बिहार में अनावश्यक मुकदमेबाजी से एनएचएआई पिस रहा है। इससे सड़क-पुल परियोजनाओं को पूरा करने में देरी हो रही है। एनएचएआई के अधिकारी व इंजीनियर प्रोजेक्ट पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, बल्कि उनका सारा दिन अदालतों में हाजिरी देने में बीत रहा है। इसलिए भ्रामक मुकदमों के बोझ से प्रोजेक्ट में अडंगा और अधिकारियों को कोर्ट- कचहरी का चक्कर लगाने से बचाने के लिए एनएचएआई ने पहल शुरू की है। अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने के लिए एनएचएआई बिहार विधिक सेवा प्राधिकार से मदद लेने जा रहा है। इसके तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम भूमि अधिग्रहण वाले इलाकों के ग्रामीणों को भूमि अधिग्रहण कानून के प्रति जागरूक करेगी। भू-धारियों को भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनों से अवगत कराने के लिए प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता व पैरा लीगल वालंटियर ग्रामीणों की मदद करेंगे। इसके लिए पीएलवी व पैनल अधिवक्ता को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस संबंध में एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी एनएल योतकर ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर राज्यभर में संयुक्त रूप से जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की प्रभावशीलता और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा काफी हद तक लोगों की जागरूकता पर निर्भर करती है। पैनल अधिवक्ता और पैरा-लीगल वालंटियर्स आम लोगों के लिए प्रथम संपर्क बिंदु होते हैं, इसलिए उन्हें इस विषय में प्रशिक्षित करना जरूरी है। इसकी शुरुआत 14 फरवरी से जिले में होने जा रही है। मुकदमे की जद में प्रमुख परियोजनाएं मझौली- चोरौत के बीच निर्माणाधीन फोरलेन सड़क सीतामढ़ी में कई स्थलों पर रुकी पटना- अरेराज एनएच के लिए पारू में मुआवजा भुगतान को लेकर विवाद चल रहा है बक्सर- भागलपुर एक्सप्रेस-वे को लेकर भूमि अधिग्रहण पर आपत्ति हल्दिया-रक्सौल 6 लेन एक्सप्रेस-वे के लिए समस्तीपुर के कई क्षेत्रों में अधिग्रहण को लेकर विवाद मुजफ्फरपुर में साढ़े चार सौ केस लंबित, इसमें अधिकतर जमीन की किस्म से जुड़ीं आपत्तियां जमीन की किस्म व मुआवजे की राशि को लेकर बड़ी संख्या में मुकदमे जिला से लेकर हाई कोर्ट में लंबित हैं। मुजफ्फरपुर में करीब साढ़े सौ केस लंबित हैं। करीब तीन सौ केस अदालत व डेढ़ सौ मध्यस्थता न्यायालय में लंबित हैं। ग्रामीण अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीन को व्यावसायिक होने का दावा करते हैं, जबकि एनएचएआई इसे कृषि भूमि मानता है। इसे लेकर मामला अदालत तक पहुंचता है। अदालत तक ही मामला सीमित नहीं रहता है। इसे लेकर अपील होने पर भूमि अधिग्रहण अटकने से सड़क व पुल का निर्माण ठप हो जाता है। भूमि अधिग्रहण कानून के प्रति जागरूकता के लिए संवाद