कानपुर लेम्बोर्गिनी केस- कारोबारी बेटे को बचाने की कोशिश नाकाम:कोर्ट में नहीं टिक सकी दलीलें; ड्राइवर ने सरेंडर किया, कोर्ट ने नहीं माना आरोपी

कानपुर लेम्बोर्गिनी केस में कारोबारी बेटे को बचाने की तमाम कोशिशें नाकाम होती दिख रही है। तंबाकू कारोबारी ने पहले पुलिस को मैनेज किया। पैतरा एक्सपोज हुआ तो कोर्ट में ड्राइवर को सरेंडर कराया गया। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी, उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कार अभी थाने में ही रहेगी। अब इस केस की सुनवाई 13 फरवरी को होगी। पढ़िए रिपोर्ट…
कोर्ट में ड्राइवर को खड़ा किया बोला- मैं कार चला रहा था…
कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को घायल कर दिया। ये कार आर्यनगर में रहने वाले तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की है। हादसे के बाद रसूखदार परिवार के आगे पहले तो पुलिस सरेंडर हो गई और लेम्बोर्गिनी कार को थाने में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। इस कार को वहां खड़ा किया गया, जहां थानेदार की कार खड़ी होती है। कवर से ढक दिया गया। उसकी रखवाली के लिए बाउंसर खड़े किए गए। पहले तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। सोशल मीडिया पर जब ये मामला वायरल हुआ, तब पुलिस ने रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट करके इस मामले को सियासी तूल दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले में कार्रवाई का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे बाद कार चला रहे शिवम मिश्रा का नाम जांच में बढ़ा दिया। 11 फरवरी को इस केस में बड़ा यूटर्न आया। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के कथित ड्राइवर ने बुधवार दोपहर कानपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। ड्राइवर मोहन अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कोर्ट पहुंचा। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी मैं ही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। उस वक्त मैं घबरा गया और मुझे कुछ समझ में नहीं आया। उसी वक्त हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा और दरवाजा खोला गया, तो मैं नीचे से निकल गया था। बाउंसर ने शिवम को निकाला था। हादसे के बाद मैं कोने में खड़ा हो गया था। शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था। ड्राइवर ने कहा-कार में 9 गियर, होते हैं 8
हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी, उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कार अभी थाने में ही रहेगी।

कोर्ट में पेशी के दौरान ड्राइवर मोहन से बात की गई, तब उसने बताया- हादसे के दौरान मैं कार चला रहा था। जबकि पुलिस की जांच और मौके के वीडियो से साफ है कि गाड़ी शिवम ही चला रहा था। जब मोहन से पूछा गया कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तब उसने बताया कि 9 गियर होते हैं, जबकि इस कार को लेकर एक्सपर्ट से बात की गई, तब सामने आया कि इस कार में 7 गियर और एक बैक गियर यानी कि 8 गियर होते हैं।

वहीं, वकील नरेंद्र कुमार यादव ने कहा- घायल और मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता किया है। वादी ने पहचान की है कि गाड़ी मोहन ही चला रहा था। वादी ने कहा है कि वह इस केस में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहता।
अब जानिए कि पुलिस के किन साक्ष्य और गवाहों के आधार पर खारिज हुई याचिका 1. हादसा का वीडियो
पुलिस ने अपनी जांच में हादसे के बाद का एक वीडियो शामिल किया। इसमें हादसे के बाद लेम्बोर्गिनी के पीछे चल रही दूसरी कार से बाउंसर निकलते हैं। ईंट से लेम्बोर्गिनी का शीशा तोड़कर गेट खोलते हैं। फिर लेम्बोर्गिनी की ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकालते हैं और उसे दूसरी गाड़ी से लेकर अस्पताल चले जाते हैं। पुलिस का दावा किया था कि शिवम को ड्राइविंग सीट से निकालते साफ देखा जा सकता है। वीडियो देखने से साफ होता है कि गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति था ही नहीं। इस वजह से ईंट से शीशा तोड़ना पड़ा। तब कार का दरवाजा खोलकर शिवम को बाहर निकाला जा सका था। 2. 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
पुलिस की जांच रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा सबूत प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं। जांच कर रहे दरोगा दिनेश सिंह ने 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। इन सबने बताया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। हादसे के बाद शिवम को बाउंसर कार से निकालकर ले गए। ड्राइवर के गाड़ी चलाने या कार में किसी दूसरे व्यक्ति के मौजूद होने की बात को सभी प्रत्यक्षदर्शियों ने खारिज कर दी थी। पुलिस ने इन सभी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अपनी जांच रिपोर्ट में दर्ज किए। 3. शिवम की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर मिली
पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में बतौर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिवम की मोबाइल लोकेशन को भी शामिल किया। हादसे के दौरान शिवम की मोबाइल लोकेशन भी VIP रोड पर हादसे वाली जगह पर ही थी।
4. CCTV में कैद हुई है पूरी घटना
पुलिस ने जांच रिपोर्ट में CCTV फुटेज भी शामिल किया। नगर निगम से मिले CCTV में पूरा हादसा कैद हुआ था। इस फुटेज से भी साफ है कि गाड़ी में कोई ड्राइवर नहीं था, सिर्फ एक व्यक्ति ही मौजूद था। 5. वादी ने शिवम को पहचाना था
पुलिस ने हादसे की FIR दर्ज कराने वाले चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक के बयान दर्ज किए थे। उसने बताया था कि लेम्बोर्गिनी में सिर्फ एक ही व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर था। वीडियो देखकर तस्दीक किया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। वादी का बयान भी किसी केस में सबसे अहम माना जाता है। कोर्ट में दिया समझौते का आवेदन, पुलिस को जानकारी नहीं
इस केस में सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात है कि इस केस के वादी चमनगंज घुसियाना रहने वाले मो. तौफीक और मोहनलाल के बीच समझौता हो गया। वकील धर्मेन्द्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया, उसके मुताबिक तौफीक और मोहन के बीच समझौता हो गया था। तौफीक की तरफ से कहा गया कि मुझे इलाज के लिए खर्च दे दिया है। इस वजह से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं और इस केस में अब कोई कार्रवाई नहीं चाहता हूं। यह आपसी समझौता और सुलह किसी दबाव में नहीं किया है। इस मामले में DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव से बात की गई। उन्होंने कहा- अभी तक पुलिस के पास किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं आया है। 10 फरवरी को वादी मो. तौफीक ने अपने बयान दर्ज कराए थे। इस दौरान भी वादी ने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है।
……………. यह खबर भी पढ़िए- कारोबारी बोले-कानपुर पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे, लेम्बोर्गिनी बेटा नहीं, ड्राइवर चला रहा था कानपुर में लेम्बोर्गिनी कार से 6 लोगों को कुचलने के मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। कारोबारी पिता केके मिश्रा मंगलवार को ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। पढ़ें पूरी खबर…

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