भारत सरकार की ओर से राष्ट्रगान जन गण मन से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम् गाने संबंधी जारी निर्देशों को लेकर विवाद गहरा गया है। इस फैसले पर सिख संगठन दल खालसा ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे सिख पहचान व धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया है। दल खालसा के नेता कंवरपाल सिंह बिट्टू ने बयान जारी करते हुए कहा- यह फैसला भारतीयता के नाम पर हिंदुत्व विचारधारा को सिख समुदाय पर थोपने का प्रयास है। सिख होने के नाते हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। यह निर्णय सिख समुदाय की भावनाओं और उनकी धार्मिक पहचान के विपरीत है। फैसले को न मानने और रद्द करने की मांग
कंवरपाल सिंह बिट्टू ने पूरे सिख समुदाय से अपील की है कि वे इस फैसले को न मानें और इसे रद्द करने की मांग करें। उनका कहना है कि यह निर्णय सिख संस्कृति पर एक विशेष विचारधारा थोपने जैसा है, जो सिख परंपराओं से मेल नहीं खाती। उन्होंने इसे एक सूक्ष्म वार बताते हुए कहा कि सिखों को इस मुद्दे को गंभीरता से समझना चाहिए और इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत सरकार या पंजाब सरकार की ओर से कोई भी फैसला चाल, कपट या किसी छिपे हुए एजेंडे के तहत सिख समुदाय पर थोपा जाएगा, तो उसका पहले भी विरोध किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा। केंद्र सरकार ने ये आदेश जारी किए बता दें कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए है। गृह मंत्रालय के आदेशों में कहा गया है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। आदेश के मुताबिक, सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले 2 अंतरे ही गाए जाते थे। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है। क्या है दल खालसा संगठन दल खालसा एक सिख धार्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1978 में पंजाब में हुई। यह संगठन सिख समुदाय के धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाने के लिए जाना जाता है। दल खालसा ने समय-समय पर सिखों के अधिकारों, पंजाब से जुड़े मुद्दों और खालिस्तान की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। इसलिए, इसे एक कट्टरपंथी विचारधारा वाला संगठन भी माना जाता है। अतीत में इसके कुछ आंदोलनों और गतिविधियों को लेकर विवाद भी रहे हैं। वर्तमान में यह संगठन विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बयान, प्रदर्शन और शांतिपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी बात रखता है। ॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढे़ं… जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम:सभी 6 पैरा गाना जरूरी, स्कूलों में राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी पढ़ाई; सिनेमाघरों को छूट केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई। पूरी खब पढ़ें…