महाशिवरात्रि पर 56000 लीटर गंगाजल से संगमेश्वर महादेव का अभिषेक:मध्य रात्रि में भस्म से आरती, 5 लाख श्रद्धालु करेंगे दर्शन, सेवादल ने बनाई व्यवस्था

आज रविवार को महाशिवरात्रि पर 56 हजार लीटर गंगाजल से संगमेश्वर महादेव का अभिषेक किया जाएगा। इस मंदिर में अभिषेक के लिए हरियाणा और पंजाब से 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचेंगे। महाशिवरात्रि पर मंदिर में महादेव की 4 पहर में आरती होगी। इसमें मध्यरात्रि के समय होने वाली आरती विशेष होगी। मध्यरात्रि में उज्जैन महाकाल की तरह एक घंटे तक भस्म से आरती होगी। इसके लिए विशेष भस्म बनाई गई है। हालांकि भस्म आरती के समय पूजा और अभिषेक बंद रहेगा। लेकिन भस्म आरती के बाद श्रद्धालु फिर से दर्शन और अभिषेक कर सकेंगे। व्यवस्था के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से सेवादल के 500 मेंबर्स को जिम्मेदारी दी गई है। मंदिर परिसर में मिलेगा गंगाजल सेवादल के प्रधान पंडित भूषण गौतम ने बताया कि कुरुक्षेत्र के पिहोवा में संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के जल चढ़ाने के लिए 56 हजार लीटर गंगाजल की व्यवस्था की गई है। इस गंगाजल को उत्तराखंड के हरिद्वार से हर की पौड़ी से लाया गया है। गंगाजल को मंदिर परिसर लगे टैंक और शेड पास रखे टैंकर में रखा गया है। मंदिर के बाहर भी रहेगी व्यवस्था मंदिर के अंदर 8 हजार लीटर की कैपेसिटी वाले टैंक लगाए गए हैं। मंदिर के बाहर 35 हजार लीटर की कैपेसिटी वाला टैंकर रखा गया है। इस टैंकर से लाइन में लगे श्रद्धालुओं को निशुल्क गंगाजल मिल सकेगा। इसके लिए सेवादल के मेंबर्स की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा 13 हजार लीटर की कैपेसिटी का टैंकर अलग से रखा गया है। ऐप से रखी जा रही नजर गंगाजल के टैंक में गेज सिस्टम लगा है। इस सिस्टम पर मोबाइल ऐप के जरिए नजर रखी जा रही है। इस ऐप से टैंक और उसमें मौजूद गंगाजल की सारी जानकारी मैसेज के जरिए ऑटोमैटिक मिलती रहती है। ऐप से जल की शुद्धता के बारे में भी पता चलता रहता है। टैंक में 100 लीटर जल रहने पर ऐप मोबाइल पर अलर्ट भेज देती है। कांवड़िए-दिव्यांग नहीं लगेंगे लाइन में कांवड़ यात्री, दिव्यांगजन और बुजुर्गों के लिए जल चढ़ाने की अलग से व्यवस्था रहेगी। उनको लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। उनके लिए गेट नंबर-3 से व्यवस्था बनाई गई है। अगर श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा हुई तो जलहरी लगाई जाएगी, ताकि बाहर से ही जल चढ़ाया जा सके। 21 किलो भस्म से होगी आरती मध्यरात्रि में 21 किलो भस्म से संगमेश्वर महादेव की विधिवत और पूरे विधान से भव्य आरती होगी। इस भस्म को गाय के गोबर के बने उपलों से तैयार किया गया है। इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से एक महीना पहले तैयारी की गई। भस्म बनाने के बाद उसे कपड़े से छानकर शुद्ध किया जाता है। स्वयंभू हैं संगमेश्वर महादेव मंदिर के महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि संगमेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। पुराने समय में महात्मा गणेश गिरी को घास के बीच एक दीमक का ढेर दिखाई दिया। उन्होंने अपने चिमटे से इस ढेर को कुरेदा तो उनका चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। उन्होंने मिट्टी को हटाकर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और तेजस्वी शिवलिंग दिखाई दिया। उन्होंने शिवलिंग को उखाड़ना चाहा, लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। दूध से नहीं निकलता मक्खन मंदिर में एक और चमत्कार देखने को मिलता है। यहां दूध को बिलोकर उससे मक्खन नहीं निकाला जाता है। अगर कोई कोशिश करता है तो दूध खराब हो जाता है। साथ ही मंदिर परिसर में चारपाई (खाट) का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मान्यता है कि किसी का बुखार ठीक नहीं हो रहा हो, तो 2 दिन मंदिर के भंडारे में भोजन करने से उसका बुखार उतर जाता है। 3 नदियों के संगम से बना संगमेश्वर संगमेश्वर धाम अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी के संगम से बना है। महाभारत, वामन, गरुड़, स्कंद और पद्म पुराण में वर्णित कथाओं में इसका प्रमाण मिलता है। भगवान शंकर से प्रेरित होकर 88 हजार ऋषियों ने यज्ञ के जरिए अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी का संगम कराया था। इन नदियों के संगम से भोलेनाथ को संगमेश्वर महादेव कहा जाने लगा। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी संभाल रहा व्यवस्था संगमेश्वर महादेव मंदिर की पूरी व्यवस्था श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी संभाल रहा है। अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी और मंदिर के सचिव विश्वनाथ गिरी मंदिर के व्यवस्थापक हैं। मंदिर में सेवादल की भूमिका भी काफी अहम है। महाशिवरात्रि, हर महीने की त्रयोदशी और श्रावण मास में लगने वाले मेले की व्यवस्था सेवादल ही संभालता है।

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