हिमाचल प्रदेश का स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड मंडी और परवाणू में बागवानों के लिए 2 नए कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोर बनाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर लगा दिए गए हैं। इस पर 55 से 60 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है। मगर बागवान इसे फिजूलखर्ची बता रहे हैं। राज्य में सरकारी उपक्रम हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चर मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉर्पोरेशन (HPMC) ने भी 7 CA (रोहड़ू, गुमा, जरोल टिक्कर, ओडी, रिकांगपियो, चच्योट और पतलीकूहल) स्टोर बना रखे हैं। इनकी क्षमता 8000 मीट्रिक टन सेब स्टोर करने की है। इनमें 20 प्रतिशत चैंबर बागवानों के लिए रिजर्व रखे गए हैं। ऐसे में नए CA स्टोर सफेद हाथी साबित हो सकते हैं।
HPMC के CA स्टोर खाली HPMC अधिकारियों के मुताबिक, रोहड़ू को छोड़कर हर जगह बागवानों के लिए रिजर्व रखे गए चैंबर खाली पड़े हैं। यानी बागवान CA स्टोर में सेब नहीं रखना चाहते। खासकर अमेरिका, न्यूजीलैंड, यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड डील (FTA) होने के बाद बागवान अब सेब को स्टोर करने से कतरा रहे हैं। क्योंकि CA स्टोर में रखा सेब फरवरी-मार्च के बाद मार्केट में आता है, लेकिन FTA साइन होने के बाद अब विदेशी सेब भी इसी अवधि में अधिक मात्रा में भारत के बाजारों में आएगा। इससे CA स्टोर में रखे सेब को अच्छे बाजार भाव नहीं मिल पाएंगे। बीते दो साल से बागवान इसकी मार झेल रहे हैं। इसी वजह से बागवानों को CA स्टोर की जरूरत महसूस नहीं हो रही। फिर भी मार्केटिंग बोर्ड करोड़ों रुपए CA स्टोर के निर्माण पर खर्च कर रहा है। पराला CA स्टोर पर मार्केटिंग बोर्ड ने ऐसा ही एक CA स्टोर ठियोग के पराला में भी बनाया है। इस पर भी 60 करोड़ रुपए से ज्यादा बजट खर्च किया गया। यह स्टोर एक साल से बनकर तैयार है। मगर फिर भी इसे अब तक शुरू नहीं किया जा सका। बोर्ड अधिकारियों ने पहले इसे मात्र 3.36 करोड़ में लीज पर दे दिया। बीजेपी ने इस स्टोर को लीज पर देने में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इसके बाद मामला विधानसभा में उठा तो इसका टेंडर रद्द किया गया। वेस्टफुल एक्सपेंडिचर कर रहा बोर्ड: सोहन सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने कहा कि मार्केटिंग बोर्ड कॉर्पोरेट घरानों के लिए CA स्टोर बना रहा है। उन्होंने बताया कि FTA साइन होने के बाद बागवान पहले ही घबराए हुए हैं। अब बागवान CA स्टोर में सेब रखने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। ऐसे में नए CA स्टोर बनाना वेस्टफुल एक्सपेंडिचर है। उन्होंने बताया कि HPMC ने भी जो स्टोर बना रखे हैं, वह भी कॉर्पोरेट घरानों को दे रखे हैं। FTA के बाद अब आढ़ती और कॉर्पोरेट घराने भी CA स्टोर में सेब रखने से कतराएंगे। CA स्टोर में सेब रखने से हिचकेंगे बागवान: बिष्ट प्रोग्रेसिव ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकिंदर बिष्ट ने कहा कि अगर विदेशी सेब कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, तो व्यापारी और बागवान स्थानीय सेब को महीनों तक स्टोर करने से हिचकेंगे। इससे CA स्टोर की उपयोगिता और आर्थिक व्यवहार्यता पर असर पड़ेगा। स्टोन फ्रूट ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा ने सुझाव दिया कि सरकार को नए CA स्टोर बनाने से पहले FTA के प्रभाव का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चिली और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के सेब उस समय बाजार में आते हैं, जब हिमाचल के बागवान अपने स्टोर किए गए सेब बेचते हैं, जिससे कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। फैसले की समीक्षा करेगा बोर्ड: पठानिया वहीं मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप पठानिया ने कहा कि इस फैसले की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से दोनों CA स्टोर लगाने और फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांग ली है। क्या होता है CA स्टोर कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोर एक विशेष कोल्ड स्टोरेज होता है, जिसमें ऑक्सीजन का स्तर कम और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर अधिक रखा जाता है। तापमान और नमी को नियंत्रित कर सेब को 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे उसकी गुणवत्ता बनी रहती है। कुछ साल पहले तक जब विदेशों से भारत के बाजार में कम सेब आता था, तो बागवान अपने सेब को CA स्टोर में रखते थे और फरवरी से जून के बीच बाजार में उतारते थे। इससे उन्हें अच्छे दाम मिल जाते थे। मगर बीते चार-पांच सालों के दौरान सेब का आयात बढ़ने से सेब बागवानों को अच्छे रेट नहीं मिल पा रहे। इससे बागवान CA स्टोर में भी सेब नहीं रख रहे।