सहरसा जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ उमड़ेगी। जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित देवना शिव मंदिर और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के बलवाहाट में स्थित मिनी बाबा मटेश्वर धाम आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैले इस परिसर के मध्य 25 से 40 फीट ऊंचे टीले पर स्वयं अंकुरित शिवलिंग स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। काले पत्थर से निर्मित यह शिवलिंग लगभग ढाई से आठ फीट ऊंचा और चार फीट मोटा बताया जाता है। अष्टदल में कटे शिवलिंग और चबूतरे के बीच चारों ओर लगभग एक इंच का शून्य स्थान है, जिसमें पूरे साल जल भरा रहता है। विशेष बात यह है कि चैत-वैशाख में जब भूजल स्तर नीचे चला जाता है, तब भी यह जल ऊपर बना रहता है, जबकि सावन-भादो में जलस्तर बढ़ने पर यह नीचे चला जाता है। श्रद्धालु इस जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। पुरातत्वविदों ने भी शिवलिंग की संरचना को अद्भुत बतायाऑ
मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान प्राचीन पत्थर के किवाड़, चौखट, प्रतिमाएं और नौ कुओं के अवशेष मिलने की चर्चा स्थानीय स्तर पर प्रचलित है। धर्म विशेषज्ञों और पुरातत्वविदों ने भी शिवलिंग की संरचना को अद्भुत बताया है। वर्ष 2007 में आए जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने इसे एक विरल शिवलिंग कहा था। स्थानीय मान्यता के अनुसार, लगभग सौ वर्ष पूर्व स्वप्नादेश मिलने के बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया था। 2005 से श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि
महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यहां जलाभिषेक का विशेष महत्व है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुंगेर स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर लगभग 90 किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा मटेश्वर धाम पहुंचते हैं। वर्ष 1997 में डाक बम की शुरुआत और 2005 से कांवड़ यात्रा आरंभ होने के बाद से यहां श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। महाशिवरात्रि पर आयोजित राजकीय मटेश्वर महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर समिति और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा मटेश्वर धाम में जलाभिषेक करने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।