कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर कार्यक्रम में पहुंचे स्वामी रामदेव:बोले-मैकाले और मदरसा बोर्ड नहीं चाहिए, अच्छा मुसलमान खुद को मुगलों से नहीं जोड़ता

योग गुरु स्वामी रामदेव ने गुरुवार को कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर स्वामी दयानंद जयंती और स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी को समर्पित चतुर्वेद परायण महायज्ञ में हिस्सा लिया। यज्ञ में पूर्णाहुति डालकर कार्यक्रम का समापन किया। बातचीत में स्वामी रामदेव ने मैकाले (थॉमस बैबिंगटन मैकाले) और मदरसा शिक्षा बोर्ड नहीं अपनाने की बात कही। ब्रह्मसरोवर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि हमारे पूर्वज एक हैं और महान हैं। चाहे वो हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख हो, ईसाई हो या फिर बौद्ध हो, सबका DNA एक ही है। हम सब ऋषि और ऋषिकाओं की संतान है। इससे पहले स्वामी रामदेव ने रेलवे रोड पर स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को सूर्य नमस्कार का अभ्यास करवाया। अच्छा मुसलमान खुद को मुगलों से नहीं जोड़ता स्वामी रामदेव ने कहा कि अच्छा मुसलमान खुद को मुगलों से नहीं जोड़ता है। वो खुद को जोड़ता है तो भारत के साथ जोड़ता और इस धरती माता से जोड़ता है। हमारे शंकराचार्य ने सबके अंदर एक ही परमात्मा का दर्शन किया है। कुछ लोगों ने मिलावट कर दी रामदेव ने कहा कि कुछ लोगों हमारे देश की व्यवस्था में मिलावट करने की कोशिश की। लेकिन वे भूल गए हमारे पूर्वज एक हैं। जो ज्ञान को दूर करे वो ब्राह्मण है। जो न्याय दिलाए वो क्षत्रिय है। जो देश को आगे बढ़ाए वो वैश्य और जो पवित्रता को बढ़ाए वो शुद्र है। देश को आगे बढ़ाने की बात हो- रामदेव मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी समान हैं, सभी महान हैं, सभी जाति, वर्ग और समुदाय का देश की आजादी से लेकर के उत्थान में योगदान है। सब जाति, वर्ग और समूह के लोगों से कुछ गलतियां हुई हैं। लेकिन एक-दूसरे को गाली-गलौज और ऊंचा-नीचा ना बोलते हुए देश को आगे बढ़ाने की बात करनी चाहिए। सब लोग सनातनी है- रामदेव कहा कि हमारे देश में कोई सनातनी मुसलमान, कोई सनातनी हिंदु, कोई सनातनी सिख तो कोई सनातनी बुद्ध है क्योंकि हम सबके पूर्वज एक हैं। हमारी संस्कृति, प्रकृति और विरासत साझी है। इस भाव और चेतना के साथ यह देश आगे बढ़ेगा तो एक भारत और श्रेष्ठ भारत का सपना पूरा होगा। मदरसा बोर्ड नहीं चाहिए- रामदेव स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का गुरुकुलीयकरण होना चाहिए। मैकाले के मानस पुत्र तैयार हो रहे हैं, क्योंकि देश में अलग-अलग नेम प्लेट के बोर्ड है। उनका कंटेंट एक है। हमें ना मदरसा बोर्ड चाहिए और ना मैकाले बोर्ड चाहिए। हमें भारतीय शिक्षा बोर्ड इसलिए चाहिए क्योंकि उससे भारत के युवाओं का चरित्र निर्माण होगा और उससे राष्ट्र का निर्माण होगा।

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