हरियाणा रिटायर्ड IAS खेमका वेयरहाउस नियुक्ति विवाद:सरकार ने नहीं दिया जवाब; कोर्ट ने खत्म किया आखिरी मौका, मई में सुनवाई

हरियाणा सरकार अदालत में उस याचिका का जवाब दाखिल नहीं कर सकी, जिसमें रिटायर्ड IAS अधिकारी आशोक खेमका के खिलाफ कथित धोखाधड़ी भर्ती मामले को हायर कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। यह मामला एक अन्य मामले से जुड़ा हुआ है जिसमें रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप भी है। पंचकूला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अर्पणा भारद्वाज ने देखा कि राज्य सरकार ने याचिका पर जवाब नहीं दिया है। क्योंकि सरकार ने जवाब से इंकार या और समय लेने का कोई ठीक कारण नहीं बताया, इसलिए अदालत ने जवाब देने का मौका बंद कर दिया। अगली सुनवाई 30 मई, 2026 के लिए तय की।
यहां पढ़िए क्या है पूरा मामला
यह मामला हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन में दो मैनेजर रैंक समेत 25 कर्मियों की नियुक्ति से जुड़ा है। साल 2009-10 में हुड्डा सरकार के दौरान यह भर्तियां हुई। तब खेमका वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के एमडी थे।
विभाग की आंतरिक जांच में स्क्रीनिंग कमेटी ने इन भर्तियों को नियमों के खिलाफ बताया था। इस मामले में आवश्यकता मात्र एक अधिकारी की थी और नियुक्तियां दो को दी गईं।
खेमका के बाद वेयरहाउसिंग के एमडी बने IAS अधिकारी संजीव वर्मा ने इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट तत्कालीन मुख्य सचिव संजीव कौशल और कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा को भेजी। जिसमें अशोक खेमका के खिलाफ चार्जशीट करने की सिफारिश की थी। संजीव वर्मा ने उन दोनों अधिकारियों को भी निलंबित करने की सिफारिश की थी, जिन्हें भर्ती किया था।
कोर्ट में पड़ चुकी प्रोटेक्शन पिटीशन
वकील रविंदर कुमार ने इस मामले में प्रोटेक्शन पिटीशन डाली है, जिसमें उन्होंने कहा कि पुलिस ने PC एक्ट (भ्रष्टाचार विरोधी कानून) के तहत पहले अनुमति नहीं ली थी, इसीलिए मामला गलत तरीके से रजिस्टर हुआ। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में विरोधाभास हैं: एक तरफ कहा गया कि अनुमति नहीं मिली, वहीं दूसरी तरफ उस एक्ट के तहत बाकी आरोपियों के लिए कुछ भी नहीं कहा गया।
यहां पढ़िए प्रोटेस्ट पिटीशन में क्या…
1. 26 अप्रैल 2022 को दर्ज हुई FIR पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट रविन्द्र कुमार इस मामले के प्रथम शिकायतकर्ता हैं। उन्होंने ही अब प्रोटेस्ट पिटीशन लगाई है। पिटीशन में लिखा है कि उन्होंने शिकायतों के आधार पर इस मामले में 26 अप्रैल 2022 को एफआईआर दर्ज कराई थी। 2009 में भर्ती विज्ञापन के सभी जरूरी नियमों के खिलाफ 2010 में निगम में प्रबंधक ग्रेड-1 के पद पर कई अवैध नियुक्तियां हुईं।
2. क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठाए
पिटीशनर ने पुलिस की ओर से कोर्ट में लगाई गई क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। तर्क दिया है कि मामले की जांच कर रहे पंचकूला के सेक्टर-5 की पुलिस चौकी के प्रभारी ने पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत मंजूरी लेने में सफल नहीं होने का बहाना किया है। उन्होंने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला बंद करने के लिए एलडी चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, पंचकूला के समक्ष अनट्रेस्ड क्लोजर रिपोर्ट (UCR) दायर की है। इसकी सुनवाई 17 नवंबर 2025 को हो चुकी है।
3. इंटरव्यू कमेटी के लेटर को नजरअंदाज किया गया
पिटीशन में लिखा है कि पंचकूला के ACP विजय नेहरा जो तत्कालीन जांच अधिकारी थे, जानबूझकर अपराधों की जांच करने में विफल रहे। इस मामले में किसी भी अनुमति की जरूरत नहीं थी। यहां तक कि इंटरव्यू कमेटी के चेयरमैन आईएएस रोशन लाल ने भी हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को 12 मई 2022 को एक लेटर लिखा था, जिसमें इन नियुक्तियों को गलत बताया गया था।
4. क्लोजर रिपोर्ट में कई विरोधाभास
प्रोटेस्ट पिटीशन में लिखा है कि पुलिस की ओर से दायर क्लोजर रिपोर्ट विरोधाभासों से भरी है। एक तरफ यह पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत धारा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ यह अन्य सह-आरोपी कर्मचारियों के संबंध में इस धारा पर पूरी तरह से चुप है, जिनके अनुमोदन प्राधिकारी हरियाणा राज्य भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक हैं, जो खुद इस मामले में शिकायतकर्ता हैं।
5. गलत कोर्ट में दी गई क्लोजर रिपोर्ट
इस मामले में पीसी अधिनियम, 1988, आईपीसी की धारा 420 भी शामिल है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए एलडी सीजेएम कोर्ट को सुनने के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है, क्योंकि यह अधिकार क्षेत्र विशेष रूप से एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली विशेष अदालत को सौंपा गया है।
6. 5 महीने से कोर्ट में हो रही सुनवाई
प्रोटेस्ट पिटीशन में लिखा है कि उप-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पंचकूला पिछले 5 महीनों से पीसी अधिनियम, 1988 से जुड़े मामले की नियमित सुनवाई कर रहे हैं। उन्होंने हरियाणा राज्य भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक की ओर से वनीत चावला सचिव (सेवानिवृत्त) और मनोज कुमार सचिव के बयान भी कानून के प्रावधानों के विरुद्ध दर्ज किए हैं, क्योंकि वे खुद को अधिकृत शिकायतकर्ता होने का दावा नहीं कर सकते थे।
7. खेमका के एक आईएएस रिश्तेदार का भी नाम
पिटीशन में दावा है कि खेमका के आईएएस रिश्तेदार अपने अधीनस्थ एक आईएएस अधिकारी पर दबाव बना रहे हैं। इस मामले में एचएसडब्ल्यूसी एमडी अपने अधिकारियों के माध्यम से पूरी तरह से गलत और झूठे बयान दर्ज करवाकर अदालत को गुमराह कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *