केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने हरियाणा और अन्य राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के कार्यान्वयन में कथित परिचालन संबंधी खामियों को लेकर क्षेमा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि, कंपनी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है, जिसने 9 फरवरी को पैनल से हटाने के लिए जारी कारण बताओ नोटिस पर आगे की कार्यवाही पर 8 जुलाई को अगली सुनवाई की तारीख तक रोक लगा दी है। 3 फरवरी को जारी नोटिस में बीमा कंपनी से 16 फरवरी तक यह बताने को कहा गया था कि उसे खरीफ 2026 से योजना को लागू करने से क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए और उसे ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
हरियाणा ने पैनल से हटाने की मांग की थी नोटिस के अनुसार, हरियाणा, तमिलनाडु और राजस्थान की सरकारों ने पीएमएफबीवाई और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) सहित फसल बीमा योजनाओं के कार्यान्वयन में गंभीर परिचालन चूक के कारण कंपनी को पैनल से हटाने-ब्लैकलिस्ट करने की मांग की थी। सरकार के लेटर में ये की गई मांग 1. सात दिनों में निपटाने के दिए निर्देश: 9 अक्टूबर, 2025 को लिखे एक लेटर में, हरियाणा सरकार ने केंद्र को सूचित किया कि केंद्रीय मंत्रालय के अधीन तकनीकी सलाहकार समिति (TAC) ने कंपनी को भिवानी, चरखी दादरी और नूह जिलों में रबी 2023-24 के 85 करोड़ रुपए के दावों का निपटारा आदेश प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया था। 2. कंपनी ने केंद्र से अपील की: राज्य ने कहा कि उसने 26 अगस्त, 2025 को कंपनी को टीएसी के निर्देश भेज दिए थे। हालांकि, बीमा कंपनी ने टीएसी के फैसले की समीक्षा के लिए केंद्र से अपील की। केंद्र ने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी, कि मामले की व्यापक जांच हो चुकी है और समीक्षा का अनुरोध निराधार है। इसके बाद राज्य ने कंपनी को टीएसी के आदेश का पालन करने और सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 3. कंपनी ने सरकारों की नहीं मागी मांग: हरियाणा सरकार ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के स्पष्ट और बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद, कंपनी किसानों के दावों का निपटारा निर्धारित समय पर करने में विफल रही है। इस गैर-अनुपालन से प्रभावित किसानों को अनावश्यक कठिनाई हो रही है और पीएमएफबीवाई योजना के उद्देश्यों को नुकसान पहुंच रहा है। 3. क्लस्टर-III में बहुत मामले पेडिंग: लेटर में आगे बताया गया कि कंपनी के अंतर्गत आने वाले आठ जिलों वाले क्लस्टर-III में पीएमएफबीवाई के तहत नुकसान के दावों का बड़ा ढेर लंबित है। इसमें कहा गया है, “किसानों और स्थानीय अधिकारियों द्वारा बार-बार संपर्क करने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद, बड़ी संख्या में दावे अनसुलझे हैं, जिससे दावों के निपटान में लंबा विलंब हो रहा है। 4. किसानों को हो रही वित्तीय नुकसान: लेटर में आगे कहा गया है, यह लंबित मामला न केवल छोटे और सीमांत किसानों की वित्तीय परेशानी को बढ़ाता है, जो फसल के नुकसान के बाद भरपाई के लिए इन भुगतानों पर निर्भर रहते हैं, बल्कि सरकार की प्रमुख बीमा पहल में विश्वास को भी कम करता है। इसमें यह भी बताया गया है कि जिला नोडल अधिकारी जिला स्तरीय निगरानी समितियों के माध्यम से मामलों का निपटारा कर रहे हैं। किसानों का विभाग पर लापरवाही का आरोप अखिल भारतीय किसान सभा के बलबीर सिंह थकन ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनी ने 25 सितंबर, 2025 को हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी और हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अदालत के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद अपना जवाब दाखिल करने में विफल रहा है। उन्होंने दावा किया कि विभाग के लापरवाह रवैये के कारण ही हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने-डी-एम्पेन करने के लिए केंद्र द्वारा शुरू की गई कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।