वाराणसी में विजया एकादशी पर दूल्हा बने काशी विश्वनाथ:52 थाल चढ़ावा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन; नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी श्रृंगार

विजया एकादशी की शाम काशी में शगुन की हल्दी से जब बाबा विश्वनाथ का दूल्हा स्वरूप सजाया गया, तो पूरी नगरी शिवमय हो उठी। बांसफाटक स्थित महंत लिंगिया महाराज (शिवप्रसाद पाण्डेय) के आवास ‘धर्म निवास’ से निकली भव्य शोभायात्रा टेढ़ीनीम तक पहुंची। डमरुओं की थाप, शंखनाद और “हर-हर महादेव” के उद्घोष के बीच हजारों श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य के साक्षी बने। शोभायात्रा की विशेष आकर्षण रही 52 थालों में सजा चढ़ावा। इनमें हल्दी, चंदन, फल, मेवा और मांगलिक सामग्री सजाई गई। श्रद्धालु इन थालों को सिर पर धारण कर विवाहोत्सव में शामिल हुए। बाबा के ससुराल माने जाने वाले सारंगनाथ मंदिर से पगड़ी बांधे ससुरालीजन हल्दी लेकर पहुंचे। यह दृश्य किसी पारंपरिक विवाह से कम नहीं था। रास्ते में जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई, महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं और युवाओं की टोली डमरू बजाती आगे बढ़ती रही। नवरत्न जड़ित छत्र तले राजसी श्रृंगार
आयोजन से जुड़े संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का भव्य श्रृंगार किया। पारंपरिक आभूषणों और पुष्पमालाओं से सुसज्जित बाबा का दूल्हा स्वरूप अलौकिक प्रतीत हुआ। महंत वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में नवरत्न जड़ित छत्र का विधिवत पूजन किया गया। छत्र के नीचे विराजमान बाबा का स्वरूप राजसी और दिव्य आभा से दीप्त था-मानो स्वयं कैलाशपति विवाहोत्सव के लिए काशी पधारे हों। 4 तस्वीरें देखिए…

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