हरियाणा में क्रिप्टो करंसी के नाम पर सैकड़ों लोगों से हुए करीब 800 करोड़ रुपए के क्रिप्टो फर्जीवाड़े मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने अमृतसर, चंडीगढ़, अंबाला, करनाल और यमुनानगर में रेड कर 4 आरोपियों की करीब 6.20 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने समेत नकदी बरामद की है। कार्रवाई करते हुए कुल 4.50 करोड़ रुपए की 7 अचल संपत्तियां और 1.70 करोड़ रुपए की नकदी को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। इस मामले में 4 मुख्य आरोपी नामजद हैं, जिनके खिलाफ ईडी की ओर से कार्रवाई अमल में लाई गई है। दरअसल 2022 में अंबाला शहर में क्रिप्टो के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। अंबाला सीआईए ने धोखाधड़ी मामले में आरोपी कपिल अंबाला छावनी, विकास अमृतसर , तरुण को पिलानी (राजस्थान) और रमेश को अंबाला से गिरफ्तार किया था, लेकिन 2025 में मामले की जांच चंडीगढ़ ईडी जोनल टीम के पास पहुंच गई। ईडी अब लगातार पिछले 4 महीने से मामले में नामजद चारों आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई को अंजाम दे रही है। पहले निवेशकों के क्रिप्टो वॉलेट बनाए जाते थे, उसमें 100 डॉलर दिखाई देते थे सूत्रों के अनुसार कपिल, तरुण तनेजा, विकास कालड़ा और पवन ने क्रिप्टो वर्ल्ड ट्रेडिंग कंपनी नाम से फर्जी कंपनी बनाई, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थी। इस कंपनी में पैसे इन्वेस्ट करने के लिए आरोपियों द्वारा लोगों को इन्वेस्ट किया गया पैसा अधिक ब्याज सहित वापस मिलने का लालच दिया जाता था। इसमें इन्वेस्ट करने के लिए पहले निवेशकों के बाइनेंस के जरिए क्रिप्टो वॉलेट बनाए जाते और उसमें पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। लेकिन यह पैसे फर्जी कंपनी के साथ लिंक किए गए। आरोपियों के पारिवारिक सदस्यों के खातों में क्रेडिट होते थे। एक आईडी बनाने के लिए 8 से 15 हजार रुपए तक खर्च आता था। आईडी बनने के कुछ मिनट बाद ही उस पर इन्वेस्ट किए गए पैसे के बदले 100 डॉलर दिखाई देते थे ताकि पैसे लगाने वाले व्यक्ति को अधिक ब्याज पर पैसे वापस मिलने का विश्वास हो जाए। आईडी में भी दिखता था कि उनके किए गए पैसे डबल से अधिक 120 दिन में वापस मिल जाएंगे। आईडी में एक हेल्प मैन्यू भी दिया गया जिसमें आईडी चलाने व पैसे इन्वेस्टमेंट को लेकर जानकारी दी गई। रोजाना 8 हजार के बदले अगले दिन प्रतिदिन के हिसाब से 2 डालर सप्ताह में 5 दिन में वापस मिलने थे। इस तरह 120 दिन यानी 5 महीने में 8 हजार रुपए के 24 हजार रुपये मिलने थे। लेकिन जब लोग अपने जमा किए पैसों को विद-ड्रा करने लगते थे तो पैसे ही नहीं निकलते थे, जिसके बाद धोखाधड़ी का पता लगा और पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज करवाया गया जिसकी पोल ईडी की जांच में खुली है।