेकिन उसके बाद ही मेरे घरवालों ने मुझसे मेरा फोन ले लिया और मेरी आइडी बंद करा दी। 2024 में मां पर पारस ने हमला किया था
2024 में पारस हमारे घर में जबरन घुसा था। उसने मेरी मां पर जानलेवा हमला किया था। तब मेरी मम्मी को काफी चोट लगी थी। इसके बाद गांव में पारस की इस हरकत की वजह से पंचायत हुई थी। इस दौरान ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे परिवार को मेरी वजह से शर्मिंदा होना पड़े। लेटर लिखकर पारस से कहा था- मुझे बख्श दे…
रूबी आगे बताती है- ये सब होने के बाद घरवालों ने मेरी शादी तय कर दी। लेकिन पारस तब भी मेरे पीछे पड़ा रहा। इस बात को अभी से 3 से 4 महीने हुए थे। तब मैंने पारस को पहली और आखिरी चिट्ठी लिखी थी। मैंने उससे सिर्फ यही कहा कि मेरी रिश्ता तय हो गया है। मेरे घरवाले जहां कहेंगे, मैं वहीं शादी करुंगी। मैं अपने परिवार से अलग नहीं हो सकती। मुझे छोड़ दो। मेरा पीछा मत करो। मैंने वो चिट्ठी गांव में ही रहने वाली अपनी सहेली से पारस तक भिजवाई थी। इसके बाद मैंने उसे कभी कोई कॉल या मैसेज नहीं किया किया।
अब 8 जनवरी की कहानी
पारस ने मेरा हाथ पकड़कर घसीटा
8 जनवरी की सुबह मेरे पापा (सतेंद्र) खेत पर काम करने गए थे। मैं अपनी मम्मी (सुनीता) और गांव की दो सहेलियों के साथ खेत पर जा रही थी। सुबह के करीब 8 बज रहे थे। गन्ने के खेत के करीब से गुजरते हुए अचानक पारस मेरे सामने आ गया। उसने खुद को शॉल से ढका हुआ था। सिर्फ चेहरा ही दिख रहा था। खेत पर उसने मेरा हाथ पकड़कर घसीटा और अपने साथ ले जाने लगा। तब मैंने चिल्लाते हुए कहा- छोड़ दे, पर वो नहीं माना। मम्मी बचाने आई तो फरसा मारा
जब मम्मी मुझे बचाने को आगे बढ़ी, तो पारस ने फरसे से मम्मी पर 2 बार हमला कर दिया। उसने मम्मी के चेहरे और सिर पर फरसा मारा। मम्मी लहूलुहान होकर वहीं गिर गईं। मैं और मेरे साथ आईं दोनों सहेलियां घबरा गए। उस समय भी पारस ने मेरे हाथ पकड़ रखे थे। मैं चिल्ला रही थी- प्लीज मुझे छोड़ दे। मेरी मम्मी का खून बह रहा है। जाने दे…। तब पारस ने कहा कि मेरे साथ चल, नहीं तो तुझे भी मार दूंगा। तेरे तीनों भाइयों और पापा की भी हत्या कर दूंगा। वो मुझे घसीटते हुए अपने साथ ले गया। उसने मेरे गले पर फरसा रखा हुआ था। मेरी दोनों सहेलियां वहां से भागकर गांव आ गईं। मुझे नहीं पता कि मम्मी तब जिंदा थीं या नहीं। बस उनका खून बह रहा था। खुद को बचाने के लिए मैं छोटी नहर में कूदी
पारस मुझे ले जाने लगा, किसी तरह उससे बचने के लिए मैं भागी और छोटी नहर में कूद गई। लेकिन पारस भी मेरे साथ नहर में कूदा और मुझे पकड़ लिया। उसने फरसा मेरे ऊपर रख दिया। मैंने सोचा कि वहां चिल्लाकर अपनी जान बचाऊं, किसी को बुलाऊं। लेकिन पारस के डर से मैं चुप रही। किसी से कुछ नहीं कह पाई। पारस के साथ कोई 2 लोग और थे। वो कौन थे? मैं नहीं जानती। लेकिन वो लोग मुझे आगे मिले थे। उसमें शायद एक लड़का सुनील था, जो फरसा लेकर आया था। उसी ने ये फरसा पारस को दिया था। पारस मुझे दिल्ली ले गया फिर हरिद्वार
मेरठ में गांव से निकलने के बाद पारस एक गाड़ी से मुझे कहीं आगे ले गया। वहां एक होटल के पीछे की जगह पर हम रातभर रुके। दूसरे दिन वो मुझे एक ट्रक से कहीं ले गया। उस ट्रकवाले ने शराब पी हुई थी। मैंने सोचा कि इस ट्रक वाले से मदद मांगू, कहूं कि पारस से मुझे बचाए। लेकिन मुझे डर था कि पारस इस ट्रकवाले को भी मार डालेगा। क्योंकि वो बहुत सनकी लड़का है। इसलिए मैं ट्रक में चुपचाप बैठी रही। पारस मुझे पहले दिल्ली ले गया। वहां से फिर हरिद्वार ले गया। हरिद्वार से हम फिर ट्रेन में कहीं जाने के लिए बैठे थे। मुझे नहीं पता था घर पर क्या हो रहा
इस बीच मुझे नहीं पता था कि मेरे गांव, मेरे घर में क्या हो रहा था। मेरी किसी से बात नहीं हो रही थी। हम दोनों के पास फोन नहीं था। 10 जनवरी को जब मैंने जिद करके पारस से कहा कि मैं तेरे साथ शादी कर लूंगी, तुझसे प्यार करती हूं। बस एक बार घर पर मेरी बात करा दे। तब किसी तरह पारस ने एक यात्री के मोबाइल से ट्रेन में से ही अपने दोस्त डॉक्टर राजेंद्र को फोन किया। बस वहीं से पुलिस को हमारी लोकेशन मिल गई। फिर मौके पर पहुंची पुलिस ने हमें पकड़ लिया। 8 जनवरी से 10 जनवरी तक हम केवल ट्रेनों में ही घूमते रहे। पारस मुझे मारने की धमकी देकर अपने साथ घुमाता रहा। लास्ट में मजबूरन मैंने कहा कि तुझसे शादी करूंगी, प्यार करती हूं। तब वो माना।
पारस सनकी है वो सबकी हत्या कर देता
रूबी रोते हुए बताती है- पारस सनकी टाइप का है। वो मुझे हासिल करने के लिए हर हद से गुजरने को तैयार था। वो पहले अपने दादाजी पर हमला कर चुका था। ये बात उसने खुद मुझे बताई थी। उसने एक बार पहले भी मेरी मां पर हमला किया था। इस बार तो मम्मी को मेरे सामने ही फरसे से मार दिया। इसलिए उसकी धमकी से मैं घबरा गई। मुझे लगा कि ये पागल है। सच में मुझे, मेरे भाइयों, पापा को मार डालेगा। इसलिए मजबूरन मुझे उसके साथ रहना पड़ा। गांव की 2 लड़कियां वारदात की चश्मदीद
मेरी और पारस के बीच जो बातचीत हुई, मैंने जो लेटर भेजा। ये बात गांव की ही दो और लड़कियों को भी पता है। वे दोनों लड़कियां वारदात वाले दिन यानी 8 जनवरी को खेत जाते समय मेरे साथ ही थीं। दोनों लड़कियों ने पारस को मेरी मां सुनीता की फरसा मारकर हत्या करते हुए देखा है। रूबी कहती है- मुझे पारस से कभी प्यार नहीं था। न कोई दोस्ती थी। मुझे पारस से शादी न पहले करनी थी और न अब। वो जबरन मेरे पीछे पड़ा रहता था। जिस समय उसने मुझे किडनैप किया, उन दिनों में भी हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं बना। न हम किसी तरह के रिलेशन में हैं और न ही हमारी शादी हुई है। मेरे उंगलियों में जो नेलपेंट था, वो पहले से लगा था। घर पर भी मैं प्रेस किए हुए कपड़े पहनती हूं। क्या ये गलत है। अगर मैं मनमर्जी से पारस के साथ भागती, तो मैं घर से कपड़े, पैसे, मोबाइल या अपने डॉक्यूमेंट कुछ तो लेकर जाती। लेकिन, मैं तो केवल खाली हाथ थी। 11 जनवरी को पता चला मां मर गई
मुझे तो ये भी पता नहीं चला कि मेरी मां मर गई है। जब पुलिस हमें पकड़कर मेरठ लाई, तब मुझे पता चला कि मेरी मां की मौत हो गई है। उसी दिन 8 जनवरी को पारस ने जब मम्मी को फरसा मारा तो वो मर गई थी। इतने दिन घर से संपर्क न होने के कारण मुझे तो मां की मौत की सूचना भी नहीं मिली। न ही मैं आखिरी बार उनका चेहरा देख पाई। मां नहीं रही तो पारस का क्या करूंगी
पारस जानता था कि मैं अपनी मां से सबसे ज्यादा प्यार करती हूं। मेरी जिंदगी में केवल मां ही सबसे कीमती चीज थी। इसलिए पारस ने मेरी मां को ही मुझसे छीन लिया। मेरी सबसे प्यारी चीज पारस ने मुझसे छीनी है। जब मां ही नहीं रही, तो मैं पारस का क्या करुंगी। मुझे बस इंसाफ चाहिए, ये इंसाफ मुझे तभी मिलेगा, जब पारस को फांसी होगी। मेरा यही बयान है और यही सच है। मैं अपने इन बयानों से कभी नहीं मुकरूंगी। पुलिस ने हमें 10 जनवरी को पकड़ा था। तब भी मैंने पुलिस को यही बताया था। थाने में भी यही बयान दिया था और कोर्ट में भी मैंने यही कहा है। मेरे वो सारे बयान दर्ज हैं, जो मैंने आपसे बताए हैं।
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