असम में विधानसभा चुनाव सिंगल फेज में हो सकता है:मार्च की शुरुआत में ऐलान, अप्रैल के पहले हफ्ते में वोटिंग की संभावना

असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम की सभी 126 सीटों पर सिंगल फेज में वोटिंग की संभावना है। मार्च के पहले हफ्ते यानी 4-8 मार्च के बीच तारीखों का ऐलान हो सकता है। अप्रैल के पहले हफ्ते में वोटिंग हो सकती है। असम में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 4 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं। असम में मौजूदा सरकार का कार्यकाल मई 2026 में खत्म होगा। 10 फरवरी: SIR के बाद राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश चुनाव आयोग ने 10 फरवरी को असम में हुए स्पेशल रिवीजन (SR) 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी की। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाताओं की संख्या 2,52,01,624 थी। स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया के बाद लिस्ट में 2,43,485 नाम हटाए गए हैं। अब फाइनल लिस्ट में 1,24,82,213 पुरुष, 1,24,75,583 महिलाएं और 343 थर्ड-जेंडर शामिल हैं। स्पेशल रिवीजन की इंटीग्रेटेड ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 27 दिसंबर 2025 को पब्लिश हुई थी। इस पर 27 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां करने का समय था। 22 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 तक पूरे राज्य में घर-घर (H2H) वेरिफिकेशन अभियान चलाया गया था। असम की 126 विधानसभा सीटों पर अगले तीन महीनों में चुनाव होने हैं।
ड्राफ्ट रोल में 10.56 लोगों के नाम कटे थे इससे पहले 27 दिसंबर 2025 को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट रोल जारी किया गया था। इसमें 10,56,291 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। इनमें 93,021 हजार से ज्यादा D-वोटर यानी डाउटफुल वोटर शामिल नहीं किए गए थे। वोटर लिस्ट में से मौत, नई जगह शिफ्ट होने या डुप्लीकेट एंट्री होने की वजह से 10.56 लाख लोगों के नाम हटाए गए थे। D-वोटर वे लोग होते हैं, जिनकी नागरिकता पर सरकार को शक होता है। ऐसे लोगों को वोट देने की परमिशन नहीं होती। इन्हें फॉरेनर्स एक्ट, 1946 के तहत खास ट्रिब्यूनल तय किया जाता है और इन्हें वोटर कार्ड भी नहीं दिया जाता। इन डी-वोटर्स की जानकारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अलग से जोड़ी गई है। ……………………… अमस राजनीति से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे: आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। यानी, 2014 के मुकाबले 22 गुना ज्यादा विधायक और तीन गुना ज्यादा सांसद हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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